
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Medically Verified By: Dr. kirthi paladugu
Feet Swelling
दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों काफी तेज बारिश हो रही है। यह बारिश गर्मी से काफी हद तक राहत दिलाती है, लेकिन अपने साथ कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं भी लाता है। इन्हीं परेशानियों में से एक है पैरों में सूजन। कई लोगों को मानसून के दौरान पैरों, टखनों और पंजों में सूजन, भारीपन या जकड़न महसूस होने लगती है। डॉक्टर का कहना है कि बारिश में पैरों में सूजन के पीछे न सिर्फ ज्यादा चलना-फिरना है, बल्कि मौसम में नमी, ब्लड सर्कुलेशन में बदलाव, लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे या खड़े रहना और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। इस विषय की अधिक जानकारी के लिए हमने यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद में सीनियर कंसल्टेंट आर्थ्रोस्कोपी सर्जन और मिनिमली इनवेसिव ट्रॉमा, फुट और एंकल सर्जन डॉ. कीर्ति पलाडुगु से बातचीत की है। आइए जानते हैं क्या कहती हैं डॉक्टर
डॉक्टर का कहना है कि बारिश के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ जाती है। इससे शरीर का तापमान कंट्रोल करने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और कुछ लोगों में शरीर अतिरिक्त तरल पदार्थ को रोककर रखने लगता है। इसी वजह से पैरों और टखनों में सूजन दिखाई दे सकती है। 
मानसून में पैरों की सूजन का खतरा इन लोगों में अधिक हो सकता है, जैसे-
अगर सूजन बार-बार हो रही है या लगातार बनी रहती है, तो इसे सामान्य मौसम का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
नहीं, कई बार पैरों में सूजन किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकती है, जैसे-
अगर सूजन के साथ दर्द, लालिमा, सांस फूलना या एक ही पैर में अचानक सूजन आए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
कुछ आसान उपाय अपनाकर सूजन का खतरा कम किया जा सकता है, जैसे- 
कुछ गंभीर स्थिति में आपको डॉक्टर को दिखाने की फौरन जरूरत होती है, जैसे-
इस तरह के लक्षण दिखाई देने पर आपको फौरन डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत होती है, ताकि स्थिति की गंभीरता को कम किया जा सके।
Disclaimer: मानसून में पैरों में हल्की सूजन कई लोगों में मौसम और नमी के कारण हो सकती है, लेकिन इसे हमेशा सामान्य मानना सही नहीं है। अगर सूजन बार-बार हो, बढ़ती जाए या अन्य लक्षणों के साथ दिखाई दे, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। सही खानपान, पर्याप्त पानी, नियमित गतिविधि और पैरों की उचित देखभाल से इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है।