
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Medically Verified By: Dr Kapil Kumar
फूड पॉइजनिंग
गर्मियों में फूड पॉइजनिंग के मामले बहुत तेजी से बढ़ जाते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक तो 32°C से ज्यादा तापमान में खाने में मौजूद बैक्टीरिया कुछ ही घंटों में कई गुना बढ़ सकते हैं। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी पेट के गंभीर संक्रमण की वजह बन सकती है। आपने खुद भी देखा होगा कि गर्मियां आते ही हॉस्पिटल्स और क्लिनिक में पेट दर्द, उल्टी, दस्त और पेट में ऐंठन और मरोड़ जैसी समस्याओं को लेकर मरीजों को भीड़ लगी रहती है। कारण पता चलता है कि फलां व्यक्ति को फूड पॉइजनिंग हो गई है। ऐसा सर्दियों की तुलना में अधिक होता है और फूड पॉइजनिंग या फूड इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है।
लेकिन ऐसा क्यों होता है? यह जानने के लिए हमने बात की नारायणा हॉस्पिटल के सीनियर कंसलटेंट डॉक्टर कपिल कुमार कुसरिवाल से। उन्होंने बताया कि "गर्मियों में फूड पॉइजनिंग बढ़ने का सबसे पहला और वैज्ञानिक कारण तापमान का बढ़ना है। सैलमोनेला, ई-कोइल और कैम्पलोबैक्टर जैसे हानिकारक बैक्टीरिया को पनपने और अपनी संख्या बढ़ाने के लिए गर्म और नमी वाले वातावरण की जरूरत होती है।" लेकिन ये बैक्टीरिया हमारे शरीर को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं आइए विस्तार से जानते हैं।
डॉक्टर ने कुछ वैज्ञानिक तथ्यों को हवाला देते हुए बताया कि जब तापमान 32°C से 45°C के बीच होता है, तो खाने में मौजूद बैक्टीरिया की संख्या हर 20 मिनट में दोगुनी हो सकती है। वह बताते हैं कि सर्दियों में जो खाना कई घंटों तक बाहर रखने पर भी ठीक रहता है, वही गर्मियों में सिर्फ 1 से 2 घंटे में ही खराब हो सकता है। अगर आप खाने को तुरंत सही टैम्प्रेचर में स्टोर न करें तो उसमें बैक्टीरिया बढ़ सकते हैं जो शरीर के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं।
अगर किसी को लंबे समय से बार-बार उलटी आ रही है, दस्त लग रहे हैं, पेट में ऐंठन और मरोड़ उठ रहे हैं, बुखार आ रहा है या कमजोरी और चक्कर आ रहे हैं। अगर किसी को इनमें से कोई भी समस्या होती है तो समझ जाएं कि यह फूड पॉइजनिंग का संकेत हो सकता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
फूड पॉइजनिंग होने का दूसरा कारण बताते हुए डॉक्टर कपिल कहते हैं कि गर्मियों के दिनों में लोग शाम के समय घरों से बाहर निकलना पसंद करते हैं। इस दौरान आइसक्रीम, गन्ने का रस, गोलगप्पे, चाट और अन्य कई तरह के स्ट्रीट फूड का सेवन करते हैं। सड़क किनारे बिकने वाले इन फूड्स को हाइजीन के साथ नहीं बनाया जाता है।
खुले में रखी कटी हुई सब्जियां और फल हवा में मौजूद बैक्टीरिया को जल्दी आकर्षित करते हैं। इसके अलावा अगर चाट-पकौड़ी या जूस में इस्तेमाल होने वाली बर्फ साफ पानी से न बनी हो, तो वह गंभीर आंतों के संक्रमण का कारण बन सकती है।
तेज धूप और पसीने के कारण गर्मियों में शरीर में पानी की कमी होना एक आम समस्या हो जाती है। पेट में मौजूद एसिड, जो भोजन के साथ आने वाले हल्के-फुल्के कीटाणुओं को मारने का प्राकृतिक काम करता है, उसका संतुलन भी बिगड़ सकता है। इसके अलावा अगर आप थोड़े से भी खराब खाने को खाते हैं तो कमजोर डायजेशन उसे संभाल नहीं पाता और व्यक्ति फूड पॉइजनिंग का शिकार हो जाता है।
गर्मी के मौसम में खाने-पीने की चीजों के रख-रखाव में भी थोड़ी सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। जैसे कि अक्सर देखा जाता है कि कच्चे मांस, पोल्ट्री प्रोडक्ट और डेयरी प्रोडक्ट्स को सही तापमान पर स्टोर नहीं किया जाता। अगर कच्चे और पके हुए भोजन को एक साथ रख दिया जाए, तो क्रॉस-कॉन्टेमिनेशन का खतरा बढ़ जाता है।
अगर आप खुद और अपने परिवार को फूड पॉइजनिंग से बचाना चाहते हैं तो लाइफस्टाइल में डॉक्टर के बताए इन कुछ बदलावों को करें-
खाने को तुरंत स्टोर करें- यानी कि अगर घर में पका हुआ खाना थोड़ा भी बचा है तो उसे एक घंटे के अंदर फ्रिज में रख दें और स्टोर कर लें। अगर आपने देरी की तो खाना बासी भी हो जाएगा और उसमें फंगस भी लग सकती है।
साफ-सफाई का खास ध्यान- खाना बनाने, परोसने और खाने से पहले हाथों को साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक अच्छी तरह धोना जरूरी है। साथ ही आप यह भी देखें कि जहां खाना बनाया जा रहा है, वह साफ है या नहीं।
कच्चे खाने से दूरी रहें- गर्मियों में कटे हुए फल और सलाद को लंबे समय तक बाहर रखकर न खाएं। सिर्फ ताजे कटे फल या पूरी तरह पके हुए खाना ही खाएं।
डिस्क्लेमर: गर्मियों में फूड पॉइजनिंग के बढ़ते मामलों के पीछे कई कारण हो हमारी खुद की लापरवाही हो सकती है। इसलिए थोड़ा सा सचेत रहकर और खान-पान की स्वच्छता पर ध्यान देकर इस समस्या से पूरी तरह बचा जा सकता है। अगर भोजन के सेवन के बाद लगातार उल्टी, दस्त, तेज बुखार या पेट में सहन न किया जाने वाले दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना किसी देरी के सही उपचार के लिए डॉक्टर के पास जाएं।