किन लोगों को Heatstroke का ज्यादा खतरा होता है? और इससे कैसे बचाव किया जाए?

गर्मियों में लू की चपेट में आना जानलेवा हो सकता है और इसकी चपेट में कोई भी व्यक्ति आ सकता है। लेकिन हीट स्ट्रोक का खतरा कुछ लोगों में अन्य लोगों की तुलना में ज्यादा होता है। इस बारे में एक्सपर्ट्स से जानते हैं।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : April 30, 2026 7:20 PM IST

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Medically Verified By: Dr Seema Dhir

अप्रैल में ही जब इतनी धूप और गर्मी थी तो हम अंदाजा लगा सकते हैं कि मई और जून जैसे महीनों में क्या होने वाला है। गर्म तापमान और गर्म हवाएं जो मिलकर लू बनाती हैं, यानी हीटवेव। हीटवेव सिर्फ गर्म हवाएं नहीं होती हैं बल्कि इनका स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है और आप आंकड़े उठाकर देख सकते हैं हर साल न जाने कितने लोग सिर्फ गर्म हवा समझी जाने वाली लू की चपेट में आकर मर रहे हैं। लू की चपेट में आने की कंडीशन को हीट स्ट्रोक भी कहा जाता है। हीटवेव वैसे तो हर किसी के लिए जानलेवा हो सकती हैं, लेकिन देखा गया है कि कुछ लोगों में इनका खतरा ज्यादा रहता है। इस लेख में हम डॉ. सीमा धीर से जानेंगे कि आखिर किन लोगों को लू लगने का खतरा ज्यादा रहता है और इनसे बचाव कैसे किया जा सकता है।

मई और जून जैसे महीनों में हीट स्ट्रोक के मामले भी काफी ज्यादा बढ़ जाते हैं और इसके पीछे का कारण यह भी है कि लोगों को अभी तक भी हीट स्ट्रोक से जुड़ी पर्याप्त जानकारी नहीं है। हीट वेव का असर हमारे शरीर पर क्या पड़ता है, आपको इस बारे में इसलिए भी पता होना जरूरी है, क्योंकि जानकारी के अभाव के कारण कई बार यह मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

डॉ. सीमा धीर, यूनिट हेड और सीनियर कंसल्टेंट - इंटरनल मेडिसिन, आर्टेमिस हॉस्पिटल्स

पहले हीट स्ट्रोक को समझें

आपको पहले यह सझना होगा कि लू लगना सिर्फ गर्म हवाओं की चपेट में आकर बीमार पड़ना नहीं है, बल्कि हीट स्ट्रोक एक गंभीर और इमरजेंसी हेल्थ कंडीशन है तभी आप समझ पाएंगे कि लू से बचना क्यों जरूरी है?। इसमें शरीर का तापमान इतना ज्यादा बढ़ जाता है और शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता। आमतौर पर यह तब होता है जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक तेज धूप या बहुत ज्यादा गर्मी में रहता है।

किन लोगों को ज्यादा खतरा

वैसे तो लू की चपेट में कोई भी आ सकता है, लेकिन आपको इस बात का ध्यान भी रखना होगा कि कुछ लोगों में अन्य लोगों की तुलना में लू की चपेट यानी हीट स्ट्रोक होने का खतरा ज्यादा रहता है। इन लोगों में आमतौर पर निम्न शामिल होते हैं -

  • छोटे बच्चे व बुजुर्ग व्यक्ति - बच्चों का शरीर विकसित हो रहा होता है, इसलिए तापमान को नियंत्रित नहीं कर पाता है। जबकि बुजुर्गों को शरीर कमजोर हो चुका होता है, इसलिए तापमान को नियंत्रित करने की उसकी क्षमता कम हो जाती है।
  • डिहाइड्रेशन के मरीज - शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए पसीने का इस्तेमाल करता है और पसीना निकालने के लिए शरीर में पर्याप्त पानी होना जरूरी है। इसलिए जो लोग कम पानी पीते हैं या फिर डिहाइड्रेशन ग्रस्त हैं, उन्हें लू लगने का खतरा काफी ज्यादा रहता है।
  • धूप में काम करने वाले लोग - कुछ प्रकार के व्यवसाय जिनमें व्यक्ति को धूप में रहना पड़ता है, जैसे मजदूर, कर्मचारी, साइकल और बाइक चलाने वाले और ट्रैफिक पुलिस आदि।
  • क्रोनिक बीमारियों के मरीज - इसके अलावा अगर किसी व्यक्ति को कोई क्रोनिक बीमारी है जैसे हाई ब्लड प्रेशर, लो ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हार्ट डिजीज या मोटापे जैसी लाइफस्टाइल कंडीशन आदि तो उसे भी हीट स्ट्रोक होने के खतरा ज्यादा रहता है।
  • बैड लाइफस्टाइल - इसके अलावा कैफीन या अल्कोहल का सेवन करना भी बैड लाइफस्टाइल का एक हिस्सा है, जो शरीर में पानी की कमी पैदा करती है और इससे हीट स्ट्रोक होने का खतरा सीधा बढ़ जाता है।

(और पढ़ें - कैसे पता चलेगा कि आप पर्याप्त पानी नहीं पी रहे हैं?)

हीट स्ट्रोक से बचाव कैसे करें

हीट स्ट्रोक से बचाव करना है तो रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं, दिन में कम से कम दो बार नहाएं, ज्यादा धूप के समय बाहर न जाएं और अगर जाना जरूरी है तो पूरे कपड़े पहनें, सिर पर कपड़ा रखें और छाते का उपयोग करें। शराब, बीयर, कोल्ड ड्रिंक और हाई कैफीन से बचें, क्योंकि इनसे शरीर में पानी की कमी होती है। नारियल पानी और ORS जैसे इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक्स लेना भी हीट स्ट्रोक के खतरे को कम कर सकते हैं।

डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य सिर्फ हीट स्ट्रोक से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां लोगों तक पहुंचाना है। इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल हीट स्ट्रोक या किसी और बीमारी के इलाज के लिए नहीं किया जाना चाहिए और thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें।

FAQs

लू लगने पर क्या करना चाहिए

सबसे पहले मरीज को छाया में लेकर जाएं, पानी पिलाएं, उसके कपड़े ढीले करके गीले कपड़े के साथ उसके शरीर को ठंडा करने की कोशिश करें।

छोटे बच्चों में लू लगने के लक्षण?

अत्यधिक प्यास या निर्जलीकरण गहरे रंग का मूत्र सामान्य से अधिक चिड़चिड़ा शरीर का तापमान बढ़ना या 105°F (40.5°C) से अधिक तेज बुखार होना।

ज्यादा गर्मी से कौन सी बीमारी होती है?

हीटस्ट्रोक एक गंभीर बीमारी है जिसमें किसी व्यक्ति का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाता है, जो अत्यधिक गर्मी के संपर्क में आने या ज़ोरदार शारीरिक व्यायाम के परिणामस्वरूप होता है। ऐंठन, दौरे या कोमा। पसीना आ सकता है और त्वचा देखने में ठंडी लग सकती है।

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