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लोग नया रिश्ता बनाने से पहले उसे तोड़ने की बात क्यों करते हैं? साइकोलॉजिस्ट से जानें कारण

कोई रिश्ता शुरू करने से पहले उसे खत्म करने की बात करना अजीब लग सकता है। लेकिन मन में ऐसे ख्याल आना, क्या उस व्यक्ति के अंदर की नेगेटीविटी को दिखाता है या फिर कोई और कारण है? आइए साइकोलॉजिस्ट से जानें।

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Written By: Vidya Sharma | Published : June 23, 2026 2:29 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Malini Saba

"अगर चीजें ठीक नहीं रहीं तो हम अलग हो जाएंगे।", "देखते हैं कितना चलता है।", "मुझे रिश्तों पर ज्यादा भरोसा नहीं है।" आपने भी अपने रिश्ते में कई बार ऐसा बोला होगा, या पार्टनर से सुना होगा। दिलचस्प बात यह है कि कई लोग रिश्ते की शुरुआत में ही उसे खत्म करने की शुरुआत कर देते हैं। अगर आप किसी ऐसे पर्सन को देखें तो शुरु में यह नकारात्मक सोच लग सकती है, लेकिन इसके पीछे कई गहरे भावनात्मक और मानसिक कारण हो सकते हैं।

साइकोलॉजिस्ट और महिला एवं मानवाधिकारों की समर्थक डॉक्टर मालिनी सबा केअनुसार, ऐसा व्यवहार हमेशा रिश्ते में रुचि की कमी का संकेत नहीं होता। बल्कि कई बार यह व्यक्ति के पुराने एक्सपीयरेंस, इनसैक्योरिटी और इमोशनल सेफ्टी से भी जुड़ा हो सकता है। कैसे? आइए साइकोलॉजिस्ट से इस विषय पर थोड़ा विस्तार से बात करते हैं। ताकि अगर आपका कोई नया रिश्ता टूटने को है, या पार्टनर रिश्ता खत्म करने की सोच रहा है तो आप उसकी परिस्थिति को समझ पाएं।

पहले दिल टूटने का अनुभव

साइकोलॉजिस्ट बताती हैं कि “जिन लोगों ने पहले किसी रिश्ते में धोखा, रिजेक्शन या इमोशनली हर्ट हुए होंगे। किया होता है, वे नए रिश्ते में पूरी तरह खुलने से डर सकते हैं। ऐसे लोग अक्सर खुद को भावनात्मक रूप से बचाने के लिए पहले ही कह देते हैं कि रिश्ता कभी भी खत्म हो सकता है। यह उनके लिए एक तरह का सिक्योरिटी कवर होता है।”

असफलता के डर से पहले ही दूरी बनाना

कुछ लोग रिश्ते में इंवेस्ट करने से पहले ही उसके खत्म होने या न चल पाने के बारे में अधिक सोचने लगते हैं। डॉक्टर बताती हैं कि उन्हें लगता है कि अगर वे शुरुआत से ही उम्मीदें कम रखेंगे, तो भविष्य में दर्द भी कम होगा। साइकोलॉजी में इसे कभी-कभी डिफेंसिव पैसिमिस्म कहा जाता है, जहां व्यक्ति खुद को निराशा से बचाने के लिए पहले से नकारात्मक संभावनाओं पर ध्यान देता है।

कमिटमेंट का डर

कोई भी नया रिश्ता गहरा होते ही जिम्मेदारियों, भावनात्मक जुड़ाव और भविष्य की अपेक्षाओं से जुड़ जाता है। कुछ लोगों को अपने पार्टनर को कमिटमेंट देना डरावना लग सकता है। इसलिए वे रिश्ते को पूरी तरह स्वीकार करने के बजाय उसके खत्म होने की संभावना पर बात करके खुद को मेंटली सेफ फील करवाते हैं।

खुद को भावनात्मक रूप से कमजोर दिखाने का डर

किसी के करीब आना अपने आप में एक जोखिम है। इसमें व्यक्ति को अपनी भावनाएं, कमजोरियां और असुरक्षाएं साझा करनी पड़ती हैं। कुछ लोग इससे असहज महसूस करते हैं। इसलिए वे भावनात्मक दूरी बनाए रखने के लिए रिश्ते के अंत की बात करते रहते हैं।

सोशल मीडिया और आधुनिक डेटिंग कल्चर का प्रभाव

आज के समय में रिश्तों को लेकर विकल्पों की संख्या पहले से कहीं अधिक दिखाई देती है। डेटिंग ऐप्स और सोशल मीडिया ने कई लोगों में यह धारणा पैदा कर दी है कि अगर एक रिश्ता नहीं चला, तो दूसरा आसानी से मिल जाएगा। इसी वजह से कुछ लोग रिश्तों को लंबे समय तक चलाने के विचार के बजाय टैम्पररी एक्सपीरिएंस की तरह देखने लगते हैं।

आत्मविश्वास और आत्म-मूल्य की कमी

कभी-कभी व्यक्ति को यह विश्वास ही नहीं होता कि कोई उसके साथ लंबे समय तक रहना चाहेगा। ऐसे में वह पहले से ही रिश्ते के टूटने की बात करता है क्योंकि अंदर ही अंदर उसे रिजेक्ट हो जाने का डर होता है।

क्या यह हमेशा चिंता की बात है?

डॉक्टर इस सवाल का जवाब देते हुए कहती हैं कि जरूरी नहीं, कुछ लोग सिर्फ प्रेक्टिल अप्रोच से भी रिश्तों की रियरलिटी पर बात करते हैं। लेकिन अगर कोई व्यक्ति लगातार रिश्ते के अंत, फेल होने या अलग होने की बात करता है, तो यह उसके भीतर मौजूद किसी अनसुलझे डर, असुरक्षा या पिछले भावनात्मक अनुभव का संकेत हो सकता है।

ऐसे में क्या करें?

अगर आपका पार्टनर बार-बार रिश्ते के टूटने की बात करता है, तो तुरंत निष्कर्ष निकालने के बजाय उसके पीछे की भावनाओं को समझने की कोशिश करें, खुलकर और बिना निर्णय किए बातचीत करें, उसके डर और चिंताओं को सुनें, भरोसा बनाने के लिए समय दें, रिश्ते को लेकर अपनी एक्सपेक्टेशन क्लियर रखें और जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग की मदद लें।

डिस्क्लेमर: नया रिश्ता शुरू करते समय उसके अंत की बात करना हमेशा प्यार की कमी का संकेत नहीं होता। कई बार यह व्यक्ति के पुराने घावों, इनसैक्योरिटी, कमिटमेंट के डर या भावनात्मक सुरक्षा की जरूरत को दर्शाता है। रिश्ते तभी मजबूत बनते हैं जब दोनों लोग केवल भविष्य की संभावित समस्याओं पर नहीं, बल्कि वर्तमान में भरोसा और समझ विकसित करने पर भी ध्यान दें।