Pneumonia Explainer: मानसून में क्यों बढ़ने लगते हैं निमोनिया के मामले? जानें लक्षण, कारण, इलाज और बचाव
Pneumonia Explainer: मानसून में क्यों बढ़ने लगते हैं निमोनिया के मामले? जानें लक्षण, कारण, इलाज और बचाव
मानसून में निमोनिया के मामलों में तेजी देखने को मिल सकती है। इस मौसम में कमजोर इम्यूनिटी और पुरानी बीमारियों वाले लोगों में निमोनिया का खतरा ज्यादा रहता है। बच्चों और बुजुर्गों को भी यह प्रभावित कर सकता है।
Written By:
Anju Rawat
| Published : July 1, 2026 3:10 PM IST
मानसून एक ऐसा मौसम....जो गर्मी से राहत दिलाता है और मौसम को सुहावना बनाता है। लेकिन, यह मौसम अपने साथ सैकड़ों बीमारियां लेकर आता है। ज्यादातर लोगों को लगता है कि मानसून में सिर्फ डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसे मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ता है। जबकि, इस मौसम में निमोनिया के मामलों में भी तेजी देखने को मिलती है। गर्मी और सर्दी की तुलना में, मानसून में निमोनिया के मामले ज्यादा दर्ज हो सकते हैं।
निमोनिया श्वसन-तंत्र से जुड़ा एक संक्रमण है, जो फेफड़ों को प्रभावित करता है। आपको बता दें कि फेफड़े छोटी-छोटी वायु थैलियों से बने होते हैं, जो सांस लेने पर हवा से भर जाती हैं। लेकिन, जब किसी व्यक्ति को निमोनिया होता है, तो इन वायु थैलियों में मवाद और तरल पदार्थ भर जाता है। इसकी वजह से निमोनिया संक्रमित व्यक्ति को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है और उसे सांस लेने में मुश्किल होने लगती है।
PSRI हॉस्पिटलकेहेड ऑफ इमरजेंसी डॉ. प्रशांत सिन्हा बताते हैं कि मानसून में निमोनिया के मामले कई कारणों से बढ़ सकते हैं। जैसे-
इस मौसम में हवा में नमी काफी ज्यादा होती है। इससे बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपते हैं। वायरस निमोनिया का कारण बन सकते हैं।
इस मौसम में इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ सकता है, जिससे शरीर निमोनिया पैदा करने वाले वायरस या बैक्टीरिया की चपेट में जल्दी या आसानी से आ सकता है।
अगर मानसून में आप हर वक्त खिड़कियां और दरवाजे बंद रखते हैं, तो वेंटिलेशन खराब हो सकता है। इससे घर में कीटाणु अधिक मात्रा में पनप सकते हैं और अगर घर पर कोई संक्रमित व्यक्ति है, तो यह बीमारी दूसरे लोगों तक भी पहुंच सकता है।
बारिश के मौसम में लोगों को स्ट्रीट फूड खाना काफी पसंद होता है। इन फास्ट फूड्स और जंक फूड्स में पोषक तत्व नहीं होते हैं, साथ ही अनहाइजीनिक तरीके से पकाया जाता है। इससे शरीर वायरस की चपेट में आ सकता है।
नाक या गले में मौजूद वायरस और बैक्टीरिया, सांस के माध्यम से फेफड़ों तक पहुंच सकता है और संक्रमण विकसित हो सकता है।
संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने के दौरान निकलने वाले सूक्ष्म कण या ड्रॉपलेट्स के जरिए भी निमोनिया फैल सकता है।
कुछ मामलों में नवजात शिशुओं को जन्म के तुरंत बाद ही निमोनिया हो सकता है।
निमोनिया संक्रमण आमतौर पर संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से भी फैल सकता है। हालांकि, सभी प्रकार के निमोनिया सीधे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलते।
breathing problem
निमोनिया के लक्षण क्या हैं
डॉ. प्रशांत सिन्हा बताते हैं कि निमोनिया होने पर आपको कुछ सामान्य और गंभीर लक्षण महसूस हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं-
अगर लंबे समय से खांसी बनी हुई है, तो इस संकेत की अनदेखी न करें।
निमोनिया होने पर खांसी के साथ बलगम या खून भी निकल सकता है।
निमोनिया के मरीजों को तेज बुखार के साथ पसीना आ सकता है।
कुछ निमोनिया मरीजों को ठंड या कंपकंपी जैसा महसूस हो सकता है।
अगर बुखार के साथ ही सांस लेने में भी तकलीफ हो तो निमोनिया की जांच कराई जा सकती है।
American Lung Associationके अनुसार, भूख कम लगना, कमजोरी और थकान महसूस होना, मतली, उल्टी, सांस फूलना आदि भी निमोनिया के लक्षण हो सकते हैं। निमोनिया के किसी भी संकेत की अनदेखी न करें। समय पर इलाज से निमोनिया को गंभीर होने से बचाया जा सकता है।
बच्चों में जानलेवा हो सकता है निमोनिया
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2017 में निमोनिया की वजह से 5 साल से कम उम्र के लगभग 8 लाख बच्चों ने अपनी जान गंवाई थी। वहीं, अगर साल 2019 की बात करें तो निमोनिया की वजह से 5 साल से कम उम्र के लगभग 7 लाख 40 हजार बच्चों की मृत्यु हुई थी। निमोनिया के गंभीर मामलों में लोगों को अपनी जान तक गंवानी पड़ सकती है। इसलिए निमोनिया का समय पर इलाज कराना बहुत जरूरी होता है। हालांकि, निमोनिया के कई मामले सही इलाज से ठीक भी होते हैं।
65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों में निमोनिया का खतरा ज्यादा बना रहता है। उम्र बढ़ने के साथ इस बीमारी का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है।
अगर कोई व्यक्ति पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है, तो उसमें भी इसका खतरा ज्यादा हो सकता है।
जिन लोगों का इम्यून सिस्टम वीक होता है, उनमें निमोनिया का खतरा ज्यादा हो सकता है।
5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में भी निमोनिया का खतरा ज्यादा होता है।
क्रॉनिक हार्ट डिजीज, लिवर डिजीज, लंग डिजीज और डायबिटीज रोगियों में निमोनिया का रिस्क ज्यादा बना रहता है।
pneumonia treatment
निमोनिया का इलाज क्या होता है?
WHO के अनुसार, निमोनिया का इलाज एंटीबायोटिक दवाइयों से किया जाता है। लेकिन, बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा बिल्कुल न लें। निमोनिया के लक्षण महसूस होने पर डॉक्टर से मिलें, वे आपके लिए ओरल एंटीबायोटिक लिख सकते हैं।
सामान्य लक्षणों वाले निमोनिया के मरीज घर पर ही दवा और हेल्दी डाइट की मदद से धीरे-धीरे रिकवर कर सकते हैं।
कुछ गंभीर मामलों में निमोनिया के रोगियों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है।
आपको बता दें कि निमोनिया का इलाज, इसके लक्षणों, मरीज की उम्र और गंभीरता पर निर्भर करता है।
निमोनिया से बचाव के लिए क्या करें?
निमोनिया किसी को भी हो सकता है। लेकिन, बच्चों में निमोनिया होने का खतरा ज्यादा बना रहता है।
WHO के अनुसार, बच्चों को निमोनिया से बचाने के लिए हिब (Hib), न्यूमोकोकल, खसरा (Measles) और काली खांसी के वैक्सीन लगवा सकते हैं। इन वैक्सीन को निमोनिया से बचाव के लिए प्रभावी माना जाता है।
कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में निमोनिया के मामले ज्यादा देखने को मिल सकते हैं। इसलिए पोषक तत्वों से भरपूर भोजन खाना बहुत जरूरी है। इससे शरीर की इम्यूनिटी बूस्ट करने में मदद मिल सकती है।
शिशु के जन्म के 6 महीने तक सिर्फ मां का दूध पिलाएं। इससे निमोनिया के खतरे को काफी कम किया जा सकता है।
छोटे बच्चों को भीड़-भाड़ वाली जगहों पर ले जाने से बचना चाहिए।
अगर आपको संक्रमण है, तो मास्क का इस्तेमाल करें और खुद को आइसोलेट करें।
Disclaimer: निमोनिया फेफड़ों से जुड़ा एक रोग है, जिसमें व्यक्ति को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है। निमोनिया रोगियों में खांसी और बुखार जैसे लक्षण महसूस होने लगते हैं। निमोनिया से संक्रमित व्यक्ति को आइसोलेट रहना चाहिए और दूसरों के संपर्क में आने से बचना चाहिए। अगर निमोनिया का कोई लक्षण महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें।
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