
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Medically Verified By: Dr. Malini Saba
बार-बार एक शो देखने की आदत (Image Credit- ChatGPT)
कुछ नाटक, कार्टून या मूवी ऐसी होती हैं, जिन्हें हम बहुत पसंद करते हैं। यहां तक कि जितने बार भी देखे, कम ही लगता है। ये तो हुई पसंद की बात, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो एक शो को बार-बार रिपीट करके देखते हैं। अगर उन्हें पूछा जाए कि "इसमें नया क्या है? तुम्हें तो हर सीन याद है, तो फिर क्यों देख रहे हो?" तो जवाब आ सकता है कि "पता नहीं, बस अच्छा लगता है।"
दिलचस्प बात यह है कि "बस अच्छा लगता है" के पीछे असल में एक गहरी मनोवैज्ञानिक वजह हो सकती है। हम अक्सर मानते हैं कि लोगों को हमेशा नई चीजें पसंद होती हैं। नई फिल्में, नए शो, नई कहानियां। लेकिन अगर ऐसा ही होता, तो दुनिया में इतने लोग अपने पसंदीदा शो को बार-बार क्यों देखते? क्यों कोई व्यक्ति हर साल वही सीरीज फिर से शुरू कर देता है? क्यों कुछ लोग तनाव होने पर नया कंटेंट देखने के बजाय उसी पुराने शो पर लौट जाते हैं जिसे वे पहले कई बार देख चुके हैं? आइए, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और महिला एवं मानवाधिकारों की समर्थक डॉक्टर मालिनी सबा से जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है।"
साइकोलॉजिस्ट के अनुसार “यह आदत सिर्फ मनोरंजन से नहीं जुड़ी हुई है, बल्कि यह एक तरह की इमोशनल सेफ्टी भी है। असल में जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा तो कभी भी कुछ भी हो जाने वाली स्थितियों से भरा होता है। हमें पता ही नहीं होता कि कल क्या होगा, किसका फोन आएगा, कौन-सी समस्या सामने आ जाएगी या कौन-सा फैसला लेना पड़ जाएगा आदि। हमारा दिमाग लगातार इन अनिश्चितताओं से जूझता रहता है। ऐसे में जब हम कोई ऐसा शो देखते हैं जिसकी कहानी, किरदार और अंत हमें पहले से पता है, तो दिमाग को एक ऐसी चीज मिलती है, जो तय है। यानी कि क्या होगा और क्या नहीं होगा, हमें पता होता है। इसलिए लोग एक शो को बार-बार देखते हैं।”
जब व्यक्ति देखे हुए शो को बार-बार देखता है, तो उसके दिमाग को सोचने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है। साथ ही वह अचानक मिलने वाले स्ट्रेस और सरप्राइज से भी बच जाता है। साइकोलॉजिस्ट बताती हैं कि
“दिमाग जानता है कि अगले सीन में क्या होने वाला है और यही बात उसे आराम देती है। यही कारण है कि बहुत से लोग अपने पसंदीदा शो को लाइफ के कठिन समय में ज्यादा देखते हैं। जैसे ब्रेकअप के बाद, नौकरी का तनाव होने पर, किसी बड़े बदलाव के दौरान या जब जीवन कुछ ज्यादा ही भारी लगने लगे तब। वे शायद शो नहीं देख रहे होते, बल्कि उस परिचित एहसास को ढूंढ रहे होते हैं जो उन्हें कुछ देर के लिए सुरक्षित महसूस कराता है।”
एक और दिलचस्प बात यह है कि कई बार लोग कहानी से ज्यादा उससे जुड़ी यादों की तरफ लौट रहे होते हैं। मान लीजिए किसी ने कॉलेज के दिनों में कोई शो देखा था। वह दौर दोस्तों, आजादी और कम जिम्मेदारियों से भरा हुआ था। सालों बाद जब वह व्यक्ति वही शो फिर से देखता है, तो सिर्फ कहानी नहीं लौटती, बल्कि उस समय से जुड़ी भावनाएं भी लौट आती हैं। एक गाना, एक डायलॉग या एक किरदार कभी-कभी सीधे उन दिनों तक पहुंचा देता है जिन्हें व्यक्ति मिस करता है। इसीलिए कुछ शो लोगों के लिए मनोरंजन नहीं, भावनात्मक सहारा बन जाते हैं।”
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार “लोग अक्सर अपने फेवरेट शो को बार-बार इसलिए देखते हैं क्योंकि वे उनसे जुड़ी पुरानी यादों को फिर से महसूस करना चाहते हैं। रिसर्च बताती है कि पुराने टीवी शोज और फिल्मों को दोबारा देखने से नॉस्टैल्जिया जागता है और लोगों को भावनात्मक सुकून मिलता है।”
साइकोलॉजिस्ट बताती हैं कि “इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति जो एक ही शो बार-बार देखता है, वह स्ट्रेस में है। कई लोग इसलिए भी ऐसा करते हैं क्योंकि उन्हें कुछ किरदार अपने जैसे लगते हैं। कुछ लोगों को उस शो की दुनिया सुकून देती है। कुछ लोगों को उससे मिलने वाली खुशी पसंद होती है। और कुछ लोग बस इसलिए लौटते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि वह शो उन्हें निराश नहीं करेगा।
डॉक्टर मालिनी सबा कहती हैं कि “इंसान सिर्फ नई चीजों की तलाश में नहीं जीता। वह ऐसी जगहों, लोगों और अनुभवों की भी तलाश करता है जहां उसे सहज महसूस हो। कभी यह जगह कोई पुराना दोस्त होता है, कभी बचपन का घर और कभी एक टीवी शो।”
डिस्क्लेमर: अगर आप या आपका कोई परिचित एक ही शो बार-बार देखता है, तो जरूरी नहीं कि वह समय बर्बाद कर रहा हो। हो सकता है कि वह अपने दिमाग को थोड़ी राहत दे रहा हो। एक ऐसी दुनिया में जहां सब कुछ तेजी से बदल रहा है, कभी-कभी लोग उसी कहानी में लौटना पसंद करते हैं जहां उन्हें पहले से पता होता है कि आखिर में सब ठीक हो जाएगा।