
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Medically Verified By: Dr. Nikita Trehan
बच्चेदानी की गांठ महिलाओं को होने वाली गंभीर समस्या है। (File Photo)
महिलाओं को कई तरह की परेशानियां होती हैं, जिसका जिक्र तक नहीं होता है। इन्हीं में से एक है बच्चेदानी में गांठ होना। लेकिन ब्चचेदानी का नाम सुनते ही अक्सर डर लगने लगता है। कई महिलाएं इसे कैंसर समझ बैठती हैं, जबकि ज्यादातर मामलों में ये गैर-कैंसरकारी (Benign) होती हैं। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिपोर्ट बताती है कि भारत में 30 से 50 साल की उम्र के बीच महिलाओं में बच्चेदानी में गांठ होने की संभावना ज्यादा रहती है। आज इस लेख में हम आपको बताने जा रहे हैं बच्चेदानी में गांठ क्यों होती है? महिलाओं को इस परेशानी होने के कारण क्या हैं और इससे बचाव के लिए क्या करना चाहिए?
अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट (ACOG)और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के अनुसार, प्रजनन आयु की लगभग 70 से 80% महिलाओं में जीवन के किसी न किसी चरण में बच्चेदानी की गांठ विकसित होना एक आम समस्या है।
रिसर्च बताती है कि महिलाओं को बच्चेदानी की गांठ यानि की गर्भाशय की मांसपेशियों की असामान्य वृद्धि होती है। यह छोटी-छोटी गांठों के रूप में विकसित हो सकती हैं और कुछ मामलों में इनका आकार काफी बड़ा भी हो सकता है। किसी महिला में एक गांठ हो सकती है, तो किसी में कई गांठें एक साथ मौजूद हो सकती हैं। दिल्ली के सनराइज अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. निकिता त्रेहन कहती हैं कि बच्चेदानी की गांठ की दिलचस्प बात यह है कि कई बार इनका कोई लक्षण नहीं होता और महिला को इसका पता सिर्फ अल्ट्रासाउंड जांच के दौरान चलता है।
डॉ. निकिता त्रेहन के अनुसार, बच्चेदानी की गांठ का सबसे बड़ा कारण हार्मोनल बदलाव माना जाता है। विशेष रूप से एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन इन गांठों की वृद्धि को प्रभावित करते हैं। जिन महिलाओं में ये हार्मोन ज्यादा एक्टिव होते हैं तब गांठ बनने की संभावना ज्यादा होती है। यह समस्या अक्सर धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआती चरण में महिलाओं को इसका एहसास भी नहीं होता। इसलिए अनियमित पीरियड्स या पीरियड्स के दौरान होने वाली हैवी ब्लीडिंग को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
प्रेग्नेंसी कंसीव होने में देरी के कारण भी बच्चेदानी की गांठ के मामले बढ़ रहे हैं।
डॉ. निकिता त्रेहन के अनुसार, "हर फाइब्रॉइड का इलाज जरूरी नहीं होता। यदि गांठ छोटी है और कोई लक्षण नहीं है, तो केवल डॉक्टर की निगरानी से बच्चेदानी की गांठ सही हो सकती है। लेकिन किसी महिला को पीरियड्स के दौरान होने वाली ब्लीडिंग बहुत ज्यादा है, दर्द हो या प्रेग्नेंसी कंसीव करने में परेशानी आ रही है, उन्हें लंबे इलाज, सर्जरी और दवाओं की जरूरत पड़ सकती है।"
बच्चेदानी की गांठ कैंसर का कारण नहीं बनती है।
इस सवाल का जवाब देते हुए डॉक्टर कहती हैं कि यह सवाल लगभग हर महिला के मन में आता है। बच्चेदानी में होने वाली गांठ का कैंसर में तब्दील होना काफी मुश्किल काम है। गर्भाशय का कैंसर और फाइब्रॉइड दो अलग-अलग स्थितियां हैं। अगर फिर भी बच्चेदानी की गांठ तेजी से बढ़ रही हो या मेनोपॉज के बाद भी उसका आकार बढ़ता रहे, तो डॉक्टर कैंसर की जांच करवाने की सलाह दे सकते हैं।
किसी भी महिला के बच्चेदानी में गांठ का इलाज इसके आकार, गांठों की संख्या, महिला के लक्षण पर निर्भर करता है। बच्चेानी की गांठ के इलाज में मुख्य रूप से शामिल हैः
नहीं, किसी भी महिला की बच्चेदानी में बनने वाली गांठ को बनने से पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता है। लेकिन रोजमर्रा में छोटे- छोटे बदलाव करके इसे कंट्रोल जरूर किया जा सकता है।
बच्चेदानी या किसी के किसी अंग में गांठ न बनें या कोई अन्य समस्या न हो इसके लिए महिलाओं को साल में 1 बार स्त्री रोग विशेषज्ञ से बात करनी चाहिए।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। अगर आपको या आपके परिवार में किसी महिला को बच्चेदानी में गांठ की समस्या है तो इस बारे में डॉक्टर से बात करें।