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Written By: Editorial Team | Published : June 30, 2017 3:40 PM IST
आपने कई लोगों से सुना होगा या पढ़ा होगा कि रोजाना कम से कम आठ गिलास पानी पीना चाहिए। लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई यह जरूरी है? एक सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि प्यास क्यों लगती है? इन तमाम सवालों के जवाब जानने के लिए हमने मुंबई की न्यूट्रिशनिस्ट रीना बालिगा से बात की है। जानिए उनका क्या कहना है।
प्यास क्यों लगती है?
ऐसा माना जाता है कि शरीर के कुल वजन का करीब 70 फीसदी पानी होता है। इसलिए जब शरीर में पानी की मात्रा कम होने लगती है, तो ओस्मोलाईट (osmolyte) एकाग्रता बहुत अधिक हो जाती है, जिससे ब्रेन को प्यास लगने का संकेत मिलता है। आपको प्यास तब महसूस होती है, जब शरीर में तरल पदार्थ की कमी हो जाती है या तब, जब शरीर में नमक जैसे विभिन्न ओस्मोलाईट की एकाग्रता बढ़ जाती है। कनीकी रूप से, यह शरीर द्वारा दिमाग को दिया गया संकेत है। सरल शब्दों में कहें, तो यह पानी के लिए शरीर की लालसा या जरूरत है। जब आप प्यास महसूस करते हैं, तो आपको पानी या किसी द्रव को पीने की आवश्यकता महसूस होती है। इसलिए ओस्मोलाईट के बढ़ने और पानी की कमी की वजह से आपको प्यास लगती है।
जब आप लंबे समय तक पानी या कोई अन्य तरल पदार्थ नहीं पीते हैं, तो इससे आपको डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है। इसलिए अगर आप दिमाग के संकेतों को अनदेखा करते हैं, तो इससे प्यास बुझती है और आपको कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
रीना के अनुसार, 'आपको पानी की मात्रा को लेकर भ्रमित नहीं होना चाहिए। यानि आपको दिन में सादे पानी की मात्रा के बीच फर्क को समझना चाहिए। मेरे पास ऐसे कई लोग आते हैं, जो यह पूछते हैं कि रोजाना कितना पानी पीना चाहिए या कितनी ग्रीन टी या जूस पीना चाहिए। कई ऐसे लोग हैं, जो दिन में केवल एक गिलास पानी पीते हैं लेकिन अन्य पेय पदार्थों का अधिक पीते हैं। एक स्वस्थ जीवन के लिए आपको शरीर के प्रति किलो वजन के हिसाब से 34 एमएल पानी पीना चाहिए।
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अनुवादक – Usman Khan
चित्र स्रोत - Shutterstock