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गर्भपात के बाद क्यों बढ़ जाता है संक्रमण का खतरा? जानें Septic Abortion से बचाव संभव है या नहीं

Septic Abortion: गर्भपात के बाद संक्रमण का खतरा काफी ज्यादा रहता है। जब गर्भपात के बाद इंफेक्शन होता है, तो इसे सेप्टिक अर्बाशन कहा जाता है। जानें, यह संक्रमण क्यों होता है?

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Written By: Anju Rawat | Published : June 23, 2026 7:02 PM IST

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Medically Verified By: Dr Neelam Kumari Ela

Septic Abortion एक गंभीर संक्रमण है, जो गर्भपात के बाद गर्भाशय में विकसित हो सकता है। हालांकि, यह संक्रमण बेहद दुर्लभ है। लेकिन, अगर इस संक्रमण का समय पर इलाज न कराया जाए, तो यह जानलेवा हो सकता है। इसलिए इसे मेडिकल इमरजेंसी माना गया है। आइए, Maccure hospital की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नीलम कुमारी एला से जानते हैं सेप्टिक एबॉर्शन के बारे में-

सेप्टिक एबॉर्शन क्या होता है?

सेप्टिक एबॉर्शन गर्भपात के दौरान या उसके बाद होने वाला गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण होता है। संक्रमण गर्भाशय से शुरू होकर ऊतकों और पेट की झिल्ली तक फैल सकता है। यह स्थिति तब बनती है, जब गर्भाशय में संक्रमण फैल जाता है या गर्भ के कुछ टिशू अंदर रह जाते हैं।

संक्रमण कब हो सकता है?

आपको बता दें कि यह संक्रमण कुछ परिस्थितियों में हो सकता है, जैसे-

  • असुरक्षित तरीके से गर्भपात कराने पर
  • गर्भाशय में गर्भ ऊतक या टिशू का अंदर रह जाना
  • गर्भपात के बाद संक्रमण का समय पर इलाज न कराने पर
  • कुछ मामलों में गर्भपात के तुरंत बाद ही संक्रमण विकसित हो सकता है।
  • अगर पहले से ही यौन संचारित रोग (STIs) हो

इस संक्रमण के लक्षण क्या हैं?

सेप्टिक एबॉर्शन के लक्षण आमतौर पर गर्भपात के 24 से 48 घंटे में दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में इसके लक्षण देरी से दिख सकते हैं। इसकी कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है। इसके लक्षणों में शामिल हैं-

  • तेज बुखार आना और ठंड लगना
  • पेट या पेल्विक एरिया में दर्द होना
  • बदबूदार योनि स्राव होना
  • दिल की धड़कन तेज होना
  • कमजोरी और चक्कर महसूस होना

इतना ही नहीं, कुछ मामलों में संक्रमण गंभीर हो सकता है। इस स्थिति में सांस लेने में दिक्कत, ब्लड प्रेशर कम होना और सेप्सिस जैसे जानलेवा लक्षण विकसित हो सकते हैं।

यह संक्रमण कितना खतरनाक हो सकता है?

Science Direct में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, संक्रमण गर्भाशय से फैलकर पूरे शरीर को प्रभावित कर सकता है। गंभीर मामलों में सेप्सिस, किडनी फेलियर और रक्त के थक्के बनने की समस्या हो सकती है। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में तो महिला की जान तक जा सकती है।

क्या इससे बचाव संभव है?

जी हां, सेप्टिक एबॉर्शन से बचाव संभव है। लेकिन, इसके लिए आपको कुछ चीजों का ध्यान रखना जरूरी है।

  • सिर्फ प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी से ही गर्भपात कराएं।
  • गर्भपात के बाद फॉलो-अप जरूर लें।
  • संक्रमण के किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें।

इलाज कैसे किया जाता है?

सेप्टिक एबॉर्शन एक मेडिकल इमरजेंसी है। इसका इलाज एंटीबायोटिक दवाइयों से किया जाता है। अगर गर्भाशय में कोई टिशू बचा होता है, तो उसे तुरंत हटाया जाता है। अधिकतर मामलों में तुरंत इलाज से मरीज को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।

Disclaimer: सेप्टिक एबॉर्शन एक गंभीर समस्या है, लेकिन इसे काफी हद तक रोका जा सकता है। अगर गर्भपात के बाद बुखार, दर्द या असामान्य रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। वरना, संक्रमण बढ़ सकता है और कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं।