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पित्त की थैली में पथरी क्यों होती है? डॉक्टर बता रहे हैं कारण, लक्षण, इलाज और बचाव के तरीके

भारत में युवाओं के बीच पित्त की थैली की पथरी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पित्त की थैली में बनने वाली पथरी कई बार इतनी दर्दनाक होती है कि आपको सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक तौर पर भी परेशान कर देती है। आइए जानते हैं किसी व्यक्ति को पित्त की थैली में पथरी क्यों होती है और इसके कारण क्या हैं?

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Written By: Ashu Kumar Das | Published : July 18, 2026 8:01 AM IST

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Medically Verified By: Dr Prashant Sinha

पिछले 1 दशक में युवाओं में पथरी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इन्हीं में से एक होती है पित्त की थैली में होने वाली पथरी। पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में लीवर के नीचे एक छोटी-सी थैली होती है, जिसे पित्त की थैली (Gallbladder) कहा जाता है। इसका काम लीवर में बनने वाले पित्त को जमा करके रखना और खाना, खासकर फैट को पचाने में मदद करती है। जब पित्त में मौजूद कोलेस्ट्रॉल, बिलीरुबिन या अन्य पदार्थों का संतुलन बिगड़ जाता है, तो वे धीरे-धीरे ठोस दानों का रूप ले लेते हैं। समय के साथ यही कण पथरी बन जाते हैं। कुछ लोगों में ये पथरी रेत के दाने जितनी छोटी होती है, जबकि कुछ में यह बॉल जितनी बड़ी भी हो सकती है।

दिलचस्प बात यह है कि कई लोगों को सालों तक पता ही नहीं चलता कि उनकी पित्त की थैली में पथरी है। लेकिन जब यह पथरी पित्त नली में फंस जाती है, तब तेज दर्द शुरू होने लगता है। यूं तो पित्त की थैली की पथरी कोई गंभीर समस्या नहीं है, लेकिन यह हो सकता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं पित्त की थैली में पथरी क्यों होती है? और इससे बचाव के लिए हमें क्या करना चाहिए।

पित्त की थैली में पथरी क्यों होती है?

दिल्ली के PSRI हॉस्पिटल के लैप्रोस्कोपिक, G.I और रोबोटिक सर्जन प्रशांत कुमार का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को एक दिन या कुछ घंटों में पित्त की थैली की पथरी नहीं बनती हैं। किसी भी पथरी बनने के पीछे कोई एक कारण नहीं होता हैं। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैः

पित्त की थैली में होने वाली पथरी दर्दनाक होती है। पित्त की थैली में होने वाली पथरी दर्दनाक होती है।

1. कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना

पित्त में जब कोलेस्ट्रॉल जरूरत से ज्यादा हो जाता है और वह पूरी तरह घुल नहीं पाता, तो धीरे-धीरे क्रिस्टल बनते हैं और बाद में पथरी का रूप ले लेते हैं।

2. बिलीरुबिन का बढ़ जाना

रेड ब्लड सेल्स के टूटने पर बनने वाला पदार्थ बिलीरुबिन अगर ज्यादा बनने लगे, तो इससे भी पिगमेंट स्टोन बनने का खतरा सामान्य की तुलना में ज्यादा होने लगता है।

3. पित्त की थैली का ठीक से खाली न होना

पेशाब के दौरान अगर किसी व्यक्ति गॉलब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं होता है। तो इससे पित्त गाढ़ा होने लगता है और उसमें मौजूद पदार्थ पित्त की थैली में पथरी बनाने लगते हैं।

4. जेनेटिक कारण

डॉक्टर बताते हैं कि किसी व्यक्ति के माता- पिता को पित्त की थैली में पथरी की समस्या रही है तो उन्हें भी यह समस्या हो सकती है। जेनेटिक कारणों से भी पित्त की थैली की समस्या होना आम बात है।

5. मोटापा

जिन लोगों के शरीर का वजन ज्यादा है, उनमें कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी ज्यादा होता है। ज्यादा कोलेस्ट्रॉल भी स्टोन बनाने का खतरा बढ़ाता है।

6. हार्मोनल बदलाव

40 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन का प्रभाव, प्रेग्नेंसी और कुछ हार्मोनल दवाएं भी पित्त की थैली में पथरी का खतरा बढ़ाते हैं।

किन लोगों को है पित्त की थैली में पथरी का खतरा?

डॉ. प्रशांत कुमार बताते हैं कि जिस तरह की लाइफस्टाइल हम लोग रह रहे हैं उस स्थिति में हर व्यक्ति को पित्त की थैली में पथरी होने का खतरा है। लेकिन कुछ खास लोगों को इस परेशानी का खतरा ज्यादा होता है। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैंः

  1. महिलाएं
  2. 40 साल से अधिक उम्र के लोग
  3. मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति
  4. डायबिटीज के मरीज
  5. प्रेग्नेंट महिलाएं
  6. फैटी डाइट लेने वाले लोग

पित्त की पथरी के लक्षण

कई मरीजों में कोई लक्षण नहीं होते, लेकिन जब पथरी समस्या पैदा करती है तो ये संकेत दिखाई दे सकते हैं-

  1. पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में अचानक तेज दर्द
  2. दर्द का पीठ या दाहिने कंधे तक दर्द होना
  3. मतली और उल्टी
  4. गैस और अपच
  5. ज्यादा तेल वाला खाना खाने के बाद दर्द होना
  6. संक्रमण के कारण तेज बुखार हो जाना
  7. आंखों और त्वचा का पीला पड़ना

क्या हर पथरी का ऑपरेशन जरूरी होता है?

नहीं, अगर पथरी है लेकिन कोई लक्षण नहीं हैं, तो कई मामलों में डॉक्टर केवल निगरानी की सलाह देते हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति को पित्त की थैली में पथरी होने पर बार-बार दर्द हो, संक्रमण हो या पथरी पित्त नली को ब्लॉक कर रही हो, तो सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। डॉ. प्रशांत कुमार के अनुसार, जिन मरीजों में पित्त की पथरी के कारण बार-बार दर्द, संक्रमण या पित्त नली में रुकावट की समस्या होती है, उनमें समय पर इलाज और जरूरत पड़ने पर लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की जा सकती है।

पित्त की थैली में पथरी पर क्या कहती है रिसर्च

World Gastroenterology Organisation (WGO) Global Guidelines के अनुसार, विकसित देशों में लगभग 10 - 20% वयस्कों में गॉलस्टोन्स पाए जाते हैं। हालांकि, सभी मरीजों में लक्षण विकसित नहीं होते हैं। ज्यादातर मामलों में इलाज की जरूरत तभी होती है जब पथरी दर्द या कोई अन्य परेशानी होने लगे।

पित्त की थैली की पथरी का इलाज न करवाएं तो क्या होगा?

डॉ. प्रशांत कुमार कहते हैं कि समय पर इलाज न होने पर कुछ मरीजों में गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं-

  1. गाल ब्लैडर में सूजन (Cholecystitis)
  2. पित्त नली में रुकावट
  3. पीलिया
  4. अग्न्याशय में सूजन (Pancreatitis)

इसलिए किसी भी परिस्थिति में पित्त की थैली में पथरी बनने पर इसका इलाज जरूर करवाएं। पित्त की थैली की पथरी का इलाज हमेशा पूरा करवाएं, इलाज को किसी कारण बीच में अधूरा न छोड़ें।

पित्त की पथरी की जांच कैसे होती है?

डॉक्टर मरीज के लक्षणों के आधार पर निम्न जांच कराने की सलाह दे सकते हैं-

  1. अल्ट्रासाउंड
  2. लिवर फंक्शन टेस्ट
  3. सीटी स्कैन
  4. एमआरसीपी (MRCP)
  5. एंडोस्कोपिक जांच (ERCP)

पित्त की थैली की पथरी का इलाज कैसे होता है?

इस सवाल का जवाब देते हुए डॉक्टर कहते हैं कि पित्त की थैली में बनने वाली पथरी का इलाज हर मरीज के हिसाब से अलग होता है। इसमें मुख्य रूप से शामिल की जाती हैः

  1. बिना लक्षण वाली पथरी में निगरानी की जाती है।
  2. शुरुआत में पथरी के दर्द को कंट्रोल करने के लिए विभिन्न प्रकार की दवा दी जाती है।
  3. पथरी होने के बाद किसी प्रकार का संक्रमण है को उस हिसाब से इलाज होता है।
  4. लेप्रोस्कोपिक गॉलब्लैडर सर्जरी (Laparoscopic Cholecystectomy)

आज के समय में पित्त की थैली की पथरी का सबसे अच्छा इलाज लेप्रोस्कोपिक सर्जरी माना जाता है। डॉ. प्रशांत कहते हैं कि लैप्रोस्कोपिक गॉलब्लैडर सर्जरी के जरिए पित्त की थैली में एक छोटा सा चीला लगाया जाता है। इस सर्जरी के बाद पित्त की थैली की पथरी आसानी से ठीक जाती है।

कैसे पहचानें पित्त की थैली में पथरी है या नहीं

डॉक्टर का कहना है कि किसी व्यक्ति को खाने के बाद बार-बार दाहिने ऊपरी पेट में दर्द होता है, दर्द कंधे तक जाता है या साथ में बुखार और उल्टी जैसी शिकायतें हों, तो इन्हें सामान्य गैस या अपच समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जिन लोगों को अक्सर खाना खाने के बाद पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में दर्द होता है और कुछ समय के बाद ठीक हो जाता है, तो इस स्थिति को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

क्या पित्त की पथरी को रोका जा सकता है?

इस सवाल का सीधा जवाब है- नहीं। हर मामले में पथरी को रोका नहीं जा सकता, लेकिन जोखिम जरूर कम किया जा सकता है। पित्त की थैली में पथरी न बने इसके लिए आप नीचे बताई गई चीजों को अपना सकते हैं।

1. खाना संतुलित करें

पित्त की थैली में पथरी न बने इसके लिए अपने खानपान को संतुलित करना बहुत जरूरी है। बाहर के जंक फूड की बजाय अपने खाने में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर वाले फूड्स को तवज्जो देने की कोशिश करें।

2. क्रैश डाइट न अपनाएं

वजन को कंट्रोल में रखना जरूरी है। लेकिन अचानक से वजन कम करना गलत है। इसलिए वजन कम करने के लिए किसी तरह की क्रैश डाइट को बिल्कुल न फॉलो करें।

3. एक्सरसाइज करें

पित्त की थैली में पथरी न बने इसके लिए हर व्यक्ति का फिजिकली एक्टिव होना बहुत जरूरी है। इसलिए रोजाना खुद के लिए 30 मिनट निकालें और एक्सरसाइज करने की कोशिश करें।

4. पानी पिएं

कोलेस्ट्रॉल के कारण पित्त की थैली की पथरी बनती है। इससे बचाव के लिए रोजाना 3 से 4 लीटर पानी जरूर पिएं। पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है।

डॉक्टर कहते हैं कि पित्त की थैली में पथरी एक सामान्य लेकिन नजरअंदाज न की जाने वाली समस्या है। कई मामलों में यह बिना लक्षण के रहती है, लेकिन जब दर्द शुरू होता है तो समय पर इलाज बेहद जरूरी हो जाता है। सही खानपान, रेगुलर एक्सरसाइज, सही खानपान और समय पर जांच के जरिए इसके जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यदि बार-बार पेट के दाहिने हिस्से में दर्द, मतली या तैलीय खाने के बाद किसी प्रकार की परेशानी होती है तो इस बारे में डॉक्टर से बात करें।

Disclaimer:  यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। अगर आपको पित्त की थैली में पथरी के लक्षण महसूस हों या तेज पेट दर्द, बुखार, पीलिया या लगातार उल्टी जैसी समस्या हो, तो तुरंत योग्य गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जन और डॉक्टर से संपर्क करें।