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कुछ बच्चों में मिर्गी की दवाएं काम क्यों नहीं कर पाती? ड्रग-रेजिस्टेंट एपिलेप्सी के बारे में जरूर समझें पेरेंट्स

मिर्गी का असर बच्चे के शारीरिक स्वास्थ्य पर ही नहीं बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। इस लेख में हम ड्र रेजिस्टेंट एपिलेप्सी के बारे में समझेंगे कि आखिर कई बार मिर्गी की दवाएं काम क्यों नहीं कर पाती हैं।

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Written By: Mukesh Sharma | Updated : July 29, 2026 11:16 AM IST

देखा गया है कि बच्चों में होने वाली एपिलेप्सी की समस्याओं को एंटी-सीजर दवाओं से अच्छे से कंट्रोल कर लिया जाता है, लेकिन कुछ बच्चों पर ये दवाएं भी पूरी तरह से या कुछ हद तक बेअसर दिखती हैं। ऐसे में देखा जाता है कि मिर्गी से जूझ रहे बच्चों को ये दवाएं नियमित रूप से दी जाती हैं, लेकिन फिर भी मिर्गी के दौरे कंट्रोल नहीं हो पाते हैं। जॉली हेल्थकेयर से मेडिकल स्पोक्सपर्सन डॉ. सूफी रूमी के अनुसार इस स्थिति को को ड्रग-रेजिस्टेंट एपिलेप्सी का नाम दिया जाता है। ऐसे में ये दवाएं बच्चे की हेल्थ कंडीशन से ज्यादा उसकी पढ़ाई, सोचने-समझने की क्षमता और भावनात्मक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। इंटरनेशनल लीग अगेंस्ट एपिलेप्सी (ILAE) के अनुसार, यदि दो सही एंटी-सीजर दवाओं के इस्तेमाल के बाद भी दौरे नियंत्रित न हों, तो इसे ड्रग-रेजिस्टेंट एपिलेप्सी माना जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार लगभग एक तिहाई मरीजों को इसी ड्रग-रेजिस्टेंट एपिलेप्सी का सामना करना पड़ता है।

पेरेंट्स को किन बातों पर ध्यान देना होगा

मिर्गी की समस्याओं से पीड़ित हर बच्चे के माता-पिता को इस समस्या के शुरुआती संकेतों की पहचान करना बेहद जरूरी है। अगर बच्चा समय पर दवा लेने के बावजूद भी बार-बार मिर्गी के दौरे आते हैं और अब दौरे पहले से भी ज्यादा आने लगे हैं या फिर ज्यादा गंभीर हो गए हैं तो यह अच्छा संकेत नहीं है। पेरेंट्स को इन लक्षणों की अच्छे से पहचान करना बेहद जरूरी है, ताकि समय रहते स्थिति को नियंत्रण में लिया जा सके। मिर्गी से पीड़ित बच्चे का बार समय पर दवाएं लेने के बावजूद भी अगर बच्चे को यह समस्या हो रही है तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से मिलकर इस बारे में बात करनी चाहिए। बच्चे को विशेष रूप से निम्न लक्षणों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए -

  • बार-बार कुछ सेकंड तक एकटक देखते रहना
  • अचानक गिर जाना
  • शरीर में अनियंत्रित हरकतें होना
  • कुछ समय के लिए बेहोश हो जाना
  • बच्चे के विकास की गति धीमी पड़ना
  • दौरे के बाद लंबे समय तक सामान्य न हो पाना

पेरेंट्स को सख्त निर्देश दिए जाते हैं कि बच्चे के इन लक्षणों को बिलकुल भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इन लक्षणों का मतलब यह नहीं है कि इलाज संभव नहीं है, बल्कि समय पर सही जांच की जरूरत है।

epilepsy in children Drug resistant epilepsy in children

सही जांच का महत्व समझें

ड्रग-रेजिस्टेंट एपिलेप्सी के मामले में जांच बेहद जरूरी है और यह कोई अलग बीमारी नहीं बल्कि मिर्गी का ही एक जिद्दी रूप है। इसलिए किसी स्पेशलिस्ट एपिलेप्सी सेंटर में विस्तृत जांच कराना है हर पेरेंट्स का सबसे पहला कदम होना चाहिए। ऐसे में एक्सपर्ट्स बच्चे के लिए कुछ खास टेस्ट व इमेजिंग स्कैन निर्धारित करते हैं जैसे-

  • ईईजी मॉनिटरिंग
  • एपिलेप्सी प्रोटोकॉल एमआरआई
  • बच्चे के विकास संबंधी खास जांच
  • जेनेटिक जांच

एपिलेप्सी का पता लगाने वाले ये खास टेस्ट होते हैं, जो पता लगाते हैं कि कि दौरे वास्तव में मिर्गी के कारण हैं या फिर इनके पीछे कोई और वजह है। ये टेस्ट मिर्गी की असली वजह का पता लगाने में मदद करते हैं, जिससे विशेषज्ञ यह जांच पातें हैं कि आखिर बच्चे पर दवाएं काम क्यों नहीं कर पा रही हैं।

सिर्फ दवाएं इलाज नहीं है

जैसा कि हमने आपको ऊपर भी बताया कि मिर्गी के ज्यादातर मामलों का इलाज दवाओं की मदद से हो जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सिर्फ दवाएं ही इसका इलाज है। अगर सामान्य दवाएं ठीक से काम नहीं कर पाती हैं तो फिर इसका मतलब यह नहीं कि इलाज के सारे रास्ते बंद हो गए हैं। आज बच्चों में मिर्गी का इलाज करने के लिए मेडिकल साइंस कई नए अलग-अलग ट्रीटमेंट ऑप्शन विकसित कर चुका है, जिनमें निम्न शामिल है -

  • मिर्गी की सर्जरी
  • न्यूरोमॉड्यूलेशन तकनीक
  • स्पेशल कीटोजेनिक डाइट

मिर्गी के इलाज में दी जाने वाली खास कीटोजेनिक डाइट को वजन कम करने वाला आहार नहीं बल्कि खास तरह की क्लीनिकल डाइट होती है, जिसमें वसा अधिक और कार्बोहाइड्रेट कम मात्रा में दिए जाते हैं और इस दौरान पेशेंट को लगातार निगरानी में रखा जाता है।

Clinical diet for drug resistant epilepsy in children Clinical diet for drug resistant epilepsy in children

समय पर इलाज है सबसे जरूरी

अन्य सभी बीमारियों की तरह मिर्गी का भी समय पर इलाज करना बेहद महत्वपूर्ण है और समय रहते बच्चे को किसी स्पेशलिस्ट सेंटर पहुंचाना बच्चे के भविष्य के लिए बहुत महत्व रखता है। बिना स्पेशलिस्ट टेस्ट के बार-बार दवाएं बदलते रहने से बेहतर इलाज में देरी होती रहती है और स्थिति गंभीर होती रहती है। इसका प्रभाव बच्चे के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उसके मानसिक व भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है और अक्सर बच्चा पढ़ाई में सामान्य बच्चों के कम प्रदर्शन कर पाता है। हालांकि, डॉक्टर की सलाह के बिना कभी भी दवा बंद न करें और न ही उसकी मात्रा में बदलाव करें। अगर बच्चे को समय पर इलाज मिल जाता है, तो ड्रग-रेजिस्टेंट एपिलेप्सी से पीड़ित बच्चा भी एक सामान्य जीवन जी सकता है और इस समस्या के कारण उसके जीवन में होने वाली जटिलताओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

डिसक्लेमर: ड्रग-रेजिस्टेंट एपिलेप्सी एक गंभीर मेडिकल कंडीशन है, इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के बच्चे की दवाओं की खुराक में कोई बदलाव न करें और न ही दवा बंद करें। इस लेख में दी गई जानकारी केवल जागरूकता और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। Thehealthsite.com इस जानकारी के आधार पर किए गए किसी भी स्व-उपचार की जिम्मेदारी नहीं लेता है।