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Written By: Jitendra Gupta | Published : August 22, 2022 5:02 PM IST
शरीर का गर्म होना अब बिल्कुल नार्मल! डॉक्टरों ने बताया क्यों बड़ों के मुकाबले बच्चों की हो रही बॉडी गर्म
अगर आप हर किसी मौसम में खुद को किसी भी प्रकार के इंफेक्शन से बचाने में सफल हो जाते हैं तो आप उन कुछ लोगों में शामिल हैं, जो भाग्यशाली हैं। बदलते मौसम में बुखार होना बहुत आम माना जाता है लेकिन डॉक्टर्स इस बात को लेकर परेशान हैं कि अब मरीज बहुत तेज बुखार की शिकायत करते हैं, जो शरीर को तोड़ कर रख देता है। बहुत से लोग 103 डिग्री से लेकर 105 डिग्री तक के बुखार से पीड़ित होते हैं, जो अपने आप में नए चलन की ओर इशारा कर रहा है। एक और बात जो परेशान करने वाली है कि इस तरह के बुखार के ज्यादातर मामले हेल्दी बच्चों में देखने को मिल रहे हैं।
साकरा वर्ल्ड हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन कंसलटेंट डॉ. टीआर हेमकुमार ने एक अंग्रेजी वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में कहा है कि लोगों के शरीर के तापमान में वृद्धि हुई है हालांकि अभी कोई खतरे की बात सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि करीब 30 फीसदी मरीजों के शरीर का तापमानबहुत ज्यादा दर्ज किया गया। ये अब सामान्य बन गया है क्योंकि उनमें से ज्यादातर के रूटीन चेकअप में ये उनका तापमान रहा और न ही ये मास्क पहनने के कारण बहुत ज्यादा वायरल लोड के संपर्क में आए।
एक और एक्सपर्ट ने ये कहा कि जब से स्कूल खुले हैं तब से कोविड के अलावा बच्चे अन्य वायरल इंफेक्शन के संपर्क में आने के प्रति संवेदनशील हैं। आमतौर पर वायरल इंफेक्शन के लिए हर्ड इम्यूनिटी की कमी के कारण वायरल लोड बहुत ज्यादा रहता है। इसके अलावा इन वायरल इंफेक्शन के प्रति साइटोकिन्स की प्रतिक्रिया बहुत ज्यादा होती है, जिसके परिणामस्वरूप भी तापमान बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि हम पूर्ण रूप से ये नहीं कह सकते हैं कि तेज बुखार कोई सामान्य चीज है। इस तरह का उच्च तापमान आमतौर पर कुछ वायरल इंफेक्शन में देखने को मिल रहा है जैसे-कोविड, फ्लू, निमोनिया और दूसरे वायरल इंफेक्शन। हालांकि इस तरह के मामलों में बुखार दो से तीन दिन में अपने आप कम हो जाता है, बशर्ते आपको सही दवा और उपचार की जरूरत होती है।
मणिपाल हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन के कंसलटेंट डॉ. प्रमोद वी सत्या का कहना है कि मौजूदा वक्त में 70 से 80 फीसदी ओपीडी में आने वाले मरीजों को बुखार होता है। और उनमें से ज्यादातर को श्वसन संबंधी लक्षण होते हैं, जो आगे चलकर कोविड का रूप ले लेते हैं।
उन्होंने बताया कि 12 साल से कम उम्र के बच्चों को बड़े लोगों की तुलना में तेज बुखार की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बाकी आमतौर पर फ्लू, डेंगू, मलेरिया, टायफाइड बुखार के साथ बिना श्वसन लक्षणों का बुखार भी शामिल है।
एहतियाती उपायों की बात करें तो आपको पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए, इसके अलावा दिन में तीन से चार बार पेरासिटामॉल लेनी चाहिए। अगर आपका बुखार बहुत ज्यादा है या फिर 102 डिग्री से ज्यादा है तो आपको पानी से भरा तौलिया ब़ॉडी पर रखना चाहिए। आपके शरीर में दर्द है तो पेनिकलर भी ले सकते हैं।