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भारत में लगातार हार्ट से संबंधित समस्याएं तेजी से बढ़ती जा रही हैं। लगभग हर एक दूसरे दिन किसी न किसी को हार्ट अटैक आने की खबर सामने आ रही हैं। ऐसे में हार्ट संबंधी बीमारी लोगों के सामने काफी चिंता का विषय बन चुका है। डॉक्टर्स कहते हैं कि अब हार्ट की बीमारी सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही है, अब युवाओं को भी हार्ट अटैक या फिर हार्ट से जुड़ी समस्याएं हो रही हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि 20 वर्ष से कम उम्र के लोग भी हार्ट की बीमारियों से जूझ रहे हैं। हाल में आए Lancet और Indian Council of Medical Research (ICMR) की रिपोर्ट्स के अनुसार, 2015 के बाद से हृदय रोगों से होने वाली मौतों में लगभग 30% की वृद्धि हुई है। शहरी क्षेत्रों में यह समस्या और भी गंभीर हो गई है, जहां फास्ट-फूड का बढ़ता चलन, वायु प्रदूषण और लंबे समय तक बैठकर काम करने वाली लाइफस्टाइल प्रमुख कारण बन रहे हैं।
हैदराबाद स्थित यशोदा हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अनूप अग्रवाल का कहना है कि हार्ट अटैक या फिर हार्ट से जुड़ी समस्याओं के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति हार्ट डिजीज से अपनी जान गंवा रहा है और अधिकतर मामले 30 से 60 वर्ष की उम्र के लोगों में सामने आ रहे हैं यानी ये वो समय हैं, जब इंसान काफी ज्यादा प्रोडक्टिव रहता है। ऐसे में आज के समय में हार्ट डिजीज काफी ज्यादा चिंता का विषय बना हुआ है। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि आखिर क्यों बढ़ रहे हैं हार्ट डिजीज के मामले-
दिल की बीमारियां लगातार बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं। आइए जानते हैं कुछ कारणों के बारे में-
मेटाबॉलिक सिंड्रोम - डॉक्टर अनूप का कहना है कि लगभग 40% लोगों में मेटाबॉलिक सिंड्रोम की समस्या पाई जाती है, जिसमें हाई ब्लड शुगर, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, थायराइड और असामान्य लिपिड स्तर शामिल होते हैं। इन बीमारियों से जूझ रहे लोगों को हार्ट डिजीज का खतरा काफी ज्यादा रहता है। लोगों में बढ़ता मेटाबॉलिक सिंड्रोम हार्ट डिजीज का कारण बन सकता है।
स्थिर जीवनशैली - WHO के अनुसार, भारत में 20% से भी कम लोग सप्ताह में 150 मिनट व्यायाम करते हैं, जिसकी वजह से ब्लड वेसेल्स की कार्य क्षमता प्रभावित होती है। ऐसी स्थिति में हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ता है। इसलिए लोगों में हार्ट डिजीज की समस्या ज्यादा होने की संभावना बढ़ गई है।
खराब खानपान भी है वजह - मीठे ड्रिंक्स, ट्रांस फैट और जंक फूड का अधिक सेवन करने की वजह से भी हार्ट डिजीज की बीमारियां काफी ज्यादा बढ़ रही हैं। दरअसल, इस तरह के आहार का सेवन करने से शरीर में ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ाता है, जो हार्ट पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
कुछ अन्य जोखिम - इसके अलावा स्लीप एपनिया, वेपिंग और लंबे समय तक तनाव लेने की वजह से भी हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ता है। दरअसल, इन कारणों की वजह से कोर्टिसोल बढ़ने लगता है, जिसकी वजह से दिल की धड़कनें असामान्य होने लगती हैं।
दिल की बीमारी अक्सर बिना लक्षण के धीरे-धीरे बढ़ती है, इसलिए समय-समय पर जांच बेहद जरूरी है।
1. डॉक्टर का कहना है कि आप रोजाना एक्टिव रहें, इसके लिए तेज चलना, साइकिल चलाना या कोई भी फिजिकल एक्टिविटी अपनाएं।
2. संतुलित आहार लें, इसमें आप नट्स, साबुत अनाज और ओमेगा-3 युक्त मछली इत्यादि का सेवन कर सकते हैं।
3. घर पर नियमित मॉनिटरिंग करें। मुख्य रूप से ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल की जांच करते रहें।
4. धूम्रपान और शराब से दूरी बनाकर रखें। इस तरह की चीजें हार्ट की परेशानियां बढ़ा सकती हैं।
5. सालाना हार्ट चेकअप कराएं, ताकि हार्ट से जुड़ी जोखिमों का पता पहले चल सके।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।