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बच्चेदानी में गांठ क्यों होती है? स्त्री रोग विशेषज्ञ बता रही हैं इसके कारण और इलाज

गलत लाइफस्टाइल, खानपान और कई अन्य कारणों से महिलाओं की बच्चेदानी में गांठ के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं इसके कारण और इससे जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में।

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Written By: Ashu Kumar Das | Published : July 20, 2026 1:28 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Nikita Trehan

महिलाओं को कई तरह की परेशानियां होती हैं, जिसका जिक्र तक नहीं होता है। इन्हीं में से एक है बच्चेदानी में गांठ होना। लेकिन ब्चचेदानी का नाम सुनते ही अक्सर डर लगने लगता है। कई महिलाएं इसे कैंसर समझ बैठती हैं, जबकि ज्यादातर मामलों में ये गैर-कैंसरकारी (Benign) होती हैं। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिपोर्ट बताती है कि भारत में 30 से 50 साल की उम्र के बीच महिलाओं में बच्चेदानी में गांठ होने की संभावना ज्यादा रहती है। आज इस लेख में हम आपको बताने जा रहे हैं बच्चेदानी में गांठ क्यों होती है? महिलाओं को इस परेशानी होने के कारण क्या हैं और इससे बचाव के लिए क्या करना चाहिए?

बच्चेदानी की गांठ पर क्या कहती है रिसर्च?

अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट (ACOG)और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के अनुसार, प्रजनन आयु की लगभग 70 से 80% महिलाओं में जीवन के किसी न किसी चरण में बच्चेदानी की गांठ विकसित होना एक आम समस्या है।

क्या होती है बच्चेदानी की गांठ?

रिसर्च बताती है कि महिलाओं को बच्चेदानी की गांठ यानि की गर्भाशय की मांसपेशियों की असामान्य वृद्धि होती है। यह छोटी-छोटी गांठों के रूप में विकसित हो सकती हैं और कुछ मामलों में इनका आकार काफी बड़ा भी हो सकता है। किसी महिला में एक गांठ हो सकती है, तो किसी में कई गांठें एक साथ मौजूद हो सकती हैं। दिल्ली के सनराइज अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. निकिता त्रेहन कहती हैं कि बच्चेदानी की गांठ की दिलचस्प बात यह है कि कई बार इनका कोई लक्षण नहीं होता और महिला को इसका पता सिर्फ अल्ट्रासाउंड जांच के दौरान चलता है।

डॉ. निकिता त्रेहन के अनुसार, बच्चेदानी की गांठ का सबसे बड़ा कारण हार्मोनल बदलाव माना जाता है। विशेष रूप से एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन इन गांठों की वृद्धि को प्रभावित करते हैं। जिन महिलाओं में ये हार्मोन ज्यादा एक्टिव होते हैं तब गांठ बनने की संभावना ज्यादा होती है। यह समस्या अक्सर धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआती चरण में महिलाओं को इसका एहसास भी नहीं होता। इसलिए अनियमित पीरियड्स या पीरियड्स के दौरान होने वाली हैवी ब्लीडिंग को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

प्रेग्नेंसी कंसीव होने में देरी के कारण भी बच्चेदानी की गांठ के मामले बढ़ रहे हैं। प्रेग्नेंसी कंसीव होने में देरी के कारण भी बच्चेदानी की गांठ के मामले बढ़ रहे हैं।

बच्चेदानी में गांठ होने के प्रमुख कारण क्या हैं?

  1. हार्मोनल बदलाव- रिसर्च बताती है कि बच्चेदानी की गांठ होने का सबसे बड़ा कारण है किसी भी महिला के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का असंतुलन होना। ये दोनों हार्मोन गर्भाशय की परत को कंट्रोल करते हैं। जब इनका स्तर लंबे समय तक ज्यादा रहता है, तो गर्भाशय की मांसपेशियां तेजी से बढ़ने लगती हैं और गांठ बनने की संभावना बढ़ जाती है।
  2. जेनेटिक कारण- डॉक्टर बताती हैं कि यदि मां, बहन या परिवार की किसी अन्य महिला को फाइ रहा है, तो अन्य महिलाओं में भी इसका खतरा बढ़ जाता है। शोध बताते हैं कि कुछ विशेष जीन परिवर्तन फाइब्रॉइड बनने में भूमिका निभाते हैं।
  3. मोटापा- डिलीवरी, हार्मोनल बदलावों के कारण बढ़ने वाला वजन भी बच्चेदानी में गांठ का कारण बन सकता है। डॉक्टर बताते हैं कि शरीर में अतिरिक्त चर्बी एस्ट्रोजन का उत्पादन बढ़ाती है, जिससे फाइब्रॉइड के विकास को बढ़ावा मिल सकता है। नियमित व्यायाम और संतुलित आहार इस खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं।
  4. प्रेग्नेंसी कंसीव करने में देरी- जो महिलाएं पहली बार प्रेग्नेंसी की प्लानिंग करने में देरी करती हैं, उनमें भी बच्चेदानी की गांठ की समस्या देखी जाती है।

महिलाओं को किन लक्षणों पर करना चाहिए गौर?

  1. पीरियड्स के दौरान हैवी ब्लीडिंग होना
  2. पीरियड्स का लंबे समय तक चलना
  3. पेट या पेल्विक क्षेत्र में भारीपन रहना
  4. बार-बार पेशाब आना
  5. बिना कारण कब्ज की शिकायत
  6. कमर या पैरों में दर्द रहना
  7. सबकुछ सही होते हुए भी प्रेग्नेंसी कंसीव में देरी

डॉ. निकिता त्रेहन के अनुसार, "हर फाइब्रॉइड का इलाज जरूरी नहीं होता। यदि गांठ छोटी है और कोई लक्षण नहीं है, तो केवल डॉक्टर की निगरानी से बच्चेदानी की गांठ सही हो सकती है। लेकिन किसी महिला को पीरियड्स के दौरान होने वाली ब्लीडिंग बहुत ज्यादा है, दर्द हो या प्रेग्नेंसी कंसीव करने में परेशानी आ रही है, उन्हें लंबे इलाज, सर्जरी और दवाओं की जरूरत पड़ सकती है।"

बच्चेदानी की गांठ कैंसर का कारण नहीं बनती है। बच्चेदानी की गांठ कैंसर का कारण नहीं बनती है।

क्या बच्चेदानी की गांठ कैंसर बन सकती है?

इस सवाल का जवाब देते हुए डॉक्टर कहती हैं कि यह सवाल लगभग हर महिला के मन में आता है। बच्चेदानी में होने वाली गांठ का कैंसर में तब्दील होना काफी मुश्किल काम है। गर्भाशय का कैंसर और फाइब्रॉइड दो अलग-अलग स्थितियां हैं। अगर फिर भी बच्चेदानी की गांठ तेजी से बढ़ रही हो या मेनोपॉज के बाद भी उसका आकार बढ़ता रहे, तो डॉक्टर कैंसर की जांच करवाने की सलाह दे सकते हैं।

बच्चेदानी की गांठ का इलाज क्या है?

किसी भी महिला के बच्चेदानी में गांठ का इलाज इसके आकार, गांठों की संख्या, महिला के लक्षण पर निर्भर करता है। बच्चेानी की गांठ के इलाज में मुख्य रूप से शामिल हैः

    1. हार्मोन कंट्रोल करने वाली दवाएं, ताकि गांठ को बनने से रोका जा सके।
    2. पीरियड्स के दौरान दर्द और ब्लीडिंग को कम करने वाली दवाएं।
    3. मायोमेक्टॉमी अगर किसी महिला की गांठ बड़ी है तो उसे यह सलाह दी जाती है।
    4. यूटराइन आर्टरी एम्बोलाइजेशन

क्या बच्चेदानी की गांठ को बनने से रोका जा सकता है?

नहीं, किसी भी महिला की बच्चेदानी में बनने वाली गांठ को बनने से पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता है। लेकिन रोजमर्रा में छोटे- छोटे बदलाव करके इसे कंट्रोल जरूर किया जा सकता है।

      1. महिलाएं वजन को कंट्रोल में रखें
      2. रोजाना 15 मिनट एक्सरसाइज करें
      3. हरी सब्जियां और फल ज्यादा खाएं
      4. अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन न करें।

बच्चेदानी या किसी के किसी अंग में गांठ न बनें या कोई अन्य समस्या न हो इसके लिए महिलाओं को साल में 1 बार स्त्री रोग विशेषज्ञ से बात करनी चाहिए।

Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। अगर आपको या आपके परिवार में किसी महिला को बच्चेदानी में गांठ की समस्या है तो इस बारे में डॉक्टर से बात करें।