hamburger icon
A
Read in English

फोन देखते-देखते चक्कर क्यों आता है? जानें क्या होता है स्क्रीन-इंड्यूस्ड वर्टिगो?

आपके साथ भी ऐसा कभी न कभी हुआ होगा कि आपने फोन का इस्तेमाल करते समय चक्कर आने या आंखों के आगे अंधेरा छाने जैसा महसूस किया होगा। आइए जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है?

WrittenBy

Written By: Vidya Sharma | Updated : July 31, 2026 11:38 AM IST

WrittenBy

Medically Verified By: Dr. Anup Kumar Roy

आज के समय में स्मार्टफोन ज्यादातर लोगों के रूटीन का एक अहम हिस्सा बन चुका है। फिर चाहे ऑफिस का काम हो, ऑनलाइन पढ़ाई, सोशल मीडिया या फिर मनोरंजन, अब घंटों तक स्क्रीन देखना आम बात हो गई है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोगों को लंबे समय तक फोन देखने के बाद अचानक चक्कर आने लगते हैं, सिर भारी महसूस होता है या ऐसा लगता है कि आसपास की चीजें घूम रही हैं?

आमतौर पर लोग इसे थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कई मामलों में यह स्क्रीन-इंड्यूस्ड वर्टिगो का संकेत हो सकता है। पारस हेल्थ पंचकूला के ईएनटी कंसल्टेंट डॉक्टर अनूप रॉय बताते हैं, "स्क्रीन-इंड्यूस्ड वर्टिगो कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह ऐसी स्थिति है जिसमें लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप या अन्य डिजिटल स्क्रीन देखने से आंखों, दिमाग और शरीर के संतुलन तंत्र पर दबाव पड़ता है।” आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

स्क्रीन-इंड्यूस्ड वर्टिगो कैसे होता है?

स्क्रीन-इंड्यूस्ड वर्टिगो कैसे होता है? स्क्रीन-इंड्यूस्ड वर्टिगो कैसे होता है?

डॉक्टर ने बताया कि हमारा दिमाग आंखों, कानों के अंदर मौजूद वेस्टिबुलर सिस्टम और मसल्स से मिलने वाले संकेतों के आधार पर शरीर का संतुलन बनाए रखने का काम करता है। लेकिन जब स्क्रीन पर लगातार बदलती तस्वीरें, तेज स्क्रॉलिंग या लंबे समय तक एक ही दूरी पर देखने के कारण सिग्नल का संतुलन बिगड़ जाता है। जिससे व्यक्ति को चक्कर, मतली या अस्थिरता महसूस हो सकती है।

किन लोगों में अधिक जोखिम होता है?

एक्सपर्ट के अनुसार, "जो लोग रोजाना कई घंटों तक मोबाइल या कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं, उनमें इसका खतरा अधिक होता है। आईटी प्रोफेशनल्स, स्टूडेंट, गेमर्स, कंटेंट क्रिएटर्स और र्क फ्रॉम होम करने वाले लोग में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। जिन लोगों को पहले से माइग्रेन, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, आंखों का नंबर, ड्राई आई या वर्टिगो की समस्या रही हो, उनमें स्क्रीन देखने के बाद चक्कर आने की संभावना और बढ़ जाती है।

स्क्रीन-इंड्यूस्ड वर्टिगो के क्या लक्षण हैं?

स्क्रीन-इंड्यूस्ड वर्टिगो के लक्षण? (Image Credit- ChatGPT) स्क्रीन-इंड्यूस्ड वर्टिगो के लक्षण? (Image Credit- ChatGPT)

इससे बचने के लिए क्या करें?

स्क्रीन-इंड्यूस्ड वर्टिगो स्क्रीन-इंड्यूस्ड वर्टिगो

डॉक्टर सलाह देते हैं कि मोबाइल को आंखों से लगभग 16 से 18 इंच की दूरी पर रखें और स्क्रीन की ब्राइटनेस आसपास की रोशनी के अनुसार रखें। बहुत अंधेरे कमरे में या अत्यधिक चमक वाली स्क्रीन का उपयोग करने से बचें। लगातार कई घंटों तक फोन देखने के बजाय बीच-बीच में ब्रेक लें, पर्याप्त पानी पिएं और गर्दन व कंधों की हल्की स्ट्रेचिंग करें। अगर आपकी आंखों का नंबर है तो समय-समय पर आंखों की जांच भी कराते रहें।

कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?

अगर चक्कर बार-बार आते हों या कुछ मिनटों से अधिक समय तक बने रहें, चलने में परेशानी हो, सुनने में कमी, तेज सिरदर्द, उल्टी, बोलने में कठिनाई, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या धुंधला दिखाई देने जैसी समस्याएं भी साथ हों, तो इसे केवल स्क्रीन की वजह मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ या न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लेना आवश्यक है, क्योंकि इसके पीछे कान के अंदर की संतुलन प्रणाली की बीमारी, माइग्रेन, लो ब्लड प्रेशर, न्यूरोलॉजिकल समस्या या अन्य गंभीर कारण भी हो सकते हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी विशेषज्ञ की सलाह पर आधारित है, लेकिन यह किसी चिकित्सीय परामर्श या उपचार का विकल्प नहीं है। आज के डिजिटल दौर में स्क्रीन से पूरी तरह दूरी बनाना संभव नहीं है, लेकिन सही आदतें अपनाकर स्क्रीन-इंड्यूस्ड वर्टिगो के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अगर फोन देखने के बाद बार-बार चक्कर आएं, तो इसे सामान्य थकान समझकर अनदेखा करने के बजाय समय रहते विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है।