Add The Health Site as a
Preferred Source
Add The Health Site as a Preferred Source

International Childhood Cancer Day 2026: भारत में क्यों बढ़ रहा है बचपन में होने वाला कैंसर? पेरेंट्स को क्या करना चाहिए?

बचपन में होने वाले कैंसर को चाइल्डहुड कैंसर कहा जाता है। वैश्विक स्तर पर बचपन में होने वाले कैंसर के प्रति जागरूकता लाने के लिए हर साल 15 फरवरी को इंटरनेशनल चाइल्डहुड कैंसर डे के रूप में मनाते हैं।

International Childhood Cancer Day 2026: भारत में क्यों बढ़ रहा है बचपन में होने वाला कैंसर? पेरेंट्स को क्या करना चाहिए?
VerifiedMedically Reviewed By: Dr Arun Kumar Goel

Written by Ashu Kumar Das |Published : February 13, 2026 8:07 AM IST

Why is childhood cancer on the rise in India : भारत में आज भी कैंसर शब्द सुनते ही हमारे मन में एक डर बैठ जाता है। लेकिन जब यह बीमारी बचपन में सामने आती है, तो पेरेंट्स के दिमाग में डर के साथ-साथ असहायता और अपराध बोध भी जुड़ जाता है। बचपन में होने वाले कैंसर को चाइल्डहुड कैंसर (childhood cancer) कहा जाता है। भारत जैसे तमाम देशों में हजारों बच्चों में कैंसर के मामले सामने आते हैं। सवाल यह नहीं है कि कैंसर होता क्यों है, बल्कि यह है कि भारत में बच्चों में कैंसर के मामले लगातार क्यों बढ़ रहे हैं? और उससे भी ज्यादा अहम सवाल-  पेरेंट्स क्या कर सकते हैं?

इंटरनेशनल चाइल्डहुड कैंसर डे 2026- International Childhood Cancer Day 2026

बचपन में होने वाले कैंसर को चाइल्डहुड कैंसर कहा जाता है। वैश्विक स्तर पर बचपन में होने वाले कैंसर के प्रति जागरूकता लाने के लिए हर साल 15 फरवरी को इंटरनेशनल चाइल्डहुड कैंसर डे (International Childhood cancer day 2026) के रूप में मनाते हैं। इस दिन हॉस्पिटल, स्कूल, कॉलेज, एनजीओ और अन्य संस्थाओं में तरह-तरह के कैंपेन और प्रोग्राम के जरिये बच्चों में होने वाले जानलेवा कैंसर के जोखिम, कारण एवं उपाय को लेकर लोगों के बीच जागरूकता फैलाने की कोशिश की जाती है।

बचपन का कैंसर क्या होता है?- What is childhood cancer?

हरियाणा के सोनीपत स्थित एंडोमेड्रा अस्पताल के सीनियर ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अरुण कुमार गोयल  के अनुसार, बचपन का कैंसर (Childhood Cancer) वे कैंसर होते हैं जो आमतौर पर 0 से 14 वर्ष की उम्र में पाए जाते हैं। बच्चों में होने वाले कैंसर वयस्कों को होने वाले कैंसर से अलग होता है। बच्चों को होने वाला कैंसर न सिर्फ अलग होता है, बल्कि इसके इलाज का तरीका भी अलग होता है।

Also Read

More News

भारत में बचनपन के कैंसर का आंकड़ा

बच्चों में पाए जाने वाले प्रमुख कैंसर कौन से हैं?

भारत में बच्चों में सबसे ज्यादा पाए जाने वाले कैंसर हैं:

  1. ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर)
  2. ब्रेन ट्यूमर
  3. लिम्फोमा
  4. न्यूरोब्लास्टोमा
  5. रेटिनोब्लास्टोमा (आंख का कैंसर)
  6. बोन कैंसर (ऑस्टियोसारकोमा)

भारत में बचपन के कैंसर के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?- Why are childhood cancer cases increasing in India?

हमारे साथ बातचीत में डॉ. अरुण कहते हैं कि यह सवाल बहुत गहरा है और इसका जवाब केवल एक कारण में नहीं छिपा। पहले भी बच्चे बीमार होते थे, लेकिन अब उन्हें पहचाना जा रहा है। 20 साल के मेडिकल इतिहास पर गौर किया जाए, तो भारत में पहले के मुकाबले कैंसर का डायग्नोसिस बेहतर हुआ है। इतना नहीं, पहले ग्रामीण इलाकों में कैंसर की पहचान ही नहीं हो पाती थी। लेकिन अब सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में जांच की सुविधाएं बढ़ी हैं। कैंसर रजिस्ट्रियों का नेटवर्क मजबूत हुआ है।

1. प्रदूषण से बचपन में कैंसर बढ़ने की मुख्य वजह

ऑन्कोलॉजिस्ट बताते हैं कि भारत जैसे विकासशील देशों में आज वायु और जल का प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है। वायु प्रदूषण में मौजूद PM2.5 फेफड़ों को प्रभावित करते हैं। इस तरह की प्रदूषित हवा में बच्चे अगर लंबे समय तक सांस ले, तो उसमें फेफड़ों के कैंसर होने की संभावना 10 गुणा तक बढ़ जाती है। वायु के बाद बात आती है पानी की। हमारे देश में आज भी एक बड़ा तबका कीटनाशकों से दूषित पानी पी रहा है। गंदा पानी पीने से सिर्फ हैजा जैसी बीमारी नहीं बल्कि कैंसर जैसी घातक बीमारी भी होती है। वायु और जल प्रदूषण सभी बच्चों के डिवेलप हो रहे सेल्स को नुकसान पहुंचा सकते हैं। बच्चों का इम्यून सिस्टम अभी पूरी तरह मजबूत नहीं होता, इसलिए वे ज्यादा संवेदनशील होते हैं। ऐसे में उनमें कैंसर का खतरा ज्यादा हो सकता है।

2. प्रेग्नेंसी में ये गलती बढ़ाती है बचपन का कैंसर

कई रिसर्च बताती हैं कि बच्चे का कैंसर कभी-कभी मां की प्रेग्नेंसी से जुड़ा होता है। जो महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान स्मोकिंग सेकेंड हैंड स्मोक, शराब, कोल्ड ड्रिंक, बिना सलाह दवाओं का सेवन और रेडिएशन एक्सपोजर में रहती हैं, उनके बच्चों में कैंसर का खतरा ज्यादा होता है। डॉ. अरुण कुमार गोयल का कहना है कि प्रेग्नेंसी के दौरान स्मोकिंग और शराब का सेवन करने से बच्चे के जीन स्तर पर बदलाव हो सकते हैं। जिससे कैंसर का खतरा बढ़ता है।

3. खानपान की गलत आदतें

आज के बच्चे जंक फूड ज्यादा खाते हैं। जंक फूड में इस्तेमाल होने वाला तेल, सोडियम और तेल का बार-बार इस्तेमाल करने से भी कैंसर का खतरा बढ़ता है। इसके अलावा बच्चों का मोबाइल, टीवी और स्क्रीन टाइम ज्यादा होना भी कैंसर के खतरे को बढ़ावा देता है।

4. फिजिकल एक्टिविटी की कमी

मोया क्लीनिककी वेबसाइट पर छपी एक रिसर्च के अनुसार, इन दिनों बच्चे अपना ज्यादा समय मोबाइल और टीवी के सामने गुजारते हैं। ऐसी परिस्थिति में बच्चों का दौड़ना, कूदना और खेलना कम होता है। आसान भाषा में कहें तो डिजिटल जमाने में बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी कम हो गई है, जिसके कारण मोटापा, हार्मोनल बदलाव और कमजोर इम्यूनिटी की समस्या बच्चों में देखी जाती है। ये सब कैंसर के जोखिम को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ाते हैं।

बचपन में होने वाले कैंसर के शुरुआती लक्षण

डॉ. अरुण कुमार गोयल का कहना है कि भारत जैसे देश में कैंसर का सबसे बड़ा दुश्मन है देरी। वयस्कों और बच्चों में कैंसर के लक्षण जब हल्के होते हैं, तब लोग ध्यान नहीं देते हैं। इसके कारण कैंसर के इलाज में देरी होती है। इसलिए बचपन में होने वाले कैंसर को शुरुआती स्टेज में पहचानना जरूरी है। बचपन में होने वाले कैंसर के सामान्य लक्षणों में शामिल हैः

  • कम समय में बार-बार बुखार आना
  • बिना किसी कारण अचानक वजन कम होना
  • बहुत ज्यादा थकान
  • शरीर पर गांठ
  • हड्डियों में लगातार दर्द
  • आंखों में सफेद चमक
  • बार-बार इन्फेक्शन
  • शरीर में खून की कमी

डॉक्टर बताते हैं कि बच्चों में ये लक्षण आम बीमारियों जैसे लग सकते हैं, लेकिन यह अगर लगातार बने रहते हैं या बार-बार बच्चों को इस तरह की परेशानी हो रही है, तो पेरेंट्स को सावधान होना चाहिए और इस बारे में डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

पेरेंट्स की भूमिका: क्या करें, क्या न करें

  1. जागरूक बनें, डरें नहीं- बचपन में होने वाले कैंसर से डरने की नहीं बल्कि इसके बारे में जागरूक होकर एक्शन लेने की जरूरत है। कई बार डर आपको एक्शन लेने से रोकता है। ऐसे में पेरेंट्स को जागरूक होकर सही कदम उठाने की जरूरत है। पेरेंट्स होने के नाते आपको ध्यान रखना होगा कि जब आप जागरूक और दिमागी रूप से मजबूत होगा, तभी बच्चे का इलाज करवाकर उसकी जिंदगी को बचा पाएंगे।
  2. नियमित हेल्थ चेक-अप- बचपन में होने वाले कैंसर से बचाव के लिए पेरेंट्स को बच्चे के ग्रोथ चार्ट पर ध्यान देना चाहिए। 0 से 14 साल की उम्र तक आपके बच्चे के शारीरिक और मानसिक ग्रोथ में गिरावट आ रही है, तो इस बारे में डॉक्टर से बात करें। बीमारियों से बचाव करने के लिए समय-समय पर बच्चों के खून की जांच करें। डॉक्टर सलाह देते हैं कि साल में 1 बार बच्चे का कंप्लीट ब्लड काउंट टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। इससे बच्चे के शरीर में कौन- कौन सी बीमारियां पनप सकती हैं, इसका पता चल सकता है।
  3. पोषण सबसे बड़ी ढाल है- बचपन में होने वाले कैंसर से बचाव के लिए पेरेंट्स को बच्चों के खानपान पर फोकस करना चाहिए। इसके लिए बच्चों की डाइट में हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त भोजन को शामिल करें। हां तक संभव हो, बच्चों को बाजार में मिलने वाला पैकेज्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड देने से बचें। पैकेज्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड को बनाने के लिए कई प्रकार के केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है। ये केमिकल्स डीएनए को डैमेज कर सकते हैं, जिससे बचपन में होने वाले कैंसर की संभावना कई गुणा ज्यादा हो जाती है। डॉक्टर का कहना है कि जो बच्चे पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड से दूर रहते हैं, उनमें विभिन्न प्रकार की बीमारियों और कैंसर का खतरा अन्य की तुलना में कम होता है।

  1. प्रेग्नेंसी के वक्त सावधानी- बचपन के कैंसर से बचाव करने के लिए प्रेग्नेंट महिलाओं को खास सावधानी बरतनी चाहिए। अगर आप प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं या प्रेग्नेंट हैं तो धूम्रपान और शराब से पूरी दूरी बनाकर रखें। आपके घर में कोई धूम्रपान और शराब का सेवन करता है, तो प्रेग्नेंसी के दौरान उस शख्स से दूरी बनाकर रखें। प्रेग्नेंसी में मां और बच्चे के लिए कुछ दवाओं का सेवन बहुत जरूरी होता है, लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह कोई दवा नहीं लेनी चाहिए। खासकर जो महिलाएं प्रेग्नेंसी से पहले धूम्रपान करती हैं, उन्हें इस नाजुक दौर में गर्भ में पलने वाले शिशु के लिए अतिरिक्त दवाओं का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
  2. वैक्सीनेशन और इंफेक्शन कंट्रोल- कुछ वायरस भविष्य में कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। इसलिए शिशु को जन्म के बाद से ही डॉक्टर की सलाह पर सभी वैक्सीन लगवानी चाहिए। समय पर वैक्सीन लगवाने से न सिर्फ बच्चों का इम्यून सिस्टम मजबूत बनता है, बल्कि ये विभिन्न प्रकार की बीमारियों और कैंसर के खतरे को बढ़ाता है। आपके बच्चे का इम्यून सिस्टम कमजोर है और उसकी वजह से उसे बार- बार इंफेक्शन की समस्या हो रही है, तो उसे कंट्रोल करने के लिए घर और आसपास की सफाई का ध्यान रखें। बच्चे के कपड़े रोजाना बदलें। बच्चों के कपड़ों को हमेशा डिसइनफेक्टर के साथ धोएं, ताकि कपड़ों में मौजूद कीटाणु मर जाएं।
  3. मानसिक सपोर्ट जरूर करें- अगर बच्चे को कैंसर डायग्नोज होता है, तो पेरेंट्स होने के नाते उसे बीमार नहीं, बहादुर महसूस कराएं। बच्चों को कैंसर होने पर खुद को दोषी बिल्कुल न ठहराएं। बच्चे को कैंसर होने पर आपको किसी प्रकार का तनाव या आत्म ग्लानी महसूस हो रही है, काउंसलिंग और सपोर्ट ग्रुप का सहारा लें। इस बारे में डॉक्टर से बात करें। ध्यान रखें यह समय जितना आपके लिए चैलेंजिंग है, उससे 100 गुणा ज्यादा आपके बच्चे के लिए है। ऐसे दौर में आप खुद को कमजोर कर लेंगे तो आपके बच्चों को कौन सपोर्ट करेगा। इसलिए खुद को शारीरिक और मानसिक दोनों ही तौर पर मजबूत रखने की कोशिश करें।

भारत में बचपन के कैंसर के इलाज की उम्मीद

2 दशक पहले भारत में बचपन में होने वाले कैंसर का इलाज काफी मुश्किल और महंगा हुआ करता था। पर अब कई सरकारी अस्पतालों में बचपन के कैंसर का मुफ्त या कम लागत पर इलाज हो जाता है। वर्तमान में केंद्र सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिसमें इनरोल करके आप कैंसर का इलाज मुफ्त या बाजार से कम लागत पर करवा सकते हैं। इसके अलावा NGO और चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा बचपन के कैंसर का इलाज कम पैसों पर करवाने से मरीजों का सर्वाइवल रेट लगातार बेहतर हो रहा है।

बच्चों को कैंसर से कैसे बचाएं?

बचपन के कैंसर में समाज की जिम्मेदारी

हेल्थ एक्सपर्ट इस बात को मानते हैं कि बचपन होने वाला कैंसर सिर्फ एक बच्चे, पेरेंट्स या सिर्फ एक परिवार की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की लड़ाई है। स्कूलों में हेल्थ एजुकेशन, वायु और जल प्रदूषण नियंत्रण, सुरक्षित फूड पॉलिसी और बच्चों के लिए हेल्दी एनवायरनमेंट ये सब मिलकर ही बदलाव ला सकते हैं और बचपन में होने वाले कैंसर के आंकड़ों को घटा सकते हैं।

याद रहे कैंसर या किसी भी बीमारी की शुरुआत 1 दिन या 1 महीने में नहीं होती है। कैंसर को शरीर के अंदर पनपने के लिए कई सालों का वक्त लगता है। ऐसे में हमें खुद के शरीर पर ध्यान देने की जरूरत है। छोटी सी लापरवाही शरीर में बीमारी को बढ़ा सकती है। वहीं, दूसरी ओर थोड़ी सी सावधानी हमें कई प्रकार की बीमारियों से बचाने में मदद कर सकती है।

Add The HealthSite as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source

Disclaimer : प्र‍िय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्‍य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।