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Male Or Female Ka Body Temperature Alag Kyu Hota Hai: महिलाओं और पुरुषों के शरीर में बहुत अंतर होता है। ये सिर्फ बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक भी है। यही कारण है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक ठंड लगती है। कई दफा डॉक्टर द्वारा भी महिलाओं को यही सलाह दी जाती है कि वे गर्म पानी से नहाएं। बाकी सब तो ठीक है, लेकिन ऐसा क्यों होता है इसका जवाब कहां से मिलेगा?
‘पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को ठंड लगती है, लेकिन क्यों?’ इस सवाल का जवाब पाने के लिए हमने डॉक्टर श्रेय श्रीवास्तव से बातचीत की, और जाना कि ऐसा क्यों होता है। डॉक्टर महिलाओं और पुरुष, दोनों की शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए विस्तार से इस विषय पर जानकारी दी। आइए आपको भी बताते हैं डॉक्टर ने क्या बताया।

महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक ठंड इसलिए महसूस करती हैं क्योंकि उनके शरीर में हार्मोनल परिवर्तन अधिक होते हैं, मेटाबोलिज्म धीमा होता है, मांसपेशियां कम होती हैं और वसा का वितरण अलग तरीके से होता है। महिलाएं अधिक शरीर वसा के बावजूद ऊष्मा को बनाए रखने में कम सक्षम होती हैं। साथ ही, उनका शरीर का सतही क्षेत्रफल पुरुषों की तुलना में छोटा होता है, जिससे शरीर की गर्मी अधिक तेजी से बाहर निकलती है।
महिलाओं में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन नामक प्रमुख हार्मोन होते हैं, जो शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में भूमिका निभाते हैं। विशेष रूप से प्रोजेस्टेरोन मासिक धर्म चक्र के दौरान शरीर के तापमान को बढ़ा सकता है, लेकिन एस्ट्रोजन रक्त वाहिकाओं को फैलाकर शरीर की ऊष्मा को बाहर निकालने में सहायक होता है। इस हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण महिलाओं का तापमान संवेदनशीलता अधिक होती है। इसके अलावा, हार्मोनल असंतुलन, जैसे थायरॉयड हार्मोन की कमी, ठंड का अनुभव बढ़ा सकती है। यही कारण है कि महिलाएं सामान्यतः: पुरुषों की तुलना में अधिक ठंड महसूस करती हैं।
महिलाओं की चयापचय दर पुरुषों की तुलना में स्वाभाविक रूप से कम होती है। इसका अर्थ है कि उनका शरीर भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करने की प्रक्रिया धीमी होती है। धीमा मेटाबोलिज्म कम गर्मी उत्पन्न करता है, जिससे शरीर ठंडा महसूस करता है। चयापचय दर कम होने का कारण महिलाओं में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर कम होना और मांसपेशियों की मात्रा कम होना है। क्योंकि मांसपेशियाँ ऊर्जा और गर्मी उत्पादन में सहायक होती हैं, इसलिए कम मेटाबोलिज्म के कारण महिलाओं को ठंड का अनुभव ज्यादा होता है।
महिलाओं के शरीर में पुरुषों की तुलना में कम मांसपेशी होती है। मांसपेशियां ऊष्मा उत्पन्न करने का एक प्रमुख स्रोत होती हैं। जब शरीर ठंडा होता है, तो मांसपेशियाँ कांप कर गर्मी उत्पन्न करती हैं। लेकिन यदि मांसपेशी कम हों, तो यह प्रक्रिया कम प्रभावी होती है। महिला सामान्यतः: अधिक वसा और कम मांसपेशी वाले शरीर के साथ होती हैं, जिससे उनका शरीर उतनी प्रभावी ढंग से गर्मी उत्पन्न नहीं कर पाता। इसके कारण, वे ठंडी परिस्थितियों में जल्दी ठंड महसूस करती हैं, जबकि पुरुष लंबे समय तक सहन कर पाते हैं।
महिलाओं के शरीर में वसा का वितरण मुख्यतः नितंब, जांघों और कूल्हों के आसपास होता है। यह वसा ऊष्मा इन्सुलेशन का काम करती है, लेकिन त्वचा के नजदीक न होने के कारण यह सतही गर्मी नहीं प्रदान करती। दूसरी ओर, पुरुषों की वसा पेट के आसपास केंद्रित होती है, जो अधिक गर्मी बनाए रख सकती है। इसके अतिरिक्त, महिलाओं का वसा ऊतकों में रक्त संचार कम होता है, जिससे ऊष्मा का प्रसार सीमित होता है। इसलिए, वसा की अधिक मात्रा होते हुए भी महिलाएं उतनी गर्मी अनुभव नहीं करतीं जितनी अपेक्षित होती है।
महिलाओं का शरीर आकार आमतौर पर पुरुषों की तुलना में छोटा होता है और उनके शरीर का सतही क्षेत्रफल-to-वॉल्यूम अनुपात अधिक होता है। इसका अर्थ है कि उनका शरीर अधिक ऊष्मा को वातावरण में खो देता है। शरीर का यह अनुपात ताप नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब सतह क्षेत्रफल अधिक होता है, तो शरीर की ऊष्मा तेजी से बाहर निकलती है। चूंकि महिलाओं में यह अनुपात अधिक होता है, इसलिए उनका शरीर कम समय में अधिक गर्मी खो देता है, जिससे वे ठंड को अधिक महसूस करती हैं।
पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन प्रमुख होता है, जो न केवल मांसपेशी विकास बल्कि शरीर की ऊष्मा बनाए रखने में भी सहायक होता है। टेस्टोस्टेरोन के उच्च स्तर से शरीर में अधिक ऊर्जा और ऊष्मा उत्पन्न होती है। साथ ही, यह मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है, जिससे पुरुषों को ठंड का अनुभव कम होता है। हार्मोनल स्थिरता के कारण पुरुषों में तापमान नियंत्रण अधिक सटीक होता है। इस हार्मोन का प्रभाव रक्त संचार और तंत्रिका क्रियाओं पर भी पड़ता है, जिससे शरीर का तापमान लंबे समय तक संतुलित बना रहता है।
पुरुषों की चयापचय दर महिलाओं की तुलना में अधिक होती है। इसका मुख्य कारण उनके शरीर में मांसपेशियों की अधिक मात्रा और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की उपस्थिति है। उच्च मेटाबोलिज्म के कारण पुरुषों का शरीर ऊर्जा को तेजी से जलाता है, जिससे अधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है। यह ऊष्मा शरीर को अंदर से गर्म रखने में मदद करती है, जिससे ठंड महसूस नहीं होती। उनकी गतिविधियां भी अधिक ऊर्जावान होती हैं, जिससे शरीर में अधिक ऊष्मा बनती है। यही कारण है कि पुरुष सामान्यतः ठंडे वातावरण को अधिक सहन कर पाते हैं।
पुरुषों के शरीर में मांसपेशियों की मात्रा महिलाओं की तुलना में अधिक होती है। मांसपेशियां ऊष्मा उत्पन्न करने के लिए ऊर्जा का उपयोग करती हैं। जब शरीर ठंडा होता है, तो मांसपेशियां संकुचित होकर (shivering) गर्मी उत्पन्न करती हैं। मांसपेशियों की अधिक मात्रा इस प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाती है। साथ ही, अधिक मांसपेशियाँ चयापचय दर को भी बढ़ाती हैं, जिससे शरीर अंदर से गर्म रहता है। यही कारण है कि पुरुषों को ठंड कम महसूस होती है और वे ज्यादा देर तक ठंडे मौसम में सहज रह सकते हैं।
पुरुषों के शरीर में वसा का वितरण मुख्यतः पेट और आंतरिक अंगों के आसपास होता है। यह वसा शरीर के कोर तापमान को बनाए रखने में सहायक होती है। पुरुषों की वसा त्वचा के करीब नहीं होती, जिससे यह ऊष्मा को अधिक स्थिर बनाकर शरीर को अंदर से गर्म रखती है। इसके विपरीत, यह वसा सतह से कम संपर्क में होती है, इसलिए यह प्रभावी ऊष्मा इन्सुलेशन प्रदान करती है। साथ ही, पुरुषों की त्वचा में रक्त प्रवाह महिलाओं की तुलना में तेज होता है, जिससे ऊष्मा पूरे शरीर में बेहतर तरीके से वितरित होती है।
पुरुषों का शरीर आकार आमतौर पर महिलाओं से बड़ा होता है और उनकी लंबाई, चौड़ाई व मांसपेशियों के कारण सतह क्षेत्रफल-to-वॉल्यूम अनुपात कम होता है। इसका अर्थ है कि उनके शरीर की ऊष्मा कम मात्रा में बाहर निकलती है। कम सतही क्षेत्र का मतलब है कि ऊष्मा को खोने की दर कम होती है, जिससे शरीर अधिक देर तक गर्म रहता है। साथ ही, बड़े शरीर में ऊष्मा संग्रहण की क्षमता भी अधिक होती है। यही कारण है कि पुरुष तुलनात्मक रूप से अधिक समय तक ठंडे वातावरण में रह सकते हैं।