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Medically Verified By: Dr Avinash Tiwari
The New Face of Liver Disease: यह बहुत ही ताजुब की बात है कि जो लोग खुद को फिट रखने के लिए जिम जा रहे हैं और अपनी हेल्थ को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें ही फैटी लिवर की समस्या हो रही है। यह तो वही बात हो गई की इतनी मेहनत सेहत को बेहतर करने के लिए की और परिणाम में मिली फैटी लिवर बीमारी। फैटी लिवर यानी कि एक ऐसी स्थिति, जिसमें लिवर में फैट यानी कि चर्बी सामान्य से ज्यादा हो जाती है। इसके बाद लिवर ठीक से काम करना बंद कर देता है और आगे चलकर फाइब्रोसिस या सिरोसिस का कारण बनता है।
आइए अब बात करते हैं कि आखिर फिटनेस पर ध्यान देने वाले युवाओं में इसका ज्यादा खतरा क्यों बढ़ रहा है? देखें वैसे तो बरसों से फैटी लीवर की बीमारी को ज्यादा वजन बढ़ने, बैठे रहने वाली आदतों और गलत खानपान से जोड़कर देखा जाता था। लेकिन आजकल डॉक्टर ऐसे बहुत सारे दुबले-पतले और सेहत को लेकर जागरूक लोगों में फैटी लीवर देख रहे हैं, जो बाहर से पूरी तरह फिट दिखते हैं। ऐसे मेटाबॉलिक रूप से अनहेल्दी होते हैं लेकिन दिखने में इनका वजन नॉर्मल होता है। ऐसा क्यों होता है, यह जानने के लिए हमने रीजेंसी अस्पताल में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी और एडवांस एंडोस्कोपी के विशेषज्ञ डॉक्टर अविनाश तिवारी से बात की। उन्होंने क्या जानकारी दी, आइए आपको बताते हैं।
डॉक्टर अविनाश का कहते है कि 'ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर का वजन अकेला अंदरूनी मेटाबॉलिक संतुलन बनाने का सही तरीकानहीं है। बहुत से लोग जो पतले दिखते हैं और कसरत भी करते हैं, उनके शरीर में उनकी सोच से ज्यादा विसेरल फैट हो सकता है। यह वह चर्बी है जो त्वचा के नीचे जमा होने के बजाय अंदरूनी अंगों के चारों ओर लिपटी रहती है।
डॉक्टर बताते हैं कि यह छुपा हुआ फैट बहुत एक्टिव होता है। यह नॉर्मल BMI यानी कि सामान्य बॉडी मास इंडेक्स वाले लोगों में भी इंसुलिन रेजिस्टेंस और धीमी गति से मेटाबॉलिक खराबी पैदा कर सकता है। अगर इसमें जेनेटिक्स, आज के जमाने का तनाव, अनियमित नींद और प्रोसेस्ड फूड जैसी चीजें भी जोड़ दें तो यह फिट दिखने वाले लोगों के लीवर में भी चर्बी जमा होने का एक पक्का कारणबन जाता है।

इस तरह का फैटी लीवर खास तौर पर इसलिए मुश्किल है क्योंकि यह चुपचाप बढ़ता रहता है। अगर इसके लक्षण दिखते भी हैं, तो वे बहुत हल्के होते हैं। जैसे लगातार थकावट, पसलियों के नीचे हल्का भारीपन या बेचैनी या रूटीन टेस्ट में लीवर एंजाइम का थोड़ा-सा बढ़ा हुआ आना।
चूंकि इन संकेतों को आसानी से नजरअंदाज कर दिया जाता है, इसलिए इन दुबले लोगों में बीमारी का पता अक्सर देर से चलता है। कभी-कभी तो जब लीवर में सूजन या हल्का-फुल्का स्कोरिंग शुरू हो चुकी होती है। फिट दिखने के बावजूद उनमें डायबिटीज, दिल की बीमारी और लीवर से जुड़ी कॉम्प्लीकेशन्स का खतरा उतना ही ज्यादा हो सकता है, जितना कि मोटे लोगों में होता है।
यह बदलती सच्चाई हमें याद दिलाती है कि लीवर की सेहत सिर्फ बाहरी दिखावे या वजन से तय नहीं होती। फिटनेस का ध्यान रखने वाले लोगों, चाहे वो मैराथन दौड़ने वाले हों, रोज जिम जाने वाले हों या योग करने वाले हों, उन्हें भी अपने अंदर क्या चल रहा है, इस पर ध्यान देना होगा।
न सिर्फ उन लोगों के लिए जिन्हें हम ज्यादा खतरे में मानते हैं, बल्कि अब हर किसी के लिए अपनी बॉडी कंपोजीशन यानी कि शरीर में फैट, मांसपेशी आदि की मात्रा को समझना, मेटाबॉलिक स्थिरता के लिए खाना, मांसपेशियों को मजबूत करना, तनाव को संभालना और समय-समय पर लीवर की जांच करवाना जरूरी हो गया है।
फैटी लीवर अब सिर्फ मोटे लोगों की बीमारी नहीं रही, यह आज की लाइफस्टाइल, जेनेटिक्स और अंदरूनी मेटाबॉलिक पैटर्न से तय होने वाली समस्या है। और इस सच्चाई को पहचानना ही सेहतमंद दिखने वाले लोगों में भी इस छुपे हुए नुकसान को रोकने का पहला कदम है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
लिवर खराब होने पर सबसे पहले भूख कम हो जाती है।
लिवर साफ करने के लिए आप नींबू पानी पी सकते हैं। इससे शरीर की इम्यूनिटी भी बूस्ट होती है।
फैटी लिवर कई कारणों से हो सकता है। शराब इसका मुख्य कारण है। लेकिन, यह गैर-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर रोग भी है। यह तब होता है, जब लिवर में ज्यादा फैट जमा हो जाता है।
फैटी लिवर का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट, बायोप्सी, अल्ट्रासाउंड आदि के जरिए लगाया जा सकता है।