
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Written By: Ashu Kumar Das | Published : January 14, 2026 5:26 PM IST
Medically Verified By: Dr. Devindra Sood
Who Is at Higher Risk of Glaucoma Diabetes Age Family History : उम्र, फैमिली हिस्ट्री और डायबिटीज ये तीन मुख्य कारण हैं जो आपको काला मोतिया के जोखिम में डाल सकते हैं। नई दिल्ली के पंचशील पार्क स्थित मैक्स मल्टी स्पेशलिटी सेंटर के ऑप्थल्मोलॉजी स्ट (ग्लूकोमा सर्जरी, पीडियाट्रिक ग्लूकोमा) डॉ. देवेंद्र सूद के अनुसार, ग्लूकोमा जिसे काला मोतिया भी कहा (Kala Motia Kya Hota Hai) जाता है।
कई कारण ऐसे हैं जो किसी व्यक्ति को ग्लूकोमा के प्रति अधिक संवेदनशील बनाते हैं। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण होती है व्यक्ति की उम्र (Age), फैमिली हिस्ट्री (Family History) और डायबिटीज (Diabetes)।
डॉक्टर कहते हैं काला मोतिया को अक्सर उम्र के साथ जोड़कर देखा जाता है। लेकिन ये धारणा पूरी तरह से गलत है। आज के समय में जिस तरह से मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल डिवाइस का इस्तेमाल बढ़ रहा है, उस स्थिति में कम उम्र में भी काला मोतिया होने की संभावना ज्यादा रहती है। काला मोतिया जैसी आंखों से जुड़ी बीमारी जन्म से लेकर जीवन के किसी भी चरण में हो सकती है। रिसर्च बताती है कि भारत में ज्यादातर लोग 40 साल की उम्र के बाद काला मोतिया के लक्षणों को महसूस करते हैं।
इसका मुख्य कारण है कंप्लीट विजन टेस्ट न करवाना। दरअसल, 40 की उम्र के बाद जब लोगों को आंखों से कम दिखना, दूर का धुंधला नजर आना या छोटे अक्षर पढ़ने में दिक्कत आती है, तब वो कंप्लीट विजन टेस्ट करवाते हैं। जिसके कारण काला मोतिया का पता चलने में देरी होती है। शुरुआती काला मोतिया का पता लगाने के लिए कम उम्र में ही आई टेस्ट करवाना जरूरी है। इससे विजन लॉस और लेजर सर्जरी जैसी परेशानियों से बचा जा सकता है।
इस सवाल का सीधा जवाब है हां। ग्लूकोमा एक आनुवंशिक (Inherited) बीमारी भी हो सकती है। अगर आपके परिवार में मां, पिता, बहन, दादी और नानी को काला मोतिया हो चुका है तो आपमें ये बीमारी होने की संभावना सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा है। कई बार फैमिली हिस्ट्री से जुड़े लोगों में काला मोतिया बिना लक्षण के तेजी से बढ़ती है। डॉ. देवेंद्र सूद के अनुसार, जिन लोगों की फैमिली में काला मोतिया रहा है उन्हें हर 3 से 6 महीने में एक बार आई टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। नियमित आई टेस्ट से बीमारी का पता शुरुआती चरण में ही लग सकता है। इससे भविष्य में होने वाली अन्य समस्याओं से बचने में मदद मिलती है।
बढ़े हुए ब्लड शुगर के कारण टिशू में बदलाव होते हैं, इसलिए उन्हें कई तरह के काला मोतिया होने का खतरा होता है। डायबिटीज के मरीजों में काला मोतिया नॉन-डायबिटीज वालों की तुलना में ज्यादा आम है। डॉ. देवेंद्र सूद बताते हैं कि डायबिटीज के मरीजों का हाई ब्लड शुगर होने से आंखों पर पड़ने वाला दवाब ज्यादा होता है। इसकी वजह से आंखों के टिश्यू में बदलाव होते हैं।
बढ़ा हुआ ब्लडज शुगर आंख की रक्त नलिकाओं (Blood Vessels) को नुकसान पहुंचता है। इसी वजह से डायबिटीज के मरीजों में ग्लूकोमा के कई प्रकार विकसित हो सकते हैं। डायबिटीज के मरीजों को ग्लूकोमा के एक गंभीर और मुश्किल रूप का खतरा होता है जिसे नियो वैस्कुलर ग्लूकोमा कहा जाता है। अगर इस तरह के ग्लूकोमा का इलाज न किया जाए या अधूरा इलाज किया जाए, तो इससे अंधेपन तक की परेशानी होती है। इसलिए जिन लोगों को डायबिटीजहै उन्हें काला मोतिया से बचाव करने के लिए नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच करनी चाहिए। डायबिटीज के जिन मरीजों का ब्लड शुगर अक्सर हाई रहता है उन्हें रेगुलर बेसिस पर आई टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। इससे काला मोतिया के खतरे से बचा जा सकता है।
मायो क्लीनिक की रिपोर्ट बताती है कि काला मोतिया एक ऐसी आंखों की बीमारी है जिसमें आंख के अंदर का दबाव (Intraocular Pressure) बढ़ जाता है। इससे बढ़े हुए दबाव के कारण ऑप्टिक नर्व (Optic Nerve)को नुकसान पहुंचता है। ऑप्टिक नर्व आंखों से दिमाग तक देखने की जानकारी पहुंचाती है। मेडिकल में काला मोतिया को अक्सर चुपचाप नजर चुराने वाली बीमारी कहा जाता है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण बहुत ही हल्के होते हैं। आइए जानते हैं किन लोगों को काला मोतिया होने का खतरा ज्यादा रहता है और इसका कारण क्या है।
काला मोतिया एक गंभीर आंखों की बीमारी है जो धीरे-धीरे और बिना लक्षण के नजर को नुकसान पहुंचाती है। उम्र, डायबिटीज और फैमिली हिस्ट्री भी काला मोतिया जैसी बीमारी में अपना योगदान दे सकती है। इसलिए जिन लोगों के परिवार में किसी को काला मोतिया है या डायबिटीज की समस्या है उन्हें नियमित रूप से आई टेस्ट जरूर करवाना चाहिए।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।