... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Jitendra Gupta | Updated : June 24, 2022 7:31 AM IST
मंकीपॉक्स को Global emergency घोषित कर सकता है डब्लूएचओ! नाइजीरियन एक्टिविस्ट ने लगाए भेदभाव के आरोप
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) मंकीपॉक्स को एक वैश्विक आपात स्थिति के रूप में घोषित करने के लिए अपनी आपात समीति के साथ चर्चा करने जा रहा है, जिसके बाद इस बीमारी को 'ग्लोबल इमरजेंसी' करार दिया जाएगा। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी देशों में इस बीमारी के फैलने के बाद डब्ल्यूएचओ का ये फैसला कोरोनोवायरस महामारी के दौरान अमीर और गरीब देशों के बीच पैदा हुई विषम असमानताओं को दूर कर सकता है।
मंकीपॉक्स को ग्लोबल इमरजेंसी के रूप में घोषित करने का ये मतलब है कि संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य संस्था इस बीमारी को एक असाधारण घटना के रूप में मान रही है। इतना ही नहीं डब्लूएचओ द्वारा मंकीपॉक्स को ग्लोबल इमरजेंसी के रूप में घोषित करने से ये साफ हो जाएगा कि ये बीमारी और ज्यादा देशों में भी फैल सकती है। डब्लूएचओ जल्द ही मंकीपॉक्स को कोविड महामारी की ही तर्ज पर ग्लोबल इमरजेंसी के रूप में घोषित करेगा। साथ ही पोलियो को खत्म करने के प्रयास भी जारी रहेंगे।
बहुत से वैज्ञानिकों को इस तरह की घोषणा को लेकर संदेह है और उन्हें नहीं लगता है कि ये मंकीपॉक्स को रोकने में मदद करेगा चूंकि अभी तक सिर्फ विकसित देशों में ही इसके रिकार्डतोड़ मामले सामने आए हैं। राहत की बात ये है कि ये मामले तेजी से कंट्रोल भी हो रहे हैं।
पिछले सप्ताह डब्लूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अघानोम घेब्रेसियस ने कहा था कि मंकीपॉक्स बीमारी की पहचान 40 से ज्यादा देशों में हो चुकी है और इनमें से ज्यादातर देश यूरोप के हैं, जो आमतौर पर चिंता का विषय है। बता दें कि मंकीपॉक्स दशकों से मध्य और पश्चिमी अफ्रीकी देशों में लोगों को बीमार बनाने का काम कर रहा है। इन देशों में अभी तक 10 फीसदी से ज्यादा आबादी इस बीमारी से खत्म हो चुकी है। अभी तक ये बीमारी सिर्फ अफ्रीका तक ही सीमित थी लेकिन अब ये करीब 40 से ज्यादा देशों में है।
हालांकि अभी तक इन देशों में इस बीमारी से कोई भी मौत नहीं हुई है।
नाइजीरियन महामारी विशेषज्ञ ओयवाले टोमोरी का कहना है कि अगर डब्लूएचओ को मंकीपॉक्स के फैलने को लेकर वाकई में चिंता होती तो उसे कुछ वर्षों पहले ही आपात समीति बना देनी चाहिए थी। दरअसल 2017 में नाइजीरिया में मंकीपॉक्स फैला था और कोई नहीं जानता था कि अचानकर से इसके सैकड़ों मामले सामने आ जाएंगे। टोमोरी ने हैरानी जताई कि डब्लूएचओ ने समीति बनाने का ये फैसला उस वक्त लिया जब ये बीमारी श्वेत देशों में फैली।