
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Medically Verified By: Dr. Gaurav Sharma
आंखों का दर्द
अक्सर लोग अपनी आंखों, भौहों और उनके पास के हिस्से में दर्द महसूस करते हैं। उन्हें लगता है कि ऐसा आंखों के कमजोर होने या उन पर ज्यादा जोर पड़ने पर हो रहा होगा। लेकिन हमें यह समझने की जरूरत है कि अगर आंखों या उनके आसपास के हिस्से में दर्द हो तो यह सामान्य बात नहीं है। यह कई बीमारियों के पीछे का लक्षण या शुरुआती संकेत हो सकता है।
डॉक्टर बताते हैं कि आंखों का दर्द अक्सर मामूली वजहों से होता है, लेकिन शरीर के इस नाजुक हिस्से को नजरअंदाज करना सही नहीं है। यह साइनस कॉन्टैक्ट लेंस का ज्यादा इस्तेमाल करने या गलत नंबर का चश्मा पहनने की वजह से हो सकता है। ऐसे और भी कई कारण हैं, जिनके बारे में आज हम आपको बताने वाले हैं। इस विषय पर जानकारी पारस हेल्थ, पंचकुला के सीनियर कंसल्टेंट और न्यूरोसर्जन डॉ. गौरव शर्मा ने दी है। आइए इस विषय पर थोड़ा विस्तार से जानते हैं।
डॉक्टर आंखों में दर्द होने का सबसे बड़ा कारण स्क्रीन का अधिक इस्तेमाल मानते हैं। आजकल बच्चे व बूढ़े सभी अपना पूरा समय मोबाइल, लैपटॉप और टीवी की स्क्रीन देखने में बिता देते हैं। वे कहते हैं कि लगातार स्क्रीन देखते रहने से हम पलकें बहुत ही देर में झपकाते हैं, जिससे आंखें सूखने लगती हैं। इसे डिजिटल आई स्ट्रेन या कंप्यूटर विजन सिंड्रोम कहा जाता है। यह आंखों की नमी सोखने के साथ-साथ उनमें जलन और भारीपन तो पैदा करता ही है। साथ ही सिर के आगे वाले हिस्से में हल्का दर्द भी महसूस कराता है।
अगर आपको आंखों के साथ-साथ नाक के आसपास मौजूद साइनस में भी दर्द, सूजन या अजीब सा महसूस हो रहा है तो ध्यान दें। क्योंकि साइनस और आंखें एक-दूसरे के काफी करीब स्थित होती हैं। मौसम बदलने पर, सर्दी-जुकाम के दौरान या एलर्जी होने पर यह समस्या अक्सर देखी जाती है।
डॉक्टर बताते हैं कि जब आप अपनी नींद पूरी नहीं करते हैं तो आंखों में थकान हो जाती है। ऐसा आंखों की मांसपेशियों को आराम न मिलने से होता है। यही कारण है कि कई लोगों को सुबह उठते ही आंखों में भारीपन या हल्का दर्द महसूस हो सकता है। यह समस्या उन लोगों में ज्यादा देखने को मिलती है जो देर रात तक जागते हैं या जिनकी नींद अधूरी रहती है। इसलिए आप अपनी नींद के साथ कॉम्प्रोमाइज न करें।
अक्सर ऐसा होता है कि लोग सस्ते के चक्कर में लो-क्वालिटी वाले लेंस का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। साथ ही अगर चश्मे या लेंस का नंबर सही नहीं होता है, तो आंखों को चीजों को साफ देखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे आंखों में खिंचाव के साथ-साथ सिरदर्द भी हो सकता है, खासकर पढ़ाई करते समय। इसलिए सही और अच्छी जगह से ही अपनी आंखों का चेकअप करवाएं।
डॉक्टर बताते हैं कि उनके पास कई लोग आते हैं, जिन्हें चश्मा पहनना पसंद नहीं होता है। उन्हें लेंस लगाने की सलाह दी जाती है, लेकिन जब कोई पूरे-पूरे दिन तक लेंस का इस्तेमाल करता है जिससे आंखों में जलन, रेडनेस और दर्द हो सकता है तो आंखों के इंफेक्शन का भी संकेत हो सकता है।
आपने देखा होगा कि कुछ लोगों की आंखें गुलाबी-सी हो जाती है, इसका मतलब है कि उन्हें कंजंक्टिवाइटिस हो गया है, जो आंखों में दर्द की एक आम वजह है। इसमें आंखों से पानी बहता है और कभी-कभी हल्की जलन भी होती है। अगर आपको भी ऐसा ही कुछ महसूस होता है तो डॉक्टर से सलाह लेना बिल्कुल न भूलें।
डिस्क्लेमर: आंखों के दर्द को कम करने के लिए स्क्रीन देखते समय बीच-बीच में आंखों को आराम देना, हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए दूर देखना, नींद पूरी लेना और आंखों को साफ पानी से धोना जैसे छोटे कदम काफी राहत दे सकते हैं। अगर घरेलू उपायों से आराम न मिले, तो डॉक्टर की सलाह लेना ही सबसे सही रास्ता है।