5 वर्ष से छोटे बच्चों को क्यों रहता है निमोनिया का ज्यादा खतरा? जानिए क्या कहती है WHO की रिपोर्ट

Bacho Mai Pneumonia Ka Khatra Kyu Hota Hai: कोई भी बीमारी हो, आजकल बच्चों को सबसे पहले अपनी चपेट में ले रही हैं। खासकर 5 साल से कम उम्र के बच्चों में इसका खतरा ज्यादा रहता है। आइए जानें क्यों?

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Written By: Vidya Sharma | Updated : November 11, 2025 2:45 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Shweta Bansal

Bacho Mai Pneumonia Ko Lekar WHO Ki Report: निमोनिया फेफड़ों से जुड़ा गंभीर संक्रमण है। इस स्थिति में फेफड़े में पस और फ्लूड भर जाता है, जिससे सांस लेने में परेशानी होने लगती है। साथ ही फेफड़े को कम ऑक्सीजन मिलती है। दुनियाभर में संक्रमण से बच्चों की मौत का सबसे बड़ा कारण निमोनिया है। इस विषय पर पुख्ता जानकारी के लिए हमने आर्टेमिस हॉस्पिटल की पुलमोनोलॉजिस्ट और सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर श्वेता बंसल से बातचीत की, उन्होंने बताया कि 'आंकड़े बताते हैं कि 2019 में 1 से 5 साल की उम्र में जिन बच्चों को असमय जान गंवानी पड़ी, उनमें 22 प्रतिशत जानें न्यूमोनिया के कारण गईं।'

वहीं WHO की रिपोर्ट में भी कुछ ऐसे ही आंकड़े प्रकाशित हैं कि ' निमोनिया के कारण 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर 14% है, जिससे 2019 में 740 से 180 बच्चों की मृत्यु हुई।' ऐसे में हर माता-पिता के लिए यह एक महत्वपूर्ण कार्य बन जाता है कि वह अपने बच्चे की देखभाल पर ध्यान दें और उसे निमोनिया होने से बचाएं। आइए हम इस विषय पर डॉक्टर से थोड़ा और विस्तार से जानें।

वायरस, बैक्टीरिया और फंगस के कारण होता है न्यूमोनिया

WHO की रिपोर्ट के मुताबिक'वायरस, बैक्टीरिया या फंगस का संक्रमण निमोनिया का कारणबन सकता है। स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनी बच्चों में बैक्टीरियल निमोनिया का सबसे प्रमुख कारण है। इसके अलावा हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी (एचआईबी) बैक्टीरियल निमोनिया का दूसरा कारण है। इनके अतिरिक्त, रेस्पिरेटरी सिंसिशीयल वायरस और न्यूमोसिस्टिस जिरोवेसी फंगस भी निमोनिया का कारण बनते हैं। एचआईवी संक्रमित नवजात शिशुओं में निमोनिया से होने वाली एक चौथाई मौतों का कारण न्यूमोसिस्टिस जिरोवेसी फंगस होता है।'

लक्षणों पर नजर रखना जरूरी

निमोनिया के लक्षणों को पहचान कर शुरुआती स्तर पर इलाज देने से स्थिति को गंभीर होने और जान जाने से बचाया जा सकता है। हालांकि इस मामले में मुख्य समस्या यही है कि इसके लक्षण आमतौर पर सामान्य इन्फ्लूएंजा जैसे ही होते हैं। पांच साल से कम उम्र के बच्चे, जिन्हें ज्यादा दिन से खांसी हो और सांस लेने में तकलीफ हो, उनमें निमोनिया होने की आशंका रहती है।

ऐसे में सांस लेते समय फेफड़ों के सिकुड़ने और तेज सांस चलने जैसे लक्षणों के माध्यम से डॉक्टर निमोनिया की पुष्टि करते हैं। वायरल निमोनिया के मामले में अक्सर सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आती है। स्थिति गंभीर होने पर छोटे बच्चों को खाने-पीने में भी परेशानी होती है, जिससे उनकी स्थिति और बिगड़ने की आशंका रहती है।

इसलिए बढ़ जाता है खतरा

वैसे तो बच्चों का नैचुरल इम्यून सिस्टम खुद ही संक्रमण से लड़कर उन्हें बचा लेता है, लेकिन अगर किसी कारण से बच्चे का इम्यून सिस्टम कमजोर हो, तो उनके लिए स्थिति जटिल हो जाती है। कमजोर इम्यून सिस्टम वाले बच्चों में निमोनिया का खतरा ज्यादा रहता है। एचआईवी या मीजल्स जैसी कोई बीमारी अगर पहले से हो, तो भी निमोनिया की आशंका बढ़ जाती है। घर में चूल्हे पर खाना बनता हो, माता-पिता में से कोई भी धूम्रपान करता हो या बच्चे बहुत भीड़-भाड़ में रहते हों, तो भी निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है।

बचाव और इलाज के भी हैं रास्ते 

आमतौर पर कमजोर इम्यून सिस्टम वाले बच्चे निमोनिया का ज्यादा शिकार होते हैं। इसलिए उनके इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाकर इससे बचाया जा सकता है। जन्म के शुरुआती छह महीने मां का दूध पिलाने और उसके बाद बच्चे के पोषण का पूरा ध्यान रखने से उसका इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और संक्रमण का खतरा कम होता है।

इसके अलावा एचआईबी, न्यूमोकोकस, मीजल्स और हूपिंग कफ (परट्यूसिस) से बचाव के लिए लगने वाले टीके बच्चों को निमोनिया से भी बचाने में मददगार होते हैं। बचाव के कदमों के अलावा सही समय पर जांच और उचित इलाज से भी बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

Highlights

  • वायरस, बैक्टीरिया या फंगस का संक्रमण निमोनिया का कारण बन सकता है।
  • निमोनिया को टीकाकरण, पर्याप्त पोषण और पर्यावरणीय कारकों पर ध्यान देकर रोका जा सकता है।
  • WHO के मुताबिक निमोनिया से पीड़ित केवल एक तिहाई बच्चों को ही आवश्यक एंटीबायोटिक दवाएं मिल पाती हैं।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

FAQs

निमोनिया अचानक से आने का क्या कारण है?

यह आमतौर पर जीवाणु संक्रमण के कारण होता है।

निमोनिया रोग किसकी कमी से होता है?

निमोनिया किसी एक चीज़ की कमी से नहीं, बल्कि बैक्टीरिया, वायरस, कवक और अन्य कीटाणुओं के संक्रमण से होता है, जो फेफड़ों में सूजन पैदा करते हैं।

निमोनिया कितने दिनों तक रहता है?

बैक्टीरियल निमोनिया के लक्षणों में 1 से 2 सप्ताह में सुधार हो सकता है, लेकिन पूरी तरह ठीक होने में 4 से 6 सप्ताह तक लग सकते हैं।

निमोनिया की बीमारी कैसे होती है?

निमोनिया फेफड़ों में बैक्टीरिया, वायरस या फफूंद के संक्रमण से होता है।

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