हमेशा Congo या Uganda से ही क्यों फैलता है इबोला वायरस, ऐसा क्या है इन अफ्रीकी देशों में?
इबोला एक खतरनाक वायरस है और देखा गया है कि इसके ज्यादातर मामले कांगो व युगांडा जैसे अफ्रीकी देशों में पाए जाते हैं, इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं और दूसरे देशों को इसका कितना खतरा है? इस लेख में जानें
अगर आप पिछले कुछ 10 से 15 सालों के आंकड़े उठाकर देखेंगे तो देखेंगे कि कांगो और युगांडा जैसे देशों में बार-बार इबोला वायरस के मामले बढ़े हैं। जबकि कोविड 19 चीन के वुहान से शुरू होकर लगभग पूरी दुनिया में फैल गया था और फिर उसके मामले अलग-अलग जगहों पर बार-बार देखने को मिले थे। सोचने वाली बात यह है कि कोविड 19 वायरस जिसकी मृत्यु दर 2 प्रतिशत के आसपास बताई गई है, अगर उस वायरस से फैलने वाली महामारी कई सालों तक पूरी दुनिया को झकझोर कर रख सकती है तो फिर इबोला वायरस क्या कर सकता है। जैसे कोविड 19 चीन के वुहान शहर से फैला था, वैसे ही अक्सर इबोला की शुरुआत 1976 में Sudan और Democratic Republic of the Congo दो अलग-अलग देशों में हुई थी। लेकिन इबोला को कोविड 19 से तुलना करना सही नहीं है क्योंकि इस वायरस के संक्रमण से होने वाली मृत्यु दर 50 प्रतिशत तक जा सकती है और इसलिए अगर कोविड 19 से तुलना करें तो यह उससे कहीं गुना ज्यादा खतरनाक है।
क्यों इन देशों में बार-बार बढ़ जाते हैं इबोला के मामले?
अफ्रीका में इबोला के ज्यादातर मामले देखे जाते हैं और उनमें से ज्यादातर मामले युगांडा और कांगो में पाए गए हैं। उसके पीछे दरअसल, कई अलग-अलग-अलग कारण हो सकते हैं जैसे -
- इन देशों में पाए जाने वाले जानवर - इबोला वायरस आमतौर पर फ्रूट बैट (Fruit Bat) नाम के जानवर में पाया जाता है, जो एक बड़े आकार के चमगादड़ की प्रजाति है। कांगो और युगांडा जैसे देशों में जमीन का एक बड़ा हिस्सा वर्षावनों (Rainforest) से ढका है, जहां इस तरह के जानवर खूब पाए जाते हैं। इसके अलावा इन इलाकों में चिंपांजी, बंदर और गोरिल्ला आदि, जो इन संक्रमित चमगादड़ों के संपर्क में आने से संक्रमित हो सकते हैं।
- जंगलों में शिकार करने का चलन - कांगो और युगांडा समेत अफ्रीका के कई देशों में आज भी जंगलों में शिकार करने का चलन है। लोग अभी भी जानवरों का शिकार करते हैं और उन्हें खाते हैं। ऐसे में संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने या उन्हें खाने का खतरा भी काफी ज्यादा रहता है। यह स्थिति इन्सानों को संक्रमित जानवरों को करीब लाती है और इसलिए यह भी एक फैक्टर है जिससे इन देशों में इबोला का खतरा ज्यादा रहता है।
- कमजोर व्यवस्था और जागरूकता की कमी - इन देशों में बार-बार यह इबोला इन्फेक्शन फैलने के पीछे का एक बड़ा कारण यह भी है, कि वहां पर संक्रमणों से बचाव के लिए पर्याप्त जागरूकता नहीं है और साथ ही मेडिकल ट्रीटमेंट और प्रिवेंशन से जुड़ी व्यवस्था भी कमजोर हैं। हालांकि, पहले की तुलना में काफी सुधार किया जा चुका है और आने वाले समय में और सुधार देखने को मिल सकता है।
अब यह भी देखना होगा कि ऊपर बताए गए ये तीनों फैक्टर एक दूसरे से जुड़े हैं और जुड़कर एक बड़ा कारण बन जाते हैं। क्योंकि चमगादड़ों से यह वायरस बंदरों, गोरिल्ला और बंदरों में आता है, जिनका शिकार करके इंसान भी इस वायरस के संपर्क में आ जाते हैं। (और पढ़ें - कांगों में इबोला वायरस से कितनी मौत हो चुकी हैं?)
क्या दूसरे देशों को खतरा नहीं है?
इबोला सबसे बड़ा खतरा आमतौर पर अफ्रीका के देशों के लिए ही माना जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इससे अफ्रीका के बाहरी देशों को कोई खतरा नहीं है। एक देश से दूसरे देश में लोगों की यात्राएं बहुत ज्यादा हैं, सामान का एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट इतना ज्यादा बढ़ा हुआ है कि अब संक्रमण कुछ ही घंटों में दूसरे देश तक पहुंच सकता है। इसलिए यह कहा जा सकता है कि इबोला वायरस का खतरा सिर्फ अफ्रीकी देशों को नहीं बल्कि दूसरे देशों को भी है।
क्या महामारी बन सकता है इबोला
अगर आप सोच रहे हैं कि अगर कोविड 19 की तरह इबोला भी फैल गया तो क्या होगा? तो आपको बता दें कि कोविड की तरह इबोला की महामारी फैलने का खतरा बहुत ही कम है, लेकिन संभव जरूर है। इबोला की कुछ बातें हैं, जो इसके संक्रमण को महामारी में बदलने से रोकती हैं जैसे -
- यह हवा में नहीं फैलता - कोविड 19 से संक्रमित मरीज अपने सांस के साथ हवा में वायरस को छोड़ता है और उस वायरस को जब सांस के साथ कोई स्वस्थ व्यक्ति अपने शरीर के अंदर ले लेता है, तो इससे वह भी कोविड से संक्रमित हो जाता है। लेकिन इबोला से संक्रमित व्यक्ति सांस के दौरान हवा में यह वायरस नहीं छोड़ता है, इसलिए यह वायरस इतनी तेजी से नहीं फैल पाता है।
- लक्षण गंभीर होते हैं - कोविड 19 संक्रमण से तुलना करें को इबोला से संक्रमित व्यक्ति को गंभीर लक्षण होते हैं औऱ वह गंभीर रूप से बीमार दिखता है। ऐसे में मरीज को इग्नोर करने की संभावना कम होती है, जबकि कोविड 19 के लक्षणों को कई बार आम सर्दी-जुकाम समझ लिया जाता है और मरीज अनजाने में ही दूसरों में वायरस फैला रहा होता है।
- लक्षणों के बिना नहीं फैलता - इबोला के संपर्क में आने के बाद इसका संक्रमण जब विकसित होता है, तो लक्षण भी तेजी से विकसित होते हैं और ऐसे में मरीज व उसके आसपास वालों को पता चल जाता है। जबकि कोविड का मरीज संक्रमित होने के बावजूद भी दूसरों में अनजाने में संक्रमण फैला रहा होता है और बाद में पता चलता है।
इबोला से बचाव
हालांकि, इबोला वायरस कोई जबरदस्ती आपके शरीर में नहीं घुसता बल्कि इंसानों द्वारा की जाने वाली गलतियों के कारण ही वह उसके संपर्क में आता है। सही जानकारी, साफ-सफाई और जागरूकता की मदद से इबोला संक्रमण से आप खुद व अपने परिवार को बचा सकते हैं। इसके लिए आप निम्न बातों का ध्यान रखें -
- इबोला वायरस संक्रमित व्यक्ति या जानवर के बॉडी फ्लूइड से फैलता है, जैसे खून, पेशाब, मल, उल्टी, पसीना और शरीर के अंदर से निकलने वाला कोई भी द्रव, इसलिए आपको पता होना चाहिए कि आपको इन चीजों के संपर्क में नहीं आना है।
- संक्रमित व्यक्ति के किसी भी कपड़े, बेडशीट और बर्तन आदि को न छुएं और अगर आप उसकी देखभाल कर रहे हैं तो ध्यानपूर्वक उन्हें छुएं। छूने के बाद अपने हाथ व जो भी अंग संपर्क में आया है, उसे साबुन के साथ अच्छे से धोएं और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
- जानवरों से मिलने वाले फूड जैसे मांस व अंडे आदि को अच्छे से पकाकर ही खाएं, ताकि अगर उनमें कोई भी वायरस होने का रिस्क है तो वह कम हो जाए।
- इबोला से संक्रमित किसी जानवर या व्यक्ति के मृत शरीर का अंतिम संस्कार या अन्य कार्य बेहद सावधानी से करें, क्योंकि इबोला वायरस मृत शरीर में भी जीवित रह सकता है।
- अगर आप किसी भी ऐसे क्षेत्र में रहते हैं या फिर यात्रा करके आए हैं, तो अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें और अगर आपको तेज बुखार, उल्टी, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी या ब्लीडिंग जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल इबोला वायरस से जुड़ी सही जानकारी देना है और इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल इबोला या किसी भी वायरस से होने वाली किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।