कम उम्र में ज्यादा क्यों रहने लगा बीपी? क्यों भारत को बेहतर इलाज के साथ बेहतर स्क्रीनिंग की जरूरत है?

हाई ब्लड प्रेशर आज के समय में एक कोमन बीमारी बनता जा रहा है और चिंता का विषय यह है कि कम उम्र के लोगों में भी इस बीमारी के लक्षण देखने को मिल रहे हैं, जो कि काफी गंभीर समस्या बन सकती है।

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Written By: Mukesh Sharma | Updated : May 18, 2026 3:29 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Praveen Raman Mishra

आज से अगर 15 से 20 साल पहले की बात करें तो ये हाई ब्लड प्रेशर जैसी क्रोनिक समस्याएं आमतौर पर ज्यादा उम्र के लोगों में ही देखने को मिलती थी। लेकिन आज के समय में हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है। देखा गया है कि यहां तक 30 से 40 साल के लोगों में भी यह तेजी से बढ़ रहा है। इसके पीछे के कारणों का भी ज्यादातर लोगों को पता है कि खराब खानपान, तनाव, नींद की कमी, धूम्रपान, मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी इसके बड़े कारण हैं। लोग इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, लेकिन चिंता की बात यह है कि कई लोगों को लंबे समय तक पता ही नहीं चलता कि उनका BP बढ़ा हुआ है, क्योंकि शुरुआत में इसके लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते और इसीलिए इसे साइलेंट किलर कहा जाता है। ShardaCare–Healthcity में एसोसिएट कंसल्टें, कार्डियक साइंसेज, डॉ. प्रवीण रमन मिश्रा ने इस बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं जिनके बारे में हम इस लेख में जानेंगे।

बीपी चेक करना काफी नहीं

अच्छी बात है कि अब भारत में लोग समझने लगे हैं कि सिर्फ बीपी चेक करना काफी नहीं है और ऐसे में अब हाइपरटेंशन की स्क्रीनिंग पर काफी ध्यान दिया जा रहा है। हाइपरटेंशन के हर मरीज को इस बात का पता होना चाहिए कि केवल BP चेक कर लेना ही समाधान नहीं है। कई लोग जांच के बाद इलाज शुरू नहीं करते या कुछ दिन दवा लेने के बाद बंद कर देते हैं। इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी की बीमारी और हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ जाता है।

हाइपरटेंशन को मैनेज करने के लिए रेगुलर बीपी मॉनिटरिंग के साथ-साथ सही समय पर फॉलो-अप और सही काउंसलिंग होना बेहद जरूरी है। अगर मरीज को लगातार समझाया जाए कि दवाएं और लाइफस्टाइल बदलाव क्यों जरूरी हैं, तो बीमारी को बेहतर तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है।

कम उम्र में जागरूकता जरूरी

अब वह समय नहीं रहा है कि हाई बीपी यानी हाइपरटेंशन की समस्या को उम्र से जोड़कर देखा जाए। अब युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। जिन लोगों के परिवार में हाई BP, डायबिटीज या हार्ट डिजीज की हिस्ट्री है, उन्हें जल्दी स्क्रीनिंग करवानी चाहिए। ऑफिस में लंबे समय तक बैठना, जंक फूड खाना और तनावभरी जिंदगी भी जोखिम बढ़ाती है और जिन लोगों को लाइफस्टाइल ऐसा है उन्हें नियमित रूप से हाई बीपी की जांच कराते रहना चाहिए।

स्कूल, कॉलेज और ऑफिस स्तर पर भी जागरूकता अभियान जरूरी हैं ताकि लोग समय रहते अपनी जांच कराएं और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं।

इलाज के साथ फॉलो-अप भी जरूरी

हाइपरटेंशन एक ऐसी बीमारी है जिसे पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन सही इलाज और नियमित निगरानी से इसे नियंत्रित रखा जा सकता है। मरीजों को दवा समय पर लेना, नमक कम करना, नियमित व्यायाम, वजन कंट्रोल और पर्याप्त नींद जैसी आदतें अपनानी चाहिए। भारत को अब ऐसी स्वास्थ्य नीति की जरूरत है जिसमें सिर्फ शुरुआती जांच नहीं, बल्कि लंबे समय तक इलाज और फॉलो-अप पर भी बराबर ध्यान दिया जाए। तभी हाई BP से होने वाली गंभीर बीमारियों और मौतों को कम किया जा सकेगा।

डॉ. प्रवीण रमन मिश्रा से वीडियों में जानें हाइपरटेंशन के बारे में..

डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल हाइपरटेंशन जुड़ी सही जानकारी देना है और इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल हाई बीपी या किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

FAQs

हार्ट हेल्थ के लिए सबसे जरूरी क्या है?

संतुलित आहार, व्यायाम, तनाव नियंत्रण और नियमित जांच सबसे जरूरी होता है।

ब्लड प्रेशर का नॉर्मल लेवल कितना होना चाहिए?

आमतौर पर एक वयस्क महिला या पुरुष का ब्लड प्रेशर लेवल 120/80 mmHg के बीच  होता है।

हाई ब्लड प्रेशर लेवल के लक्षण क्या हैं?

ब्लड प्रेशर लेवल बढ़ने पर सिरदर्द, कमजोरी, थकान और हाथों-पैरों में कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

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