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Children Bone Problems: बच्चों की हड्डियां वयस्कों से पूरी तरह से अलग होती हैं, आपने भी सुना होगा कि नवजात शिशुओं में लगभग 300 हड्डियां होती हैं, जबकि एक वयस्क व्यक्ति में 206 हड्डियां होती हैं। यही कारण है कि बच्चों के शरीर का कंकाल ज्यादा कार्टिलेज होते हैं, जो कि लचीले व नरम होते हैं। डॉ. तरल नागदा, सीनियर कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक, नारायणा हेल्थ एसआरसीसी चिल्ड्रन हॉस्पिटल, मुंबई के अनुसार जब किसी बच्चे की हड्डी टूटती है, तो उसे सिर्फ "बड़ों जैसा लेकिन छोटा फ्रैक्चर" समझना गलत है। बच्चों की हड्डियां अलग तरह से बढ़ती और ठीक होती हैं, इसलिए उनकी चोटें भी अलग होती हैं। इस अंतर को समझना हर माता-पिता के लिए ज़रूरी है ताकि वे अपने बच्चे को सही देखभाल और जल्दी ठीक होने में मदद कर सकें।
(और पढ़ें - हड्डियों को मजबूत बनाने वाले फूड्स)
बच्चों की हड्डियां बड़ों की तुलना में ज्यादा लचीली होती हैं और इस वजह से चोट लगने पर उनकी हड्डियां अलग तरह से रिएक्ट करती हैं। यही कारण है कि कुछ प्रकार के बोन फ्रैक्चर सिर्फ बच्चों में ही देखने को मिलते हैं -
बकल (या टोरस) फ्रैक्चर: जब हड्डी पर दबाव पड़ता है और वह बाहर की ओर फूल जाती है, लेकिन पूरी तरह टूटती नहीं।
ग्रीनस्टिक फ्रैक्चर: जब हड्डी में दरार आती है, वह मुड़ती और चटकती है, लेकिन पूरी तरह से टूटती नहीं।
प्लास्टिक डीफॉर्मेशन: इसमें हड्डी सिर्फ मुड़ जाती है, लेकिन उसमें कोई दरार नहीं आती और इसी कारण इन्हें डीफॉर्मेशन कहा जाता है।
बड़ों की हड्डियां जहाँ विकसित हो चुकी होती हैं, वहीं बच्चों की हड्डियां लगातार बढ़ रही होती हैं। बच्चों लंबी हड्डियों के सिरों पर ग्रोथ प्लेट (जिसे 'फाइसिस' भी कहते हैं) होती है और यही हिस्सा हड्डी की लंबाई और शेप तय करता है। अगर चोट इस ग्रोथ प्लेट पर लग जाए, तो इसका असर सिर्फ उस वक्त की हड्डी टूटने तक सीमित नहीं रहता और आगे चलकर हड्डी टेढ़ी हो सकती है, छोटी रह सकती है या असामान्य ढंग से बढ़ सकती है। ये परेशानी सिर्फ़ बच्चों में होती है, क्योंकि बड़ों में ये ग्रोथ प्लेट होती ही नहीं।
(और पढ़ें - किस कारण से कमजोर पड़ती हैं हड्डियां)
बच्चों की हड्डियों में रीमॉडलिंग की जबरदस्त ताकत होती है। मतलब, अगर फ्रैक्चर के बाद हड्डी थोड़ी टेढ़ी-मेढ़ी जुड़ भी जाए, तो बढ़ने के साथ वह धीरे-धीरे सीधी हो सकती है, खासकर 10 साल से छोटे बच्चों में। ये रीमॉडलिंग हड्डी के आसपास की मांसपेशियों की हलचल और जोड़ों की गतिविधियों के अनुसार होती है। लेकिन 10 साल से बड़े बच्चों में ये ताकत कम हो जाती है, और कई बार हड्डी को सही शेप में लाने के लिए ऑपरेशन की जरूरत पड़ सकती है।
बड़ों के मुकाबले बच्चों की हड्डियां बहुत तेजी से भरती हैं। इसी वजह से उन्हें प्लास्टर या इमोबिलाइजेशन (हिलने-डुलने से रोकना) की ज़रूरत कम समय के लिए होती है। बच्चों के शरीर में खून का संचार बेहतर होता है और सेल्स बहुत तेजी से बनते हैं, जिससे हड्डी जल्दी जुड़ जाती है। लेकिन यही तेजी एक चेतावनी भी है, अगर इलाज में कोई चूक हो जाए, तो गलत ढंग से जुड़ी हड्डी भी उतनी ही जल्दी स्थायी समस्या बन सकती है। इसलिए सही समय पर सही इलाज जरूरी है।
कुछ फ्रैक्चर और उनसे जुड़ी समस्याएं सिर्फ बच्चों में ही देखी जाती हैं, जैसे:
मायोसाइटिस ओसिफिकन्स: चोट लगने पर मांसपेशी के अंदर हड्डी जैसा ऊतक बन जाता है, जिससे जोड़ की गति रुक सकती है।
अधिक लंबाई हो जाना: कभी-कभी टूटी हुई हड्डी दूसरी तरफ की हड्डी से ज्यादा लंबी हो जाती है।
इसी वजह से अगर बच्चे को चोट के बाद दर्द या सूजन बनी रहती है, तो उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। कई बार मामूली चोट या सामान्य दिखने वाली एक्स-रे रिपोर्ट के पीछे गंभीर फ्रैक्चर छिपा हो सकता है। ऐसे मामलों में सटीक जांच के लिए अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन या एमआरआई की ज़रूरत पड़ सकती है।
अगर बच्चे की ग्रोथ प्लेट प्रभावित हो, या सर्जरी की सलाह दी जाए, तो जरूरी है कि आप पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक सर्जन से सलाह लें। ये विशेषज्ञ बच्चों की हड्डियों की ग्रोथ और बनावट को अच्छी तरह समझते हैं और उसी अनुसार इलाज करते हैं। अच्छी खबर यह है कि करीब 80% बच्चों के फ्रैक्चर प्लास्टर से ठीक हो जाते हैं, और सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती।
इलाज से बेहतर बचाव होता है और इसलिए पेरेंट्स इन खास बातों का ध्यान रखकर बच्चों में फ्रैक्चर होने से बचा सकते हैं -
अपने बच्चों को सावधानी रखना सिखाएं, उनसे बात करें कि खेल-कूद के दौरान सावधानी कैसे बरतें। इनमें पेरेंट्स अपने बच्चों को ये बातें सिखा सकते हैं -
हड्डियां मजबूत बनाएं: प्रोटीन, मिनरल्स और विटामिन D (धूप से मिलने वाला) से भरपूर डाइट दें।
नियमित एक्सरसाइज: नियमित एक्सरसाइज जरूरी है स्ट्रेचिंग और स्ट्रेंथ बढ़ाने वाले व्यायाम हड्डियों और मांसपेशियों को हेल्दी रखते हैं।
जंक फूड से दूरी रखें: खराब खानपान हड्डियों को कमजोर करता है। मोटापे से ग्रस्त बच्चों में फ्रैक्चर का जोखिम ज्यादा होता है।
चोट लगने पर मालिश बिल्कुल न करें: अगर फ्रैक्चर का शक हो, तो देरी न करें। जल्द से जल्द अस्पताल जाएं, एक्स-रे या स्कैन कराएं और डॉक्टर की सलाह पर ही कदम उठाए।
बच्चों का शरीर बड़ों से अलग होता है, उनकी हड्डियां और शरीर अलग तरह से काम करते हैं, खासकर जब बात फ्रैक्चर की हो। सही जानकारी, समय पर इलाज और विशेषज्ञ की सलाह से ज्यादातर बच्चों के फ्रैक्चर बिना किसी दीर्घकालिक परेशानी के ठीक हो सकते हैं। एक पेरेंट के रूप में आपकी सतर्कता और जागरूकता ही आपके बच्चे की जल्दी और सुरक्षित रिकवरी में सबसे बड़ा सहारा बन सकती है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
शरीर में पोषक तत्वों की कमी, कोई क्रोनिक कंडीशन या हड्डियों से जुड़ी कोई बीमारी उन्हें कमजोर बना सकती है।
छोटे बच्चों की हड्डियां विकसित हो रही होती हैं, जिसके कारण व कमजोर होती हैं और जल्दी टूटने का खतरा रहता है।
छोटे बच्चों की हड्डियां विकसित हो रही होती हैं और इसलिए पूरी तरह से विकसित न हुई होने के कारण वयस्कों की तुलना में उनकी हड्डियां कमजोर होती हैं।