क्या सच में अंधेरा होते ही मेटाबॉलिज्म धीरे-धीरे काम करने लग जाता है, जानें क्यों बढ़ रहा आपका वेट

Metabolism in Night Time: हमारा शरीर एक अंदरूनी घड़ी की तरह काम करता है, जिसमें कुछ गतिविधियां रात के समय तो कुछ दिन के समय काम करती हैं। इसी प्रकार मेटाबॉलिज्म प्रमुख रूप से दिन में ही काम करता है।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : February 18, 2026 6:16 PM IST

Raat ko Khana Khane ke Nuksan: अक्सर वजन कम करने की बात होते ही लोगों की सबसे आम सलाह होती है कि रात का खाना छोड़ देना चाहिए। वहीं कई लोग यह भी मानते हैं कि जैसे ही शाम होती है या अंधेरा छाता है, मेटाबॉलिज्म अपने आप धीमा हो जाता है और रात में खाना खाने से वजन बढ़ने लगता है। लेकिन क्या वाकई मेटाबॉलिज्म समय देखकर काम करना बंद कर देता है? विशेषज्ञों के अनुसार मेटाबॉलिज्म अचानक स्लो नहीं होता, बल्कि यह शरीर की प्राकृतिक घड़ी यानी बॉडी क्लॉक से जुड़ा होता है। शाम के बाद शरीर आराम की तैयारी करने लगता है, जिससे ऊर्जा खर्च करने की गति कम हो सकती है। साथ ही हमारी लाइफस्टाइल, खाने का समय, शारीरिक गतिविधि और नींद की आदतें मेटाबॉलिज्म को गहराई से प्रभावित करती हैं। ऐसे में वजन बढ़ने या घटने का सीधा संबंध केवल रात के खाने से नहीं, बल्कि मेटाबॉलिज्म के सही काम करने से होता है। तो लिए इस प्रक्रिया को सही ढंग से समझा जाए।

बॉडी क्लॉक और हार्मोन का असर

जैसा कि आप जानते हैं कि हमारे शरीर के अंदर भी एक घड़ी होती है, जिसे सर्कैडियन रिदम कहा जाता है। शोध बताते हैं कि अंधेरा होते ही शरीर आराम की तैयारी करने लगता है और इस समय मेलाटोनिन हार्मोन बढ़ता है और एनर्जी खर्च करने की गति कम हो जाती है। हालांकि हम आपको यह बता दें कि मेटाबॉलिज्म अचानक बंद नहीं होता, लेकिन दिन के मुकाबले यह थोड़ा धीमा जरूर हो जाता है।

(और पढ़ें - मेटाबॉलिज्म क्या है?)

रात में कम एक्टिविटी होना

दिन का समय खूब सारी गतिविधियों से भरा होता है और हम चलना-फिरना, काम करना और कई तरह की शारीरिक गतिविधियां करते रहते हैं, जिससे कैलोरी बर्न होती रहती है। लेकिन वहीं रात के समय हम में से अधिकतर लोग या तो सोफे पर बैठे रहते हैं या फिर टीवी के आगे। इस दौरान शरीर कम मूवमेंट करता है, जिस वजह से कैलोरी बर्न नहीं हो पाती और शरीर उसे फैट के रूप में जमा करने लगता है।

देर रात और गलत खाने की आदत

अक्सर हम रात को ज्यादा तला-भुना, मीठा या भारी भोजन करते हैं, जिससे पाचन पर दबाव पड़ता है। कई शोध इस बात की पुष्टि भी करते हैं कि इस समय इंसुलिन सेंसिटिविटी भी कम हो जाती है, जिससे शुगर और फैट आसानी से स्टोर होने लगता है। वहीं देर रात खाना खाने के बाद तुरंत सो जाना वजन बढ़ने की बड़ी वजह बन सकता है, ना कि मेटाबॉलिज्म का स्लो होना।

नींद की कमी और तनाव

वजन बढ़ाने का कारण केवल तालाब होना खाना ज्यादा खाना नहीं होता है। शोध बताते हैं कि अगर आपकी नींद पूरी नहीं होती, तो वजन बढ़ने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। आपको बता दें कि नींद की कमी से भूख बढ़ाने वाला हार्मोन घ्रेलिन बढ़ता है और पेट भरा होने का संकेत देने वाला लेप्टिन कम हो जाता है। इसके अलावा नींद कम मिलने से तनाव भी बढ़ता है, जिससे मेटाबॉलिज्म पर नकारात्मक असर पड़ता है।

वजन कंट्रोल कैसे करें?

तो अब आप समझ गए होंगे की रात में मेटाबॉलिज्म स्लो होने के साथ-साथ आपकी गलत आदतें भी वजन बढ़ाने का कारण बनती हैं। इसलिए शाम के बाद हल्का और समय पर खाना खाएं, रोजाना थोड़ी वॉक करें, स्क्रीन टाइम कम करें और पूरी नींद लें। स्वस्थ शरीर पाने के लिए सही दिनचर्या अपनाकर आप लंबा जीवन जी सकते हैं और अपने मेटाबॉलिज्म को संतुलित रख सकते हैं और बढ़ते वजन पर काबू पा सकते हैं।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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