लोग खुद से बातें क्यों करने लगते हैं? क्या होते हैं इसके प्रमुख कारण

Khud se Baat Kyu Karte hain Log: आपने अक्सर लोगों को खुद से बात करते हुए देखा होगा। किसी को खुद से बात करते हुए देखकर लोग अक्सर परेशान हो जाते हैं, लेकिन इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार होते हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में

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Written By: Dr. Astik Joshi | Published : February 24, 2026 2:50 PM IST

Why Do People Talk to Themselves Impacts of Self-Talk :  अक्सर आपने देखा होगा कि कुछ लोग चलते-फिरते, काम करते हुए या अकेले बैठे-बैठे खुद से बातें करते रहते हैं। कई बार यह आदत हमें अजीब या असामान्य लग सकती है, लेकिन मनोविज्ञान के अनुसार खुद से बात करना हमेशा मानसिक बीमारी का संकेत नहीं होता। वास्तव में, यह मानव मस्तिष्क की एक स्वाभाविक और उपयोगी प्रक्रिया भी हो सकती है। मेडिल साइंस के नजरिए से देखा जाए तो खुद से बात करना (Self-talk) हमारी मानसिक संरचना, भावनात्मक संतुलन और निर्णय क्षमता से गहराई से जुड़ा होता है।

खुद से बातें करना क्या है?

खुद से बात करना एक मानसिक प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति अपने विचारों को शब्दों के रूप में व्यक्त करता है। यह दो प्रकार का हो सकता हैः

  • आंतरिक- किसी बात को मन ही मन सोचना और उसके बारे में राय बना लेना
  • बाहरी- किसी बात को ऐसे बोलकर सोचना और अपनी प्रतिक्रिया को तैयार करना

दोनों ही प्रकार दिमाग के कार्य करने का तरीका है। यह बात बिल्कुल ही सामान्य है, ऐसे में व्यक्ति के आसपास के लोगों को ज्यादा घबराने और डरने की जरूरत नहीं है।

खुद से बात करने के प्रमुख कारण

  1. सोच को व्यवस्थित करना- जब व्यक्ति खुद से बात करता है, तो वह अपने विचारों को व्यवस्थित करता है। यह प्रक्रिया दिमाग को फैसला लेने के लिए तैयार करती है। खुद से बात करके चीजों की प्लानिंग और राय तैयार करना पढ़ाई या योजना बनाते समय, किसी समस्या का समाधान ढूंढते समय काम आती है। डॉक्टरी भाषा में, यह संज्ञानात्मक प्रसंस्करण (Cognitive Processing) को बेहतर बनाता है।
  2. चिंता को कम करने का तरीका- अक्सर देखा जाता है कि जो लोग खुद से बात करते हैं, वो पहले से ही किसी तनावपूर्ण परिस्थिति में फंसे हुए होते हैं। तनावपूर्ण परिस्थितियों में लोग खुद से बात करके अपने मन को शांत करते हैं। सब ठीक हो जाएगा, मैं यह कर सकता हूं इस तरह के वाक्य को दोहराना दिमाग को शांति मिलती है। इस तरह की प्रक्रिया शरीर में तनाव हार्मोन को कम करने में मदद कर सकता है।
  3. इमोशन पर कंट्रोल- भावनात्मक दबाव या दुख की स्थिति में खुद से बात करना मन की सफाई (Emotional release) जैसा कार्य करता है। यह प्रक्रिया मानसिक संतुलन बनाए रखने की स्वाभाविक प्रक्रिया है।
  4. अकेलापन निपटाने का तरीका- जो लोग लंबे समय तक अकेले रहते हैं, वो अपना अकेलापन दूर करने के लिए भी खुज से बात करते हैं। ऐसे लोगों को खुद से बात करके मानसिक तौर पर अच्छा महसूस होता है।
  5. याद रखने की क्षमता बढ़ाना- खुद से बोलकर काम करने से याद रखने की क्षमता बढ़ती है। यह तकनीक बच्चों और बुजुर्गों दोनों में उपयोगी पाई गई है। जो बच्चे पढ़ाई करते हैं उन्हें चीजों को खुद से बार-बार दोहराने की सलाह दी जाती है, ताकि वो हर चीज को बिना किसी परेशानी के याद कर सकें।

Talking To Yourself Isn’t Weird—Psychology Links It To Intelligence And Emotional Strength

खुद से बात करना सामान्य है?

  • हां, यदि यह कभी-कभी होता है
  • तनाव या सोच के दौरान होता है
  • व्यक्ति वास्तविकता से जुड़ा रहता है

खुद से बात करना कब चिंता का विषय है?

10 में से 7 लोगों में खुद से बात करना बिल्कुल सामान्य बात होती है। लेकिन अगर व्यक्ति को बार-बार यह हो रहा है, तो कुछ खास परिस्थितियों में यह चिंता का विषय हो सकता है।

काल्पनिक आवाजों से बात हो- अगर कोई व्यक्ति काल्पनिक आवाजों से बात करता हो भ्रम (Hallucinations) अनुभव करता हो, वास्तविकता से कटाव महसूस करता हो, सामाजिक व्यवहार में गंभीर बदलाव हो, तो यह गंभीर चिंता की स्थिति हो सकती है। काल्पनिक आवाजों से बात करने वाले व्यत्ति को सिजोफ्रेनिया, गंभीर अवसाद और बाइपोलर डिसऑर्डर की समस्या हो सकती है।

सकारात्मक और नकारात्मक Self-talk में अंतर

S. NOप्रकारप्रभाव
1.सकारात्मक self-talkआत्मविश्वास बढ़ाता है
2प्रेरणात्मक self-talkकाम और रोजमर्रा की लाइफ में प्रदर्शन को बेहतर करता है
3.नकारात्मक self-talkतनाव और चिंता बढ़ाता है
4.आत्म-आलोचनात्मकआत्मसम्मान कम करता है

आपका खुद से बात करना बिल्कुल सामान्य है, लेकिन खुद से बात करते समय आफको सकारात्मक और नकारात्मक सेल्फ-टॉक में अंतर पहचानना जरूरी होगा।

क्या खुद से बात करना रोकना चाहिए?

यदि यह सामान्य self-talk है, तो इसे रोकने की आवश्यकता नहीं है। बल्कि इसे सकारात्मक दिशा देना अधिक उपयोगी है।

सकारात्मक self-talk विकसित करने के तरीके

  1. खुद से प्रेरणादायक बातें करें
  2. नकारात्मक विचारों को दूर करने की कोशिश करें
  3. समस्या से ज्यादा समस्या के समाधान पर फोकस करें।
  4. सामाजिक संपर्क बनाए रखें। खुद के बात करने के साथ-साथ दोस्तों से भी बात करें।