पॉटी करते समय एनल में दर्द क्यों होता है?

Potty Karte Time Anal Pain: क्या आपको भी पॉटी करते समय दर्द होता है? क्या यह ज्यादा होता है? अगर हां, तो डॉक्टर से जानें कि ऐसा क्यों होता है और एनल में होने वाले दर्द को कैसे ठीक किया जा सकता है।

पॉटी करते समय एनल में दर्द क्यों होता है?

Written by Vidya Sharma |Published : November 28, 2025 12:24 PM IST

Pooping Time Mai Anal Pain Hone Ka Karan: कुछ समस्याएं ऐसी होती हैं जिनके बारे में हम ज्यादा खुलकर बात नहीं कर पाते हैं। उन्हीं में से एक है पॉटी करते समय होने वाले दर्द की, जिसे एनल पेन कहा जाता है। यह स्थिति कई कारणों से पैदा हो सकती है, लेकिन शर्म की वजह से लोग इसे अनदेखा कर देते हैं और आगे चलकर यह भयानक रूप ले सकती हैं। पूप करते समय एनल पेन किसी भी उम्र में हो सकता है। आजकल छोटे बच्चों को पेट से जुड़ी समस्या होने की वजह से पॉटी करते समय दर्द हो रहा है तो 20-30 उम्र के व्यक्ति भी इसमें शामिल हैं। 

अगर आपको भी यह समस्या है और डॉक्टर के पास जाने या किसी को बताने में शर्म आ रही है तो हमारा यह लेख आपके लिए खास है। आपकी सहूलियत के लिए हमने आर्टेमिस हॉस्पिटल की ऑब्सटेट्रिक्स और गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर निधि राजोतिया से बात की, उन्होंने एनल पेन होने का कारण, किसी उम्र में होता है और अन्य जरूरी जानकारियां दी। आइए आपको विस्तार से बताते हैं डॉक्टर ने क्या कहा।

ऐनल पेन की शुरुआत कब होती है और क्यों

ऐनल पेन यानी मल त्यागने वाले क्षेत्र में दर्द होना एक आम परेशानी है। यह दर्द जलन चुभन काटने जैसा या भारीपन जैसा एहसास दे सकता है। अक्सर लोग शर्म के मारे इस बारे में खुलकर बात नहीं करते हैं। आज हम इस बारे में जानेंगे कि आखिर एनल पेन क्यों होता हैऔर किस उम्र में सबसे ज्यादा इससे परेशानी होती है। 

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किस उम्र में होता है एनल पेन?

पहले के टाइम में यह बुजुर्गों में यह परेशानी हुआ करती थी, लेकिन अब 20 से 30 साल की उम्र में लाइफस्टाइल की वजह से यह मामले देखने को मिलते हैं। कब्ज इसकी सबसे बड़ी वजह भागदौड़ भरी इस जिंदगी में लोग फास्ट फूड खाते हैं, पानी कम पीते हैं देर रात तक सोते हैं टॉयलेट रोक कर रखते हैं बैठकर काम करने का समय ज्यादा होता है इन्हीं वजह से कब्ज की समस्या बढ़ती है। कब्ज होने पर टॉयलेट के वक्त जोर लगाना पड़ता है, जिससे गूदे में दरार, सूजन हो जाती है और यही से असली दर्द की शुरुआत होती है। 

दूसरी वजह एनल फिशर (गुदा में छोटी दरार)

सख्त मल बाहर निकलते समय गुदा पर घर्षण करता है और वहां हल्की दरार बना देता है। इस दरार को फिशर कहते हैं। फिशर होने पर मल करते समय ऐसा लगता है जैसे धारदार चीज चुभ गई है। 30 से 45 साल की उम्र में भी यह समस्या हो जाती है। एनल पेन होने का कारण है शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा होना और जिम्मेदारियां के चलते तनाव का बढ़ना इनके कारण पाचन कमजोर होने लगता है।

पाचन कमजोर होने से सबसे पहले कब्ज की समस्यापैदा होती है। पेट भारी रहता है आंत सुस्त हो जाती हैं। इसके कारण माल सख्त और सुख होता है, जिस वजह से मल त्याग के दौरान जोर लगाना पड़ता है और इससे बवासीर की शुरुआत होती है। हमारी गुदा (anus) के अंदर और बाहर बहुत पतली-पतली नसें होती हैं।जोर लगाने पर ये नसें फूलने लगती हैं और समय के साथ सूजन बना लेती हैं।

पाइल्स

  • गुदा की नसें सूज कर गांठ बना लेती हैं। मल त्याग के समय इन गांठों पर दबाव बनता है तो जलन, दर्द, खून
  • निकलने जैसी समस्याएं होती हैं।
  • कम पानी और फाइबर वाली डाइट

कम पानी पीने से मल सूख जाता है। वहीं फाइबर कम खाने से मल सख्त हो जाता है। इससे मल त्याग करते समय रगड़ ज्यादा लगती है, और दर्द बढ़ता है। कई बार पानी और खानपान पर ध्यान देने से यह समस्या ठीक हो जाती है। इसके अलावा लंबे समय तक टॉयलेट रोककर रखने से भी मल आंत में सूखता है और सख्त हो जाता है

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कैसे करें बचाव

  • रोज कम से कम 3 लीटर पानी पिएं। 
  • खाने में फाइबर बढ़ाएं। लौकी तोरई, दालें, राजमा, सलाद , सेब वगैरह लें।
  • सुबह के वक्त गुनगुना पानी पीने की आदत डालें। 
  • टॉयलेट कभी न रोकें। 
  • लंबे समय तक बैठकर काम करने से बचें।
  • बहुत मसालेदार और तला हुआ खाना न खाएं।
  • हल्की वॉक करें। स्ट्रेस कम करें।

कब डॉक्टर के पास जाना जरूरी है?

  • दर्द 3–4 दिन से ज्यादा रहे
  • खून आए
  • फिशर जैसा तेज कट वाला दर्द हो
  • बैठना मुश्किल हो

Highlights

  • एनल पेन इसलिए होता है क्योंकि गुदा की नसें सूज कर गांठ बना लेती हैं। 
  • एनल पेन अगर 3-4 दिन से ज्यादा रहे तो डॉक्टर को दिखाएं।
  • दर्द से बचने के लिए रोज कम से कम 3 लीटर पानी पिएं।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।