
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Published : May 4, 2026 3:10 PM IST
Medically Verified By: Dr. Jitendra Kumar
Image credits by: Kidney dialysis in Summer- Image generated by Gemini
गर्मियों का बढ़ता तापमान सामान्य लोगों के लिए तो मुश्किल होता ही है, लेकिन क्रोनिक किडनी डिजीज से जूझ रहे और डायलिसिस पर चल रहे मरीजों के लिए यह मौसम और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। डायलिसिस मरीजों की इम्युनिटी कम होती है, जिससे उन्हें इंफेक्शन होने का खतरा ज्यादा रहता है। खासकर गर्मियों में पसीने, पानी की कमी और साफ सफाई के अभाव में चूक के कारण इंफेक्शन का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। लेकिन ऐसा होता क्यों है? अकॉर्ड सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में नेफ्रोलॉजी और ट्रांसप्लांट मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार डिटेल में बता रहे हैं कि गर्मियों में किडनी डायलिसिस मरीजों में इंफेक्शन का खतरा क्यों बढ़ जाता है?
डायलिसिस मरीजों के लिए उनका वैस्कुलर एक्सेस उनकी लाइफलाइन होता है। गर्मियों में पसीने के कारण इस हिस्से में बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में क्या करना चाहिए? यदि फिस्टुला वाली जगह पर लालिमा, सूजन, दर्द या मवाद दिखाई दे, तो यह इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है। डॉ. जितेंद्र कुमार कहते हैं कि डायलिसिस वाली जगह को सूखा रखें। गर्मियों में ढीले और सूती कपड़े पहनें ताकि पसीना जमा न हो। पसीने से भीगी पट्टियों को तुरंत बदलें।
गर्मियों में अक्सर पानी और भोजन जल्दी खराब हो जाते हैं। डायलिसिस मरीजों को दिनभर में कितना पानी पीना है यह बताया जाता है। प्यास लगने पर मरीजों को केवल साफ पानी पीना है। कहीं से भी पानी पीने पर टाइफाइड, हैजा या गैस्ट्रोएंटेराइटिस का खतरा रहता है। इंफेक्शन से बचने के लिए क्या करना चाहिए? अगर दस्त, उल्टी, या पेट में ऐंठन जैसे लक्षण महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। हमेशा उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं। बाहर के कटे हुए फल या खुला खाना बिल्कुल न खाएं।
ज्यादा गर्मी के कारण त्वचा पर रैशेज या फंगल इन्फेक्शन हो सकते हैं। डायलिसिस मरीजों में यूरिया के स्तर के कारण अक्सर खुजली की समस्या होती है। खुजलाने से त्वचा पर घाव हो सकते हैं, जो बाद में गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शनमें बदल सकते हैं। इससे निपटने के लिए सबसे पहले तो किसी अच्छे डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। अगर आप घर में कुछ तरीके अपनाना चाहते हैं तो नीम के पानी से नहा सकते हैं, त्वचा को मॉइस्चराइज रखें।
कम पानी पीने या डिहाइड्रेशन के कारण यूरिनरी ट्रैक्ट में इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। डायलिसिस मरीजों में यूरिन की मात्रा पहले ही कम होती है, ऐसे में संक्रमण तेजी से फैल सकता है। अगर पेशाब में जलन, बुखार या पीठ के निचले हिस्से में दर्द जैसे लक्षण महसूस हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।
| क्या करें (Dos) | क्या नहीं करें (Don'ts) |
| डायलिसिस एक्सेस को हमेशा सूखा और साफ रखें। | फिस्टुला या कैथेटर वाली जगह को गीले हाथों या गंदे कपड़ों से न छुएं। |
| पसीने से भीगी पट्टियों को तुरंत बदलें। | खुजली होने पर एक्सेस वाली जगह को नाखूनों से न खुरचें। |
| सिर्फ उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ साफ पानी ही पिएं। | बाहर का खुला खाना और कटे हुए फल का सेवन न करें। |
| दिनभर बीच बीच में पानी पीते रहें। | प्यास लगने पर एक साथ बहुत अधिक पानी न पिएं। |
| ढीले, सूती और आरामदायक कपड़े पहनें ताकि पसीना कम आए। | डायलिसिस वाली जगह पर किसी भी प्रकार का लोशन या पाउडर बिना डॉक्टर की सलाह के न लगाएं। |
| बुखार या लालिमा दिखने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। | इंफेक्शन के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें। |
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी केवल आपकी जागरुकता के लिए हैं। इन्हें अपनाने से पहले कृपया किसी एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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