गर्मियों में अधिक थकान क्यों महसूस होती है? डॉक्टर से जानें शरीर में एनर्जी कैसे बढ़ाएं

Summer Mai Tiredness Kaise Dur Kare: गर्मियों में हम सभी कभी न कभी शारीरिक कमजोरी जरूर महसूस करते हैं। लेकिन ऐसा क्यों होता है और हम अपने शरीर में एनर्जी कैसे बढ़ा सकते हैं, आइए डॉक्टर से जानते हैं।

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Written By: Vidya Sharma | Updated : April 29, 2026 10:50 AM IST

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Medically Verified By: Dr. Navneet Arora

Garmiyo Mai Thakan Kaise Dur Kare: गर्मियों में थकान होना कोई आज की बात नहीं है, बल्कि यह बहुत ही आम है। ओपीडी में इस मौसम में सबसे ज्यादा लोग यही कहते मिलते हैं कि ‘डॉक्टर साहब, बिल्कुल ताकत नहीं लग रही।’ दिलचस्प बात यह है कि कई बार जांच में कोई बड़ी बीमारी नहीं निकलती, फिर भी व्यक्ति खुद को बेहद थका हुआ महसूस करता है। ऐसा आपको साथ भी हुआ होगा। इसलिए हमने इस विषय पर विस्तार से जानने के लिए हमने पारस हेल्थ, पंचकूला, के इनफेक्शियस डिजीज- कंकल्सटें डॉक्टर नवनीत अरोड़ा से बात की।

डॉक्टरों के मुताबिक इसकी सबसे आम वजह है शरीर में पानी और नमक की कमी। तेज गर्मी में पसीना ज्यादा आता है और इसके साथ शरीर से सोडियम, पोटेशियम जैसे जरूरी तत्व भी निकल जाते हैं। अगर इनकी भरपाई समय पर नहीं होती, तो शरीर सुस्त पड़ने लगता है। कई लोग यह मान लेते हैं कि वे पर्याप्त पानी पी रहे हैं, लेकिन हकीकत में उनकी जरूरत उससे कहीं ज्यादा होती है। आइए हम इस विषय पर विस्तार से जानते हैं।

गर्मी में थकान का पहला कारण है शरीर का तापमान

गर्मी में थकान लगने का एक कारण शरीर का तापमान संतुलित रखने की प्रक्रिया पर ध्यान न देना है। जब बाहर का तापमान बहुत ज्यादा होता है, तो शरीर को खुद को ठंडा रखने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। इस दौरान ऊर्जा की खपत बढ़ जाती है, जिससे जल्दी थकान महसूस होती है। यही वजह है कि दोपहर के समय काम करने की क्षमता कम लगती है।

दूसरा कारण है नींद की कमी

नींद की कमी भी एक अहम कारण है। गर्मी में रात के समय बार-बार नींद खुलना या ठीक से नींद न आना आम बात है। लगातार ऐसा होने पर शरीर को पूरा आराम नहीं मिल पाता और दिनभर थकान बनी रहती है। यह स्थिति धीरे-धीरे आदत बन सकती है, जिसे लोग सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।

खाने पीने का ध्यान रखना है बहुत जरूरी

खानपान का पैटर्न भी बदल जाता है। कई लोग गर्मी में भोजन कम कर देते हैं या सिर्फ हल्की चीजों पर निर्भर रहने लगते हैं, जिससे शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता। वहीं, कुछ लोग बार-बार ठंडे पेय या प्रोसेस्ड फूड लेने लगते हैं, जो तुरंत राहत तो देते हैं लेकिन लंबे समय में ऊर्जा स्तर को प्रभावित करते हैं।

डॉक्टर ने दी सलाह

डॉक्टर सलाह देते हैं कि इस मौसम में कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखना जरूरी है। सबसे पहले, पानी का सेवन बढ़ाना चाहिए। सिर्फ प्यास लगने पर पानी पीना पर्याप्त नहीं होता। दिनभर नियमित अंतराल पर पानी पीना चाहिए। इसके अलावा, छाछ, नींबू पानी और नारियल पानी जैसे पेय शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।

डाइट को करें बैलेंस

आहार में संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है। मौसमी फल के फायदे अनेक होते हैं, जैसे तरबूज, खरबूजा और खीरा न सिर्फ पानी की कमी पूरी करते हैं बल्कि शरीर को हल्का भी रखते हैं। अत्यधिक तला-भुना या मसालेदार भोजन थकान को बढ़ा सकता है, इसलिए इससे बचना बेहतर है।

शारीरिक गतिविधि पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं है, लेकिन समय का ध्यान रखना चाहिए। सुबह या शाम के समय हल्की एक्सरसाइज करना ज्यादा सुरक्षित और लाभदायक रहता है। तेज धूप में लंबे समय तक रहने से बचना चाहिए।

डिस्क्लेमर- गर्मियों में थकान होना आम है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं। सही खानपान, पर्याप्त पानी और संतुलित दिनचर्या से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। अगर थकान लगातार बनी रहती है, कमजोरी बढ़ती जा रही है या चक्कर आने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। कई बार यह किसी अन्य समस्या का संकेत भी हो सकता है।

FAQs

क्या छाछ या सत्तू के ड्रिंक गर्मियों के सिरदर्द में मदद कर सकते हैं?

गर्मियों में होने वाले ज्यादातर सिरदर्द इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी के कारण होते हैं। छाछ और सत्तू जैसे ड्रिंक्स सोडियम और पोटैशियम की कमी को पूरा करते हैं। इससे सिर की नसों में होने वाला तनाव कम कर देते हैं। इससे सिरदर्द की परेशानी कम हो सकती है।    

गर्मी में थकान कैसे दूर करें?

थकान दूर करने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लें और पानी जरूर पिएं।

गर्मी में क्या नहीं खाना चाहिए?

गर्मी में फास्ट फूड्स और ज्यादा तला-भुना भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।

पेट में गर्मी हो तो कैसे पता चलता है?

पेट में गर्मी (या एसिडिटी) के प्रमुख लक्षणों में पेट/सीने में जलन, खट्टी डकारें, अत्यधिक गैस, पेट फूलना, कब्ज, दस्त, जी मिचलाना और पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द या भारीपन शामिल हैं।

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