ओस्टियोआर्थराइटिस और रूमेटाइड अर्थराइटिस में कौन है ज्यादा खतरनाक, एक्सपर्ट से जानिए दोनों के बीच अंतर

क्या आपको पता है कि आपकी दौड़ती-भागती जिंदगी में एक ऐसी खातरनाक बीमारी हो सकती है जो आपके शरीर और मन दोनों पर असर डालती है?

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Written By: Atul Modi | Published : August 28, 2023 7:45 PM IST

हमारा अनहेल्दी लाइफस्टाइल और डाइट का न केवल शरीर पर बल्कि हड्डियों पर भी असर पड़ता है। ऐसे में बहुत सी जोड़ो संबंधी बीमारी हो सकती हैं उनमें से एक है ओस्टियोआर्थराइटिस। ओस्टियोआर्थराइटिस एक आम जोड़ों का रोग है, जिसमें कार्टिलेज का नुकसान होता है, जो जोड़ों के सुरक्षा कवच का काम करता है। इसके कारण जोड़ों में सूजन, दर्द, जकड़न, और गतिशीलता में कमी होती है। ओस्टियोआर्थराइटिस के मुख्य कारण हैं: उम्र, मोटापा, चोट, संक्रमण, और आनुवंशिकता।

ओस्टियोआर्थराइटिस की मुख्य वजह

ओस्टियोआर्थराइटिस का मुख्य कारण बढ़ती उम्र होती है। जब हमारी उम्र बढ़ने लगती है, तो हमारे जोड़ों में संलग्न हड्डियों की क्षमता कम होने लगती है, जिससे वे ठीक से काम नहीं करते और उसके परिणामस्वरूप जोड़ों में दर्द और सूजन हो सकती है।

ओस्टियोआर्थराइटिस के लक्षण

इस बीमारी के मुख्य लक्षण जोड़ों में दर्द और स्थायी सूजन का होना है। यह दर्द आमतौर पर जोड़ों की अपर सरफेस पर होता है और यह धीरे-धीरे बढ़ता ही जाता है। इसके साथ ही, जोड़ों की चिकनाई कम होने से उनमें फिसलन की समस्या भी आ सकती है। ओस्टियोआर्थराइटिस आपके जोड़ों के कार्टिलेज को नुकसान पहुंचाती है। कार्टिलेज एक ऐसा टिश्यू है जो आपके हड्डियों के सिरों को ढकता है और उन्हें सहायता प्रदान करता है। जब कार्टिलेज कमजोर होता है तो हड्डियां एक-दूसरे से घर्षण करती हैं, जिससे दर्द, सूजन, स्थिरता, और मोबिलिटी में कमी होती है।

ओस्टियोआर्थराइटिस की पहचान

यदि किसी को जोड़ों में दर्द और सूजन की समस्या हो तो उन्हें डॉक्टर की सलाह लेने में बिलकुल भी देरी नहीं करनी चाहिए। डॉक्टर द्वारा आवश्यक परीक्षण कराने के बाद ही इसे पहचाना जा सकता है कि क्या उन्हें ओस्टियोआर्थराइटिस है या फिर कोई और समस्या है। ओस्टियोआर्थराइटिस के कारण जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न होती है, जो गतिविधि के साथ या दिन के अंत में बढ़ सकती हैं। प्रभावित जोड़ों की हिलने-ढुलने की क्षमता में कमी, जो चलने, सीढ़ियां चढ़ने, कुर्सी पर बैठने या उठने में परेशानी पैदा कर सकती है। प्रभावित जोड़ों के आसपास की मांसपेशियों में कमजोरी, पतलापन और संतुलन में हानि, जो गिरने का खतरा बढ़ा सकती है।

ओस्टियोआर्थराइटिस होने पर क्या करें और क्या न करें

ओस्टियोआर्थराइटिस के माइनर ट्रीटमेंट के साथ, रोजाना कुछ सावधानियों का पालन करना भी महत्वपूर्ण होता है। आपको अत्यधिक शारीरिक कठिनाइयों से बचाने के लिए अपने वजन को संभालना चाहिए और आपके डॉक्टर की सलाह के अनुसार व्यायाम करना चाहिए। साथ ही, सही पोस्चर बनाए रखने का प्रयास करें और एक्सट्रीम प्रेशर वाले कार्यों से बचें।

ओस्टियोआर्थराइटिस का उपचार

ओस्टियोआर्थराइटिस के उपचार के लिए विभिन्न विकल्प हो सकते हैं। डॉक्टर आपकी बीमारी के स्तर के आधार पर दवाओं का परामर्श करेंगे और आपको विशेष व्यायाम और आहार के सुझाव देंगे। अधिक गंभीर मामलों में, ऑर्थोपेडिक सर्जरी भी आवश्यक हो सकती है।

ओस्टियोआर्थराइटिस का रूमेटिक गठिया में अंतर

ऑस्टियोआर्थराइटिस आम तौर पर एक ही जोड़ में शुरू होता है और 65.1 वर्ष की आयु के बाद अधिक आम होता है

रूमेटाइड गठिया बहुत कम देखने को मिलती है। यह एक पुरानी, सूजन वाली, ऑटोइम्यून बीमारी है जो मुख्य रूप से जोड़ (सिनोबियम) की परत को लक्षित करती है, लेकिन यह आपके पूरे शरीर के अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। आमतौर पर इसमें कई जोड़ भी शामिल हो सकते हैं।

ओस्टियोआर्थराइटिस एक जोड़ों की बीमारी है जिसका मुख्य कारण लोगों में उम्र के साथ होने वाले शारीरिक बदलाव होते हैं। यदि आपको इसके लक्षण मिले, तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए ताकि सही उपचार किया जा सके और आप अपने शरीर को स्वस्थ रख सकें। ओस्टियोआर्थराइटिस की पहचान के लिए चिकित्सक शारीरिक परीक्षा, एक्स-रे, एमआरआई, या सीटी स्कैन का उपयोग कर सकते हैं। ओस्टियोआर्थराइटिस का कोई पक्का इलाज नहीं है, लेकिन कुछ उपायों से इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है। इसलिए आज के आर्टिकल में बताई टिप्स का पालन जरूर करें।

(Inputs: Dr. Aashish Chaudhry, Managing Director | Senior Consultant & Head, Department of Orthopaedics & Joint Replacement)

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