ग्रामीण भारत में आज भी लड़कियों के लिए मुश्किल है Menstrual Hygiene को अपनाना, सामने हैं ये 5 चुनौतियां

28 मई को वैश्विक स्तर पर वर्ल्ड मे Menstrual Hygiene डे मनाया जा रहा है। लेकिन भारत जैसे विकासशील देश में ग्रामीण क्षेत्र में आज भी लड़कियों के लिए Menstrual Hygiene को अपनाना किसी चुनौती से कम नहीं है। आइए इस खास दिन पर जानते हैं इसके बारे में

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Written By: Ashu Kumar Das | Published : May 28, 2026 2:34 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Nikita Trehan

आज हम डिजिटल इंडिया में जी रहे हैं। हर छोटी से बड़ी चीज हमारे सामने एक क्लिक पर मौजूद है। आज शहरी क्षेत्र बेशक से डिजिटलाइज हो गए हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में पीरियड्स से जुड़ी मूलभूत जरूरतों की जानकारी का अभाव है। हमारे देश में लड़कियां पीरियड्स के बारे में खुलकर बात करने से डरती हैं। जिसके कारण मेंस्ट्रुअल हाइजीन यानी पीरियड्स के दौरान साफ-सफाई और सुरक्षित देखभाल की जागरूकता की कमी देखी जाती है। मेंस्ट्रुअल हाइजीन सही न बनाए रखने से न सिर्फ लड़कियों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है, बल्कि उनकी रोजमर्रा की लाइफ, कॉन्फिडेंस और सामाजिक जीवन भी प्रभावित होता है। भारत और अन्य विकासशील देशों में मेंस्ट्रुअल हाइजीन के बारे में खुले तौर पर बात की जा सके इसके लिए हर साल 28 मई को वर्ल्ड मेंस्ट्रुअल हाइजीन डे मनाया जाता है।

क्या है मेंस्ट्रुअल हाइजीन?

मेंस्ट्रुअल हाइजीन का मतलब है पीरियड्स के दौरान साफ और सुरक्षित तरीके अपनाना, जैसे

  1. साफ सैनिटरी पैड या कपड़े का इस्तेमाल
  2. समय-समय पर पैड बदलना
  3. साफ पानी और शौचालय की सुविधा
  4. शरीर और निजी अंगों की सही तरीके से सफाई करना
  5. पैड्स को सही तरीके से फेंकना

Menstruation पीरियड्स हर महिला के जीवन का अहम हिस्सा है।

मेंस्ट्रुअल हाइजीन को लेकर लड़कियों के सामने चुनौतियां

मेंस्ट्रुअल हाइजीन को लेकर ग्रामीण भारत की लड़कियों के सामने क्या- क्या चुनौतियां हैं इस बारे में जानकारी दे रही हैं नई दिल्ली की सनराइज हॉस्पिटल की स्त्री रोग विशेषज्ञ और लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. निकिता त्रेहन।

1. जागरूकता और शिक्षा की कमी

डॉ. निकिता त्रेहन का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी पीरियड्स को खुलकर बात करने को अश्लीलता और गंदी निगाहों से देखा जाता है। कई लड़कियों को पहली बार पीरियड आने पर यह तक नहीं पता होता कि उनके शरीर में क्या हो रहा है। जिसके कारण लड़कियां इस बारे में खुलकर बात नहीं कर पाती हैं और उन्हें पीरियड्स के बारे में सही की बजाय गलत जानकारी हो जाती है। इसके मुख्य कारण हैंः

  1. स्कूलों में सही सेक्स एजुकेशन की कमी
  2. परिवारों में लड़कियों को पीरियड्स के बारे में न बताना
  3. गलत धारणाएं और अंधविश्वास

कई लड़कियां डर, शर्म और घबराहट में इस नेचरल प्रक्रिया को बीमारी समझ बैठती हैं।

2.  साफ पानी और टॉयलेट की कमी

ग्रामीण स्कूलों और घरों में आज भी साफ और सुरक्षित टॉयलेट की कमी बड़ी समस्या है। सरकार द्वारा फैलाई जा रही जागरूकता के बावजूद ग्रामीण भारत में लड़कियां खुले में शौच के लिए जाती हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद स्कूलों में भी लड़कियों के लिए अलग शौचालय नहीं और इस्तेमाल किए गए पैड फेंकने की सुविधा नहीं है। इसी वजह से कई लड़कियां पीरियड्स के दौरान स्कूल जाना छोड़ देती हैं।

Pads

ग्रामीण क्षेत्र में लड़कियां आज भी पीरियड्स में कपड़े का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर हैं।

3. महंगा सैनिटरी पैड

शहरों की तुलना में गांवों में सैनिटरी पैड आसानी से उपलब्ध नहीं होते। जहां मिलते भी हैं, वहां कई परिवार उन्हें खरीदने में सक्षम नहीं होते है। जिसके कारण ग्रामीण भारत में आज भी लड़कियां पीरियड्स के दौरान पुराने कपड़े, गंदे अखबार का इस्तेमाल करती हैं। पुराने कपड़े और गंदे अखबार यूज करने से यूटीआई, वजाइनल इंफेक्शन और यीस्ट इंफेक्शन का खतरा कई गुना ज्यादा होता है।

4. सामाजिक भेदभाव

ग्रामीण समाज में आज भी पीरियड्स को अशुद्ध माना जाता है। पीरियड्स में लड़कियों को घर से अलग एक कमरे में रखा जाता है। लड़कियों से कहा जाता है कि वो किचन में न जाए, उन्हें अलग बर्तन में खाना दिया जाता है। इसके साथ ही, उनके बाहर खेलने, घर के पुरुषों के साथ बातचीत करने पर भी पाबंदी लगाई जाती है। इन पाबंदियों का असर लड़कियों के मानसिक स्वास्थ्य और आत्मसम्मान पर पड़ता है। इससे लड़कियां पीरियड्स और मेंस्ट्रुअल हाइजीन के बारे में बात करने से डरती हैं। इस स्थिति में मेंस्ट्रुअल हाइजीन के बारे में लड़कियों के दिमाग में बहुत सारे ख्याल आते हैं।

5. स्कूल छोड़ने की मजबूरी

यूनिसेफ की रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में बड़ी संख्या में लड़कियां पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं के कारण स्कूल छोड़ देते हैं। लड़कियों को पीरियड्स के बारे में शर्म और असहजता, स्कूल में सुविधाओं की कमी, बार-बार अनुपस्थित रहना और परिवार का सहयोग न मिलने के कारण स्कूल छोड़ना पड़ता है। स्कूल छोड़ने से न सिर्फ लड़कियों की पढ़ाई बीच में रुक जाती है, बल्कि उनका भविष्य हर तरह से अंधेरे में चला जाता है।

मेंस्ट्रुअल हाइजीन की कमी का सेहत पर क्या असर पड़ता है?

मेंस्ट्रुअल हाइजीन की कमी से कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इसमें मुख्य रुप से शामिल हैः

  1. यूरिन इन्फेक्शन
  2. स्किन एलर्जी
  3. प्रजनन तंत्र में संक्रमण
  4. शारीरिक कमजोरी
  5. एनीमिया का कारण
  6. मानसिक तनाव और चिंता

डॉ. निकिता त्रेहन बताती हैं कि समय पर सही जानकारी और साफ-सफाई न मिलने से छोटी समस्या भी बड़ी बीमारी बन सकती है।

मेंस्ट्रुअल हाइजीन डे के खास मौके पर दहेल्थसाइट के साथ खास बातचीत के दौरान डॉ. निकिता कहनी हैं कि शहरी हो या फिर ग्रामीण क्षेत्र, हर व्यक्ति को यह बात समझनी होगी कि पीरियड्स कोई छुपाने या डरने वाली बात नहीं है। पीरियड्स हम महिलाओं के जीवन का अहम हिस्सा है, जिस पर खुलकर बात होगी तभी लड़कियों द्वारा मेंस्ट्रुअल हाइजीन को सही तरीके से अपनाया जाएगा। जरूरत है कि समाज, स्कूल, सरकार और परिवार मिलकर पीरियड्स और मेंस्ट्रुअल हाइजीन के विषय पर खुलकर बात करें। जब लड़कियां बिना डर और शर्म के पीरियड्स को समझेंगी और सही सुविधाएं पाएंगी, तभी वे स्वस्थ, आत्मनिर्भर और सशक्त बन सकेंगी।

Disclaimer: मेंस्ट्रुअल हाइजीन पर बात न करने से लड़कियों में कई प्रकार की बीमारियों का खतरा बढ़ता है। इसलिए अब वो समय आ गय है, जब हमें इस विषय पर खुलकर न सिर्फ बात करनी चाहिए, बल्कि अपने आसपास की लड़कियों को भी इसके प्रति जागरूक करना चाहिए।

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