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Medically Verified By: Dr. Subhashish Mazumder
Hepatitis Screening
World Hepatitis Day 2026: लिवर हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। ऐसे में लिवर को स्वस्थ रखना बहुत ही जरूरी है। लिवर को सुरक्षित रखने के लिए इसमें होने वाली समस्याओं को समय रहते पहचान करने की जरूरत होती है। लिवर से जुड़ी कई गंभीर बीमारियां ऐसी होती हैं, जो लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती हैं। इन्हीं में वायरल हेपेटाइटिस सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।
वैशाली स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के प्रिंसिपल डायरेक्टर एवं हेड - गैस्ट्रोएंटरोलॉजी (गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी एवं एंडोस्कोपी) डॉ. सुभाशीष मजूमदार का कहना है कि अधिकतर लोग तब तक जांच नहीं कराते, जब तक पीलिया, पेट में सूजन, लगातार थकान या भूख न लगने जैसे लक्षण सामने नहीं आते। लेकिन तब तक कई मामलों में लिवर को काफी नुकसान पहुंच चुका होता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ समय रहते हेपेटाइटिस की स्क्रीनिंग कराने पर जोर देते हैं। शुरुआती जांच न सिर्फ बीमारी को जल्दी पकड़ने में मदद करती है, बल्कि लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी गंभीर जटिलताओं के खतरे को भी काफी हद तक कम कर सकती है। आइए जानते हैं इस विषय के बारे में विस्तार से-

डॉक्टर कहते हैं कि हेपेटाइटिस का मतलब है लिवर में सूजन होती है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे वायरल संक्रमण, अत्यधिक शराब का सेवन, कुछ दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल या ऑटोइम्यून बीमारियां, इत्यादि। हालांकि, हेपेटाइटिस बी (HBV) और हेपेटाइटिस सी सबसे अधिक चिंता का विषय हैं क्योंकि ये संक्रमण लंबे समय तक शरीर में रहकर क्रॉनिक बीमारी का रूप ले सकते हैं।
अगर इनका समय पर इलाज न किया जाए, तो धीरे-धीरे लिवर फाइब्रोसिस, सिरोसिस, लिवर फेल्योर और हेपेटोसेल्युलर कार्सिनोमा (लिवर कैंसर) का खतरा बढ़ सकता है।
हेपेटाइटिस से जुड़ी सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि जांच केवल उन्हीं लोगों को करानी चाहिए जिन्हें कोई परेशानी महसूस हो रही हो। जबकि सच्चाई यह है कि क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी और सी से संक्रमित कई लोग वर्षों तक पूरी तरह सामान्य जीवन जीते हैं और उन्हें कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देता।
इसी वजह से बीमारी धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचाती रहती है और मरीज को इसकी जानकारी तब मिलती है, जब स्थिति गंभीर हो चुकी होती है। इसलिए सिर्फ लक्षणों के आधार पर बीमारी का पता लगाना सुरक्षित रणनीति नहीं है।
डॉक्टर का कहनाा है कि एक साधारण ब्लड टेस्ट से हेपेटाइटिस का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है। इस टेस्ट में HBsAg (Hepatitis B Surface Antigen) और Anti-HCV एंटी-बॉडी टेस्ट जैसे टेस्ट संक्रमण की पहचान उस समय भी कर सकते हैं, जब मरीज को कोई लक्षण न हों। 
समय पर स्क्रीनिंग होने से डॉक्टर संक्रमण की गंभीरता का आकलन कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है। इससे लिवर को स्थायी नुकसान होने से बचाया जा सकता है।
हर व्यक्ति को अपने डॉक्टर से सलाह लेकर जोखिम के अनुसार स्क्रीनिंग पर विचार करना चाहिए। विशेष रूप से निम्न लोगों के लिए जांच बेहद जरूरी मानी जाती है-
हेपेटाइटिस की जल्दी पहचान सिर्फ मरीज के लिए ही नहीं, बल्कि उसके परिवार और समाज के लिए भी महत्वपूर्ण है। अगर संक्रमण का समय रहते पता चल जाए, तो वायरस के अनजाने में फैलने की संभावना काफी कम हो जाती है। हेपेटाइटिस बी का टीका आज भी इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। नवजात शिशुओं, स्वास्थ्यकर्मियों और अन्य हाई-रिस्क समूहों के लिए टीकाकरण विशेष रूप से जरूरी है।

इसके अलावा संक्रमण से बचने के लिए हमेशा सुरक्षित इंजेक्शन का इस्तेमाल करें। इसके लिए सुई, रेजर, नेल कटर या टूथब्रश जैसी व्यक्तिगत चीजें शेयर न करें। साथ ही सिर्फ स्क्रीन किए गए सुरक्षित ब्लड का ही ट्रांसफ्यूजन कराएं और असुरक्षित यौन संबंधों से बचें।
अगर किसी व्यक्ति को क्रॉनिक हेपेटाइटिस है, तो सिर्फ दवा ही पर्याप्त नहीं होती। लाइफस्टाइल में बदलाव भी लिवर को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाता है। इसके लिए आपको कुछ बातों पर ध्यान देने की जरूरत होती है, जैसे- 
इन उपायों से लिवर पर अतिरिक्त दबाव कम होता है और बीमारी के बढ़ने का खतरा घट सकता है।
Disclamer : यह लेख सिर्फ सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। यदि आपको हेपेटाइटिस का जोखिम है, लिवर से जुड़ी कोई समस्या है या रिपोर्ट असामान्य आती है, तो स्वयं इलाज करने के बजाय गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट या योग्य चिकित्सक से सलाह लेकर आवश्यक जांच और उपचार कराएं।