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इन 5 लक्षणों के दिखने पर जरूर करा लें आंखों की जांच, जानिए बच्चों का आई चेकअप कब कराना चाहिए?
हमारी आंखें बहुत नाजुक और सेंसिटिव होती हैं। इसलिए हर किसी को अपनी आंखों का ख्याल रखना चाहिए। यदि आपके घर बच्चे हैं तो आपको उनकी आंखों का भी विशेष ध्यान (Eye Checkup For Children) रखने की जरूरत है। आजकल अधिक फोन चलाने व ऑनलाइन क्लास की वजह से बच्चों की आंखों पर अधिक प्रभाव पड़ रहा है। जिस कारण उनकी आंखें कमजोर होती जा रही हैं। इसलिए आपको अपने बच्चों की आंखों से सम्बन्धित किसी भी लक्षण को अनदेखा नहीं करना चाहिए और साल में एक बार बच्चों की आंखों की जांच (Eye Checkup For Children) अवश्य कराना चाहिए।
हालांकि, आपको अपने बच्चों की आंखों की केयर करनी बहुत पहले से ही शुरू कर देनी चाहिए। जैसे आप उन्हें डॉक्टर या डेंटिस्ट के पास चेकअप के लिए लेकर जाते हैं वैसे ही आपको आंखों के डॉक्टर के पास भी अपने बच्चे की आंखों का चेकअप करवाने अवश्य ले कर जाना चाहिए। इस प्रकार के चेकअप से आंखों से सम्बन्धित समस्याओं का समय से ही पता चल जाता है और आने वाले बड़े खतरे को टाला जा सकता है।
हालांकि छोटे बच्चों को चार्ट पढ़ना नहीं आता है परन्तु यह उनके आई चेकअप से बचने का एक बहाना नहीं बनाया जा सकता। बच्चों का पहला आंखों का चेकअप जब वे 6 महीने के होते हैं तब ही करवा लेना चाहिए। इस प्रक्रिया को एक बार बच्चों के स्कूल में जाने से पहले फिर दोहराएं।
इसके बाद आप उनका आई चेकअप तब करवा सकते हैं जब वह 5 या 6 साल के हों। एक बार जब आपका बच्चा नियमित रूप से स्कूल जाना शुरू कर दे तो आपको हर 2 साल में उनकी आँखों की जांच करानी चाहिए। ताकि मालूम हो सके कि उन्हें चश्मे की ज़रूरत है या कोई अन्य परेशानी है। वहीं दूसरी ओर आंखों की समस्याओं का यदि कोई पारिवारिक इतिहास है तो भी शिशुओं और बच्चों की आंखें नियमित रूप से जांच करवानी चाहिए।
6 महीने के बच्चे की आंखें पूरी तरह से मेच्योर हो जाती हैं। उनकी आंखें उनकी आंखें पूरी तरह से देखने, रंग और गहराई आदि को समझने में एक वयस्क की तरह परी तरह से विकसित होती हैं। जब आप बच्चे को आई चेकअप के लिए ले जाते हैं तो डॉक्टर उनका निम्न प्रकार से टेस्ट करते हैं।
यदि आपके बच्चे को अक्षर पढ़ने नहीं आते हैं या वह शरमा रहा है तो उसकी आई टेस्टिंग के कुछ अन्य तरीके होते हैं जैसे उनकी आंखों के सामने अक्षरों वाले चार्ट रख दिया जाता है।
यदि आपको निम्न लक्षण अपने बच्चे की आंखों में दिखाई देते हैं तो उन्हें तुरंत डॉक्टर के पास लेकर जाएं।।