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Yuvaon Mai Body Pain Kyu Badh Rha Hai: पिछले कुछ समय से 20-25 साल के युवाओं में बॉडी पैन (शरीर में दर्द) की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जो कि एक चिंता का विषय है। एक दौर था जब जोड़ों का दर्द, पीठ का दर्द और मांसपेशियों में खिंचाव जैसी समस्याएं बढ़ती उम्र के साथ जुड़ी होती थीं, लेकिन अब युवा भी इससे अछूते नहीं रहे हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल, खान-पान की गलत आदतें, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और स्क्रीन टाइम का अत्यधिक उपयोग इसके मुख्य कारण माने जा रहे हैं।
आज के युवा घंटों तक एक ही जगह बैठकर काम करते हैं, चाहे वह ऑफिस हो या घर पर ऑनलाइन क्लासेज। लैपटॉप और मोबाइल का लगातार इस्तेमाल गलत पोस्चर को जन्म देता है, जिससे गर्दन, कंधे और पीठ में दर्द होने लगता है। इसके अलावा, अत्यधिक तनाव भी मांसपेशियों में खिंचाव का कारण बनता है। जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड पर निर्भरता ने पोषण की कमी को बढ़ा दिया है, जिससे हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर हो रही हैं।
ये सभी कारक मिलकर युवाओं के शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे उन्हें कम उम्र में ही शरीर के दर्द जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। आइए हम इस विषय पर हमने शारदा हॉस्पिटल से बतौर सीनियर कंसल्टेंट- इंटरनल मेडिसिन जुड़े डॉक्टर श्रेय श्रीवास्तव से बात ही, और इसके मुख्य 10 कारणों के बारे में विस्तार से जानते हैं। आइए जानते हैं
आजकल के युवा अत्यधिक मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं। पढ़ाई, करियर और व्यक्तिगत जीवन में तनाव बढ़ने से शारीरिक दर्द उत्पन्न होता है। तनाव से शरीर में मांसपेशियों का संकुचन हो सकता है, जिससे गर्दन, पीठ और कंधों में दर्द की समस्याहोती है। तनाव के चलते शरीर के भीतर कोर्टिसोल नामक हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जो दर्द को और बढ़ा सकता है।
कंप्यूटर या स्मार्टफोन का लम्बे समय तक इस्तेमाल करते बैठे रहने से शरीर की स्थिति ठीक नहीं रहती। युवा इस में अपनी पीठ और गर्दन को झुका कर बैठते हैं, जिससे रीढ़ की हड्डी में दर्द और मांसपेशियों में खिंचाव हो सकता है। खराब पोस्चर के कारणस्पाइन पर दबाव पड़ता है, जिससे गर्दन, पीठ और कंधे में दर्द महसूस होने लगता है।
आजकल के युवाओं में शारीरिक गतिविधियों की कमी बढ़ गई है। अधिकांश समय बैठकर काम करना और व्यायाम न करना, मांसपेशियों को कमजोर बना देता है। नियमित व्यायाम की कमी से रक्त संचार में कमी आती है, जिससे मांसपेशियों में खिंचाव और दर्द होता है। यह दर्द अधिकतर पीठ, हाथों और पैरों में महसूस होता है।
बहुत से युवा गलत खानपान की आदतों का पालन करते हैं, जिसमें जंक फूड, अधिक शक्कर और वसायुक्त खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। इनसे शरीर में सूजन और सूजन से जुड़े दर्द की समस्या उत्पन्न होती है। साथ ही, इन खाद्य पदार्थों में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी होती है, जो मांसपेशियों की ठीक से मरम्मत और कार्य करने में सहायक होते हैं।
युवाओं के घरों में स्मार्टफोन, लैपटॉप और टीवी का अधिक उपयोग बढ़ गया है। घंटों तक स्क्रीन के सामने देखने से आंखों में थकान, सिर दर्द, और कंधे और गर्दन में दर्द हो सकता है। इसके चलते शरीर में एक जगह पर लंबे समय तक बैठने की आदत मुद्दा बन जाती है, जिससे शरीर में दर्द और खिंचाव की समस्या उत्पन्न होती है।
लापरवाही से नींद की कमी और अनियमित नींद से शरीर का सही तरीके से पुनर्निर्माण नहीं हो पाता। सही नींद न मिलने की स्थिति में मांसपेशियों में तनाव और दर्द का एहसास हो सकता है। खराब नींद के कारण शरीर के अंदर होने वाली मरम्मत प्रक्रिया भी रुक जाती है, जिससे दर्द और असहजता बढ़ जाते हैं। लंबे समय तक नींद की कमी से हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द भी अधिक होता है।
कई युवा अपनी फिटनेस के लिए अत्यधिक व्यायाम करते हैं, जो मांसपेशियों पर अत्यधिक दबाव डालता है। यह विशेष रूप से नए जिम जाने वाले युवाओं में देखा जाता है, जो ओवरट्रेनिंग करते हैं। अत्यधिक शारीरिक मेहनत से मांसपेशियों में खिंचाव और सूजन हो सकती है, जिससे दर्द होता है। इस दर्द को मसल पेन कहते हैं, जो नियमित आराम और ठीक से स्ट्रेच न करने से बढ़ता है।
आधुनिक युवा अधिक कैलोरी वाले आहार और शारीरिक गतिविधियों के कम होने के कारण मोटापे का शिकार हो रहे हैं। जोड़ों पर दबाव डालने से जोड़ और हड्डियों में दर्द होने लगता है। घुटनों, पीठ और कमर में यह दर्द विशेष रूप से देखा जाता है। शरीर में बढ़ने से लचीलापन कम हो जाती है, जिससे दर्द और खिंचाव होता है।
आज का युवा अपने करियर और जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अधिक मेहनत करता है, जिससे मानसिक थकानका सामना करना पड़ता है। मानसिक थकान शारीरिक दर्द को बढ़ा सकती है। जब शरीर के तंत्रिका तंत्र पर दबाव बढ़ता है, तो मांसपेशियों में दर्द और तनाव महसूस होने लगता है। यह दर्द आमतौर पर सिर, गर्दन और पीठ में होता है।
शारीरिक दर्द कुछ युवाओं के लिए भी कारण बनता है, जिसमें उनके पारिवारिक इतिहास छुपा होता है। अगर परिवार में किसी को गठिया, हड्डी रोग या मांसपेशियों से संबंधित समस्याएं रही हैं, तो युवाओं को भी इन समस्याओं का सामना हो सकता है। जीन और वातावरण के कारण इन दर्दों का जोखिम अधिक हो सकता है, और यह पीढ़ी दर पीढ़ी हो सकता है।
जी हां, सरसों के तेल से मालिश करने से दर्द से आराम मिलता है और सरसों का तेल स्किन पर इस्तेमाल के लिहाज से भी पूरी तरह सुरक्षित है।
शरीर में दर्द होने पर आप कुछ घरेलू उपाय आजमा सकते हैं, जैसे आराम करें, खूब पानी पिएं और प्रभावित हिस्से की मालिश लगाएं। लेकिन यदि दर्द गंभीर है या कुछ दिनों से ज्यादा रहता है, तो डॉक्टर से सलाह लें।
विटामिन-बी12 और विटामिन-डी की कमी के कारण शरीर में गंभीर दर्द हो सकता है। इसके अलावा, पोटैशियम और आयरन की कमी भी शरीर में दर्द का कारण बन सकती है।
जोड़ों में दर्द के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे कमजोरी, शरीर का वजन ज्यादा होना, गठिया और हड्डियों की कमजोरी आदि।