मंकीपॉक्स की जानकारी नहीं? डब्लूएचओ की इन बातों से जानें आखिर क्या है मंकीपॉक्स और किन लोगों के लिए है ये खतरनाक

डब्लूएचओ के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस अघानोम घेब्रेसियस का कहना है कि अभी तक 29 देशों में मंकीपॉक्स के 1000 से ज्यादा मामलों की पुष्टि हो चुकी है।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : June 13, 2022 3:30 PM IST

दुनिया के अलग-अलग देशों में मंकीपॉक्स के बढ़ते मामलों के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने जानवरों से फैलने वाली इस बीमारी को लेकर चेतावनी जारी की है, जिसके अभी 1000 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। डब्लूएचओ के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस अघानोम घेब्रेसियस का कहना है कि अभी तक 29 देशों में मंकीपॉक्स के 1000 से ज्यादा मामलों की पुष्टि हो चुकी है हालांकि फिलहाल किसी की मौत की खबर नहीं है।

घेब्रेसियस का कहना है कि दुनिया के अलग-अलग देशों में बढ़ रहा मंकीपॉक्स का खतरा वास्तविक है और ये अगली महामारी का खतरा बन सकता है।

क्या है मंकीपॉक्स

मंकीपॉक्स का सबसे पहला मामला 1970 के डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो से सामने आया था, जो कि नौ अफ्रीकी देशों के इंसानों में फैला था। डब्लूएचओ का कहना है कि कुछ देशों ने अब इस वायरस के कम्युनिटी स्तर पर फैलने के शुरू होने का जिक्र किया है।

डब्लूएचओ की एक्सपर्ट डॉ. रोजमैंड लुईस का कहना है कि अब जो चीज अलग दिखाई दे रही है वो ये है कि ऐसे देशों में मंकीपॉक्स के मामले देखने को मिल रहे हैं, जहां आमतौर पर मंकीपॉक्स के मामले कभी सामने नहीं आए थे। ये बहुत ही असामान्य है।

किन लोगों को डरने की जरूरत

डब्लूएचओ ने वायरस को फैलने से रोकने के लिए व्यापक स्तर पर टीकाकरण की फिलहाल कोई सिफारिश नहीं की है लेकिन संस्थान ने देखभाल के लिए कुछ दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जो इस वायरस की रोकथाम के लिए जरूरी हैं। आइए जानते हैं डब्लूएचओ द्वारा जारी सुरक्षा के 5 नियमः

1-वे लोग, जिनमें लक्षण हैं उन्हें घर में ही पूरी तरह से अलग हो जाना चाहिए और डॉक्टर से सलाह-मशविरा करना चाहिए। इसके साथ ही परिवार के दूसरे सदस्यों को संक्रमित व्यक्ति के करीबी संपर्क से बचना चाहिए।

2-मरीजों के द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली चीजों जैसे चादर, जरूरी चीजें को हटाते या फिर कैरी करते हुए साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए।

3-सभी मरीजों को जब तक स्किन पर से सभी घाव पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाते हैं तब तक किसी भी यौन गतिविधि में शामिल नहीं होना चाहिए। ऐसा तब तक करना चाहिए, जब तक नई स्किन नहीं आ जाती।

4-किशोरों, गर्भवती महिलाओं, जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है या फिर वे लोग, जो गंभीर रूप से किसी इंफेक्शन का शिकार हैं उन्हें अपने स्वास्थ्य पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए और उचित देखभाल के लिए अस्पताल में भर्ती हो जाना चाहिए।

5-संक्रमित महिला से जन्में बच्चे की निरंतर निगरानी होनी चाहिए और उन्हें दूध पिलाने के बाद फिर से उनके स्वास्थ्य की जांच करने की जरूरत है।

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