फैटी लिवर से डायबिटीज का खतरा क्यों बढ़ता है?

क्या आप जानते हैं कि जिन लोगों को फैटी लिवर की समस्या होती है, उन्हें डायबिटीज का खतरा अधिक होता है? आइए आपको बताते हैं ऐसा क्यों होता है और कैसे ठीक किया जा सकता है।

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Written By: Vidya Sharma | Updated : January 30, 2026 9:41 AM IST

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Medically Verified By: Dr. Monika Sharma

Fatty Liver And Diabetes: आजकल फैटी लिवर सिर्फ शराब पीने वालों की बीमारी नहीं रह गई है। खराब खानपान, बढ़ता वजन, कम फिजिकल एक्टिविटी और स्ट्रेस के कारण नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। चिंता की बात यह है कि फैटी लिवर होने पर टाइप-2 डायबिटीज का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। आखिर ऐसा क्यों होता है? और इसे रोका कैसे जा सकता है?

आकाश हेल्थ केयर की एनटोक्रीनोलॉजिस्ट डॉक्टर मोनिका शर्मा कहती हैं कि फैटी लिवर में लिवर की कोशिकाओं में चर्बी जमा होने लगती है। धीरे-धीरे लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और शरीर में इंसुलिन सही तरीके से काम नहीं कर पाता, जिसे मेडिकल भाषा में इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। यही इंसुलिन एक हार्मोन है जो हमारे खून में मौजूद शुगर को कंट्रोल करता है। जब इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है, तो शरीर को शुगर कंट्रोल करने के लिए ज्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है। कुछ समय बाद पैंक्रियाज थकने लगता है और ब्लड शुगर बढ़कर डायबिटीज में बदल सकता है। आइए आपको थोड़ा विस्तार से बताते हैं।

क्या कहती हैं डॉक्टर मोनिका?

डॉक्टर मोनिका के मुताबिक 'फैटी लिवर एक तरह से शरीर का मेटाबॉलिक अलार्म है। इसमें इंसुलिन रेजिस्टेंस तेजी से बढ़ता है और यही आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज की बड़ी वजह बनता है।' 

डॉक्टर ने बताया 5–10 फीसदी वजन घटाने का फायदा

अच्छी खबर यह है कि फैटी लिवर शुरुआती स्टेज में पूरी तरह रिवर्स भी हो सकता है। इसके लिए सबसे प्रभावी तरीका है वजन कम करना। स्टडीज और डॉक्टरों की सलाह के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति अपने शरीर का 5–10% वजन कम कर ले, तो कई तरह सुधार देखने को मिल सकते हैं। यह सुधार आप ऊपर दी गई तस्वीर में देख सकते हैं। 

डॉक्टर कहती हैं कि ‘फैटी लिवर और डायबिटीज दोनों का इलाज अक्सर एक ही दिशा में होता है—वजन घटाइए, एक्टिव रहिए और खानपान सुधारिए। सिर्फ 5–10% वजन कम करने से लिवर की सेहत में बड़ा बदलाव दिख सकता है।’

लाइफस्टाइल बदलाव: दवा से ज्यादा असरदार आदतें

फैटी लिवर से डायबिटीज का खतरा घटाने के लिए सबसे जरूरी है लाइफस्टाइल में बदलाव। डॉक्टरों के अनुसार इन 4 चीजों पर फोकस करना चाहिए:

1) डाइट में सुधार

  1. मीठा, कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस कम करें
  2. मैदा, बिस्किट, बेकरी आइटम से दूरी रखें
  3. तला-भुना और फास्ट फूड सीमित करें
  4. प्लेट में फाइबर बढ़ाएं: सलाद, सब्जियां, दालें
  5. प्रोटीन लें: दाल, पनीर, अंडा, मछली (जैसा उपयुक्त हो)

2) रोजाना एक्सरसाइज

  1. 30–45 मिनट तेज चाल से चलना
  2. हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (हफ्ते में 2–3 दिन)
  3. लंबे समय तक बैठने से बचें, हर 45 मिनट में 2 मिनट चलें

3) नींद और स्ट्रेस कंट्रोल

  1. कम नींद और लगातार तनाव हार्मोनल बदलाव बढ़ाकर इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ा सकता है।
  2. 7–8 घंटे की नींद लें
  3. स्क्रीन टाइम कम करें
  4. योग/प्राणायाम अपनाएं 

4) शराब और स्मोकिंग से बचाव

अल्कोहल और स्मोकिंग लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं और फैटी लिवर को बिगाड़ सकते हैं। डॉक्टरों ने बताया कि किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए? जैसे- 

अगर आपके पास ये जोखिम हैं तो आपको फैटी लिवर और डायबिटीज दोनों के लिए अलर्ट रहना चाहिए:

  1. पेट की चर्बी (बेली फैट)
  2. हाई कोलेस्ट्रॉल/ट्राइग्लिसराइड
  3. हाई बीपी
  4. परिवार में डायबिटीज की हिस्ट्री
  5. थकान, भारीपन, पेट के दाहिने हिस्से में असहजता

डॉक्टर सलाह देते हैं कि ऐसे लोग समय-समय पर LFT, अल्ट्रासाउंड, फास्टिंग शुगर, HbA1c जैसी जांच कराएं।

फैटी लिवर को हल्के में लेना सही नहीं है, क्योंकि यह डायबिटीज का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। अच्छी बात यह है कि समय रहते 5–10% वजन घटाकर, डाइट सुधारकर और एक्टिव रहकर फैटी लिवर को कंट्रोल किया जा सकता है और डायबिटीज का खतरा भी काफी कम किया जा सकता है।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।