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Written By: Atul Modi | Updated : May 11, 2024 10:01 AM IST
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मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के बाद महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। हॉर्मोनल बदलाव, हड्डियों और मांसपेशियों का कमजोर होना और कमजोरी महसूस होना आदि ऐसे कॉमन लक्षण हैं जो रजोनिवृत्ति (Menopause) के बाद लगभग हर महिलाओं द्वारा अनुभव किए जाते हैं। मेनोपॉज के बाद इन सब बदलावों के चलते महिलाओं में हार्ट संबंधी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। लेकिन यदि सही लाइफस्टाइल को फॉलो किया जाए और अन्य बदलावों को अपनाकर इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आज इस आर्टिकल में हम मुंबई के एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्टडॉ. अभिजीत बोरसे से बात कर कुछ ऐसी टिप्स और स्ट्रेटजी शेयर करेंगे जो मेनोपॉज के बाद महिलाओं में हार्ट संबंधी बीमारियों (Heart Diseases in Women After Menopause) के रिस्क को कम कर सकते हैं।
स्ट्रेटजी पर बात करने से पहले हम उन रिस्क फैक्टर को समझते हैं जो मेनोपॉज के बाद महिलाओं में हार्ट डिजीज का कारण बनते हैं।
उम्र: मेनोपॉज अक्सर 50 साल की उम्र के आसपास होता है। ऐसे में मेनोपॉज के बाद उम्र बढ़ने के चलते हृदय रोग का खतरा भी बढ़ जाता है।
हार्मोनल परिवर्तन: रजोनिवृत्ति के बाद एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है, जिससे हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है।
पारिवारिक इतिहास: हृदय रोग का पारिवारिक इतिहास भी जोखिम को काफी बढ़ा सकता है।
गतिहीन जीवनशैली: अगर आप एक्सरसाइज, योग या फिर किसी भी तरह का वर्कआउट नहीं करते हैं तो मोटापा, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग के अन्य खतरों का जोखिम काफी बढ़ जाता है।
सही डाइट न लेना: सैचुरेटेड फैट, कोलेस्ट्रॉल और सोडियम से भरपूर डाइट लेने के कारण भी हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है।
धूम्रपान: धूम्रपान सभी उम्र की महिलाओं में हृदय रोग का एक प्रमुख जोखिम कारक है।
उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल: ये स्थितियां धमनियों को नुकसान पहुंचा सकती हैं और हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकती हैं।
आइए अब जानते हैं उन स्ट्रेटजी के बारे में जो मेनोपॉज के बाद हृदय रोग के खतरे को कम कर सकती हैं:
स्वस्थ वजन बनाए रखें: अतिरिक्त वजन, विशेष रूप से कमर के आसपास, हृदय रोग के खतरे को बढ़ाता है। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के माध्यम से स्वस्थ वजन का लक्ष्य रखें।
नियमित रूप से व्यायाम करें: प्रति सप्ताह कम से कम 150 मिनट के लिए मध्यम-तीव्रता वाले एरोबिक व्यायाम करें। साथ ही प्रति सप्ताह दो या इससे अधिक दिनों में मांसपेशियों को मजबूत करने वाली गतिविधियां करें। व्यायाम हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखने, वजन नियंत्रित करने और तनाव को कम करने में काफी मदद करता है।
हार्ट फ्रेंडली डाइट लें: फलों, सब्जियों, साबुत अनाज, लीन प्रोटीन और हेल्दी फैट से भरपूर आहार का सेवन करें। सेचुरेटिड फैट, ट्रांस वसा, कोलेस्ट्रॉल, सोडियम और एक्स्ट्रा मीठी चीजों का सेवन सीमित मात्रा में करें।
धूम्रपान छोड़ें: यदि आप धूम्रपान करते हैं तो इसे जल्द से जल्छ छोड़ दें। धूम्रपान बंद करने से हृदय रोग का खतरा काफी कम हो जाता है और आपकी ओवरहेल्थ भी अच्छी रहती है।
स्ट्रेस फ्री रहें: अगर आप काफी स्ट्रेस में रहते हैं तो इसे जल्द से जल्द कंट्रोल करने का प्रयास करें। सही दिशा में स्ट्रेस को मैनेज करने के लिए आप ब्रीदिंग एक्सरसाइज जिसमें गहरी सांस लेना, ध्यान करना, योग या ताई ची जैसी स्ट्रेस रिलैक्सेशन तकनीकों का अभ्यास करें।
ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को रेगुलर मॉनिटर करें: नियमित रूप से अपने ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल के लेवल की मॉनिटरिंग करें अगर आपको लगता है कि ये रेंज से बाहर जा रहे हैं तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें और इन्हें हेल्दी तरह से मैनेज करने के बारे में पूछें।
शराब का सेवन सीमित करें: अत्यधिक शराब का सेवन रक्तचाप बढ़ा सकता है और हृदय रोग के खतरों को भी बढ़ा सकता है। यदि संभव हो तो शराब का सेवन मध्यम स्तर तक सीमित रखें।
नियमित जांच करवाएं: निवारक जांच और मूल्यांकन के लिए नियमित रूप से अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से मिलें। जोखिम कारकों का शीघ्र पता लगाने और उपचार से हृदय रोग की शुरुआत को रोका या कंट्रोल किया जा सकता है।
निष्कर्ष: क्योंकि मेनोपॉज के बाद हार्ट संबंधी बीमारियों का काफी खतरा रहता है इसलिए ये जरूरी है कि सही लाइफस्टाइल को अपनाया जाए और सक्रिय उपायों का पालन हो। हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाने के लिए रेगुलर एक्सरसाइज, संतुलित डाइट, स्ट्रेस फ्री लाइफ और तंबाकू को पूरी तरह से अवॉइड कर महिलाएं मेनोपॉज के बाद हृदय रोग के खतरे को काफी कम कर सकती हैं और रजोनिवृत्ति के बाद के वर्षों में बेहतर समग्र स्वास्थ्य और खुशहाली का आनंद ले सकती हैं। याद रखें, स्वस्थ हृदय के लिए सकारात्मक बदलाव शुरू करने में देर नहीं होनी चाहिए।
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