
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Medically Verified By: Dr Astha Dayal, Dr. Prasad Kulat
Monsoon and pregnancy (Image Credit- ChatGPT)
बारिश का मौसम अपने साथ कुछ इंफेक्शन्स भी लेकर आता है। बारिश आते ही गर्मी से राहत तो मिल जाती है, लेकिन यह मौसम स्वास्थ्य पर बुरा असर भी डाल सकता है। खासकर प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए यही मौसम कुछ नई मुश्किलें भी लेकर आता है। इसलिए आइए आज हम इस विषय पर सीके बिरला हॉस्पिटल, गुरुग्राम की ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी की डॉक्टर आस्था दयाल से जानते हैं।
वह बताती हैं कि गर्भावस्था में शरीर की इम्यूनिटी अपने आप कुछ हद तक कमजोर हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है ताकि शरीर भ्रूण को बाहरी तत्व समझकर रिजेक्ट न कर दे। लेकिन इसी वजह से मानसून की नमी, जगह-जगह जमा पानी और बैक्टीरिया व फंगस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बनने पर प्रेग्नेंट महिलाएं जल्दी संक्रमण की चपेट में आ जाती हैं। आइए इस विषय पर विस्तार से जानते हैं।
मानसून में गर्भवति महिलाओं में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के मामले अचानक बढ़ जाते हैं, और डॉक्टर इसकी वजह भी साफ बताती हैं। नमी वाले मौसम में पसीना और गीलापन त्वचा पर काफी देर तक बना रहता है, जो बैक्टीरिया के पनपने के लिए एकदम सही जगह बन जाता है। इसके साथ ही हार्मोनल बदलाव के चलते वेजाइनल पीएच भी बदलता रहता है। इससे यीस्ट इंफेक्शन जैसी फंगल दिक्कतें भी परेशान करने लगती हैं।
डॉक्टर कहती हैं, “यहां एक बात ध्यान रखने की जरूरत है कि अगर यूटीआई का समय पर इलाज न हो, तो कुछ गंभीर मामलों में यह प्रीटर्म लेबर, यानी समय से पहले डिलीवरी तक की वजह बन सकता है।”
डॉक्टर आस्था कहती हैं कि सिर्फ यूटीआई ही नहीं, बल्कि मानसून पानी और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का भी सीजन होता है। डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड इस मौसम में बड़ा खतरा बनकर सामने आते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान डेंगू होने पर प्लेटलेट्स तेजी से गिर सकते हैं और भी गंभीर रूप ले सकते हैं। वहीं दूषित पानी या खाने से टाइफाइड और पेट के इंफेक्शन होने का खतरा भी बना रहता है। इनका असर सिर्फ मां ही नहीं, बल्कि भ्रूण की सेहत पर भी पड़ सकता है।
प्रेग्नेंट महिलाओं को मानसून में ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। क्यों? इसके बारे में ऑब्सटेट्रिशियन और गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. प्रसाद कुलाट बताते हैं कि-
हवा में ज्यादा नमी- नमी वाला माहौल बैक्टीरिया और फंगस को सतहों और त्वचा पर पनपने के लिए सही स्थिति देता है।
पानी का दूषित होना- भारी बारिश के कारण अक्सर सीवेज और पीने के पानी की सप्लाई आपस में मिल जाती है, जिससे स्थानीय पानी और खाने की चीजें बुरी तरह दूषित हो जाती हैं।
पानी का जमाव- गड्ढों और जलभराव वाली जगहों पर बीमारी फैलाने वाले मच्छर पनपते हैं।
शारीरिक और हार्मोनल बदलाव- प्रेग्नेंसी में हार्मोनल बदलावों के कारण यूरिनरी ट्रैक्ट की मांसपेशियां ढीली हो जाती हैं और पेशाब का बहाव धीमा हो जाता है, जिसका मतलब है कि मॉनसून की नमी से शरीर में आए बैक्टीरिया तेज़ी से बढ़ सकते हैं।
अंकुरा हॉस्पिटल फॉर विमेन एंड चिल्ड्रन, पुणे के सीनियर कंसल्टेंट ऑब्सटेट्रिशियन और गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. प्रसाद कुलाट ने मॉनसून में होने वाले आम संक्रमणों और उनसे होने वाली बीमारियों के बारे में बताया है।
| संक्रमण का प्रकार | खास बीमारियां |
| वेक्टर-जनित (कीड़ों से फैलने वाले) | डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया |
| पानी और भोजन से फैलने वाले | गैस्ट्रोएंटेराइटिस, टाइफाइड, हेपेटाइटिस E |
| यूरिनरी और जेनिटल (मूत्र और जननांग संबंधी) | UTI, वजाइनल कैंडिडिआसिस (यीस्ट इन्फेक्शन) |
| सांस और वायरल संबंधी | इन्फ्लूएंजा (फ्लू), वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम |
| जूनोटिक (जानवरों से फैलने वाले) | लेप्टोस्पायरोसिस (बाढ़ के पानी में चलने से) |
डॉक्टर की सलाह बहुत सीधी है, “सूती और ढीले कपड़े पहनें, इंटिमेट एरिया को सूखा-साफ रखें, और पानी खूब पिएं ताकि यूटीआई से बचा जा सके। घर के आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें, और बाहर का या कटा हुआ खाना खाने से जितना बचा जाए उतना अच्छा। और सबसे जरूरी- बुखार, जलन, अजीब-सा डिस्चार्ज या पेट दर्द जैसी कोई भी बात नज़रअंदाज़ न करें, तुरंत डॉक्टर से मिलें।
अगर मानसून में आपको ऐसा लगे कि बुखार, पेशाब करते समय जलन, जननांगों में जलन, भ्रूण की हलचल कम महसूस होना, तेज पेट दर्द, ब्लीडिंग आदि हो रहे हैं तो बिना देर किए डॉक्टर के पास जाएं। उन्हें अपनी समस्या बताएं।
प्रेग्नेंसी के दौरान कभी भी खुद से दवा न लें या बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं न खाएं, क्योंकि कई आम दवाएं बच्चे के लिए सुरक्षित नहीं होती हैं। अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत अपने डॉक्टर (ऑब्सटेट्रिशियन) से संपर्क करें, जैसे- अचानक, तेज या बार-बार आने वाला बुखार
पेशाब करते समय जलन या दर्द, लगातार दस्त या ऐसी उल्टी जिसे संभालना मुश्किल हो, बहुत ज्यादा सुस्ती, चक्कर आना या बच्चे की सामान्य हलचल में कमी होने पर।
डिस्क्लेमर: मानसून में गर्भवती महिलाओं को अपनी सेहत के साथ-साथ हाइजीन का भी ध्यान रखना चाहिए। कोशिश करें कि बरसात के इस मौसम में टाइट कपड़े न पहनें। अगर आपको लगे कि जी मचल रहा है या स्किन पर बहुत ही ज्यादा जलन और खुजली हो रही है, तो डॉक्टर को दिखाएं।