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Cancer Cases Increasing in India Causes:कैंसर एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है। पिछले कुछ दशकों से भारत में कैंसर के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। अब देश में कैंसर की बीमारी के गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। आपको बता दें कि कैंसर कई प्रकार के होते हैं, इसमें स्तन, प्रोस्टेट, आंत, गला, मुंह, लिवर और किडनी आदि शामिल हैं। खराब जीवनशैली, डाइट, तनाव, धूम्रपान और प्रदूषण ज्यादातर बीमारियों के मुख्य कारण होते हैं। ये सभी चीजें, कैंसर के जोखिम को कई गुना बढ़ा देती हैं। यह एक जानलेवा बीमारी है। इसलिए कैंसर का समय पर निदान बहुत जरूरी है। अगर समय पर निदाग होगा, तभी इलाज पूरी तरह से संभव हो सकता है। समय पर इलाज ही कैंसर रोगियों की जान बचा सकता है। हालांकि, आज देश में कैंसर के इलाज के लिए कई विकल्प मौजूद हैं। उनकी मदद से कैंसर रोगियों को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है या उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है। आइए, आज इस लेख में राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर ऑफ मेडिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. विनीत तलवार से जानते हैं कि देश में कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि क्यों हो रही है?
RGCIRC के मेडिकल ऑन्कोलॉजी निदेशक डॉ. विनीत तलवार कहते हैं, "भारत में कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। साल 2022 में भारत में कैंसर के लगभग 14.6 लाख नए मामले दर्द किए गए थे। वहीं, इस साल (2025) में संख्या बढ़कर 15.7 लाख होने का अनुमान है। साल 2040 तक कैंसर के नए मामले 20 लाख पार जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले तीन दशकों में कम आयु वर्ग (15-39 वर्ष) में कैंसर में 80 फीसदी की वृद्धि हुई है।”
मोटापा भी कैंसर का एक मुख्य कारण हो सकता है। मोटापा कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है। दरअसल, मोटापा की वजह से शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं। इससे शरीर में सूजन और मेटाबॉलिक बदलाव भी होते हैं। इससे कैंसर कोशिकाओं का विकास होता है। मोटापे की वजह से स्तन, प्रोस्टट, आंत और गर्भाशय के कैंसर का जोखिम ज्यादा रहता है।
कैंसर आनुवंशिक भी होता है। यानी अगर घर पर किसी को कैंसर हुआ है, तो आगे की पीढ़ी में कैंसर विकसित हो सकता है। जीन उत्परिवर्तन (mutations) कैंसर को जन्म दे सकते हैं। आपको बता दें कि BRCA1 और BRCA2 जीन उत्परिवर्तन स्तन और अंडकोष के कैंसर से जुड़े होते हैं।
अनहेल्दी डाइट भी कैंसर का कारण बन सकता है। दरअसल, ज्यादा तला-भुना, शुगर लोडेड चीजें और प्रोसेस्ड फूड्स खाने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। इन फूड्स में कई रासायनिक तत्व और ट्रांस फैट्स होते हैं, जो सूजन बढ़ाते हैं। इससे कैंसर कोशिकाओं में भी वृद्धि होने लगती है। इसलिए आपको सिर्फ हेल्दी डाइट लेने पर ही जोर देना चाहिए।
जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उनमें कैंसर का जोखिम अधिक रहता है। जब इम्यून सिस्टम कमजोर होता है तो कैंसर कोशिकाओं का निर्माण हो सकता है। इसलिए इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए रखना बहुत जरूरी होता है।
आजकल ज्यादातर लोग स्ट्रेस और चिंता से घिरे रहते हैं। यह भी बढ़ते कैंसर के मामलों के लिए जिम्मेदार हो सकता है। दरअसल, जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक तनाव में रहता है, तो इसका शरीर पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे शरीर की आंतरिक प्रणाली पर दबाव बढ़ता है। स्ट्रेस या चिंता की वजह से हार्मोनल असंतुलन हो सकता है और कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।
डॉ. तलवार बताते हैं कि भारत में देर से निदान एक बड़ी चुनौती है। लगभग 70 फीसदी रोगियों में कैंसर का निदान बहुत देरी से होता है। जानें, कैंसर के ट्रीटमेंट ऑप्शन-
सर्जरी, कैंसर का इलाज करने का एक सामान्य तरीका है। अगर कैंसर एक ही जगह पर है और फैला नहीं है, तो इस स्थिति में सर्जरी की मदद से कैंसर कोशिकाओं को हटाया जाता है। सर्जरी की मदद से ट्यूमर को हटाकर, कैंसर सेल्स को फैलने से रोका जाता है। स्तन, प्रोस्टेट, स्किन और आंत के कैंसर में सर्जरी करना कारगर साबित हो सकता है।
कीमोथेरेपी भी कैंसर के इलाज का एक विकल्प है। इसमें कैंसर सेल्स को मारने के लिए रासायनिक दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है। ये दवाइयां शरीर के विभिन्न हिस्सों में रक्त के माध्यम से फैलती है और कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करती हैं। कीमोथेरेपी तब दी जाती है, जब कैंसर शरीर के कई हिस्सों में फैल चुका होता है। सर्जरी के बाद भी कैंसर की बाकि कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए कीमोथेरेपी दी जा सकती है। बाल झड़ना और थकान कीमोथेरेपी के आम दुष्प्रभाव हैं।
कैंसर के इलाज के लिए रेडियोथेरेपी का उपयोग भी किया जाता है। इसमें उच्च-ऊर्जा वाली विकिरण का उपयोग करके, कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है। सर्जरी के बाद रेडियोथेरेपी करवाई जा सकती है। इसका उपयोग ट्यूमर को छोटा करने या कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने के लिए किया जाता है।
कैंसर के दौरान शरीर का इम्यून सिस्टम भी बुरी तरह से प्रभावित हो जाता है। ऐसे में इम्यूनोथेरेपी की मदद से शरीर के इम्यून सिस्टम को बढ़ावा मिलता है। इससे कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और नष्ट करने में मदद मिलती है। शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूती प्रदान करने के लिए दवाइयों का उपयोग किया जाता है।
कैंसर के इलाज के लिए हार्मोनल थेरेपी भी कारगर साबित हो सकती है। स्तर कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर में डॉक्टर हार्मोनल थेरेपी की सलाह दे सकते हैं। इससे हार्मोन के प्रभाव को बंद करने के लिए दवाइयों का उपयोग किया जाता है। इससे कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकने में मदद मिलती है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
कैंसर के कुछ उपचार जैसे- कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के दौरान दर्द हो सकता है। इससे शरीर में दर्द और थकान हो सकती है।
नहीं, कैंसर किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है। लेकिन, बुजुर्गों में कैंसर होने का जोखिम ज्यादा बना रहता है। हालांकि, बच्चे और युवाओं को भी कैंसर हो सकता है।
अगर समय पर कैंसर का निदान हो जाए, तो इसका इलाज संभव है। कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी की मदद से कैंसर का इलाज किया जा सकता है।
नहीं, कैंसर संक्रामक नहीं होता है। यानी यह एक से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है। कैंसर किसी वायरस या बैक्टीरिया के कारण नहीं होता है। बल्कि, शरीर की कोशिकाओं में असामान्य वृद्धि के कारण कैंसर होता है।