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फाइबर फूड क्या है जिनके सेवन से कम हो जाता है कोलोरेक्‍टल कैंसर का खतरा, जानिए आंत के कैंसर में क्यों फायदेमंद है फाइबर

कैंसर के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस (World Cancer Day 2022) के रूप में मनाया जाता है। आज इस मौके पर हम आपको एक्सपर्ट के माध्यम से बताएंगे कि कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal Cancer) क्या होता है और फाइबर फूड (Fiber Food) इस कैंसर से बचाने में कैसे मददगार साबित हो सकता है।

Written By Atul Modi
Updated : February 4, 2022 11:49 AM IST

कोलोरेक्‍टल कैंसर उसे कहते हैं जो बड़ी आंत (कोलन) या मलाशय (रेक्‍टम) में शुरू होता है। यह दुनियाभर में रोग पैदा करने वाला सबसे आम प्रकार के कैंसर में से एक है। विश्‍वभर में लोगों को रोगग्रस्‍त करने वाला तीसरा सबसे सामान्‍य कैंसर यही है। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) के आंकड़ों के मुताबिक, कोलोरेक्‍टल कैंसर विकासशील देशों में भी तेजी से बढ़ रहा है। कोलोरेक्‍टल कार्सिनोमा से जुड़े जोखिम के कारकों को नॉन-मोडिफाएबल और मोडिफाएबल में बांटा जा सकता है। नॉन-मोडिफाइएबल जोखिम कारकों में उम्र, नस्‍ल, आनुवांशिकी, पारिवारिक इतिहास, ट्यूमर का इतिहास और अल्‍सरेटिव कोलाइटिस शामिल हैं। मोडिफाएबल जोखिम कारकों में सिगरेट का प्रयोग, कम शारीरिक गतिविधि, लंबे समय तक शराब का सेवन और खान-पान संबंधी खराब आदतें शामिल हैं।

कोलोरेक्‍टल कैंसर और फाइबर युक्‍त आहार - How Does Fiber Reduce The Risk of Colon Cancer:

कोलोरेक्‍टल कैंसर के प्रमुख कारणों में कम फाइबर युक्‍त आहार शामिल है। आहर में फाइबर जितना कम होगा, कोलोरेक्‍टल कैंसर का जोखिम उतना ही अधिक होता है। इसलिए, भोजन में फाइबरयुक्‍त खाद्य पदार्थों के न होने से कोलोरेक्‍टल कैंसर का जोखिम बढ़ता जाता है।

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अधिक फाइबर युक्‍त भोजन का सेवन करने से शरीर में समाने वाली कैलारी की मात्रा घट जाती है और वज़न भी स्‍वास्‍थ्‍य के अनुरूप रहता है, जो कि कैंसर के जोखिम कम रखने के लिए काफी महत्‍वपूर्ण है। इस महत्‍वपूर्ण पोषक तत्‍व का सबसे श्रेष्‍ठ स्रोत है अनप्रोसेस्‍ड प्‍लांट-बेस्‍ड फूड्स। अधिक फाइबर युक्‍त आहार का सेवन हमारे शरीर में कैलोरी की मात्रा कम रखता है जिससे वज़न स्‍वास्‍थ्‍य के लिहाज़ से उचित सीमा में रहता है और इससे कैंसर का जोखिम भी कम हो जाता है।

आहार में शामिल फाइबर में एक प्रकार का कार्बोहाइड्रेट होता है जिसे मनुष्‍य पचा नहीं पाते थे। यह फाइबर ही हमारे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट से गुजरने वाले खान-पान की गति को घटाता है, जिससे लोगों को हर बार भोजन के बाद देर तक पेट भरा होने का अहसास बना रहता है। यह फाइबर शरीर में वसा और कलेस्‍ट्रोल का अवशोषण भी कम करता है, जिससे कलेस्‍ट्रोल का स्‍तर घटता है और मल-त्‍याग की प्रक्रिया भी आसान तथा अधिक बार होती है।

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फाइबर युक्‍त आहार के प्रकार - Type of Fiber in Hindi

फाइबर दो प्रकार का होता है: सॉल्‍यूबल तथा इनसॉल्‍यूबल। सॉल्‍यूबल फाइबर पानी को आकर्षित करता है और पाचन के दौरान उसे जल में बदलता है, जिससे पाचन प्रक्रिया सुस्‍त हो जाती है। सॉल्‍यूबल फाइबर युक्‍त भोज्‍य पदार्थों में ओट्स, जौ, सूखे मेवे, बीज, मटर, एवोकेडो, संतरे तथा ब्रसेल्‍स स्‍प्राउट्स शामिल हैं। इनसॉल्‍यूबल फाइबर अधिक तेजी से भोजन को पेट एवं आंतों से गुजारने में मदद करते हैं। इनसॉल्‍यूबल फाइबर युक्‍त भोज्‍य पदार्थों में सेब, साबुत अनाज और गेहूं का चोकर शामिल है। हमें अपने आहार में धीरे-धीरे फाइबर को शामिल करना चाहिए। तेजी से और अचानक भोजन में फाइबर को शामिल करने से शरीर में असहजता और पेट फूलने जैसी शिकायत बढ़ सकती है। हर भोजन में थोड़ी मात्रा में फाइबर शामिल करना चाहिए जैसे कि आप किसी फल का कुछ भाग या प्रोसेस्‍ड अनाज की बजाय साबुत अनाज ले सकते हैं। शरीर में पानी की सही मात्रा होने से भी अतिरिक्‍त फाइबर पेट में किसी तरह की गड़बड़ी पैदा नहीं करता।

फाइबर युक्‍त आहार कोलोरेक्‍टल कैंसर होने की संभावनाओं को कैसे कम करते हैं?

साबुत अनाजों से प्राप्‍त होने वाले फाइबर में माइक्रोन्‍यूट्रिएंट्स जैसे कि फोलेट होते हैं जिनके प्रयोग से कोलोरेक्‍टल कैंसर के मामले कम होने के प्रमाण मिले हैं, लेकिन अन्‍य फाइबर स्रोतों (जैसे कि सब्जियों, फलों एवं दालों) की कार्सिनोजे‍नेसिस में भूमिका के प्रमाण अभी पुष्‍ट रूप से नहीं मिले हैं। फलों तथा सब्जियों में फाइबर न सिर्फ पर्याप्‍त मात्रा में मौजूद होते हैं, बल्कि इनमें पाए जाने वाले माइक्रो तथा मैक्रो न्‍यूट्रिएंट्स में एंटीट्यूमर गुण भी होते हैं, और इसीलिए ये आहार से रोगों के बचाव में अहम भूमिका निभाते हैं।

आहार में फाइबर की उपस्थिति कोलोरेक्‍टल कैंसर से बचाव में काफी कारगर होती है। इस बारे में लोगों को जागरूक बनाने तथा अपनी खानपान की आदतों में सुधार के लिए उन्‍हें शिक्षित करने की जरूरत है ताकि वे अपने आहार में फाइबर को शामिल करें। ऐसा करने पर मल-त्‍याग नियमित होगा और कोलोरेक्‍टल कार्सिनोमा जैसे रोगों की आशंका भी काफी हद तक कम हो जाएगी।

(Inputs By: Dr. Sanjay Verma, Additional Director - Minimal Access, Bariatric and GI Surgery, Fortis Escorts Heart Institute, Okhla, New Delhi)

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