
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Updated : April 1, 2026 4:14 PM IST
Medically Verified By: Dr Shruti Ghatalia
बच्चों के मिलिया
Bacho Ke Chehre Par Chote Safed Dane Hone Ka Karan: एक मां या पिता के लिए अपने नवजात शिशु की कोमल त्वचा पर किसी भी तरह का दाना या निशान देखना चिंता का विषय बन जाता है। अक्सर जन्म के कुछ ही दिनों के भीतर बच्चों के चेहरे, खासकर नाक, गाल और ठुड्डी पर छोटे-छोटे सफेद या हल्के पीले रंग के दाने उभर आते हैं। यदि आपके बच्चे के चेहरे पर भी ऐसे दाने दिख रहे हैं, तो घबराएं नहीं।
ज़िनोवा शाल्बी अस्पताल, घाटकोपर, मुंबई की बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर श्रुति घाटलिया बताती हैं कि मेडिकल भाषा में इन्हें 'मिलिया' (Milia) कहा जाता है। यह किसी भी व्यक्ति को हो सकते हैं। इस विषय पर थोड़ा विस्तार से जानने के लिए हमने डॉक्टर से कुछ सवाल पूछे। आइए जानते हैं एक्सपर्ट ने क्या जानकारी दी है।
जी हां, बिल्कुल। नवजात शिशुओं के चेहरे पर दिखने वाले इन छोटे, मोतियों जैसे सफेद दानों को ही 'मिलिया' कहा जाता है। आम बोलचाल में कई लोग इन्हें 'मिल्क स्पॉट्स' भी कहते हैं, हालांकि इनका मां के दूध या फॉर्मूला मिल्क से कोई सीधा संबंध नहीं होता है। आंकड़ों की मानें तो दुनिया भर में लगभग 40% से 50% नवजात शिशु मिलिया के साथ ही पैदा होते हैं या जन्म के कुछ सप्ताह बाद उनमें यह लक्षण दिखाई देते हैं।
बड़ों में मिलिया होने के कारण अलग हो सकते हैं, लेकिन नवजात शिशुओं में इसके पीछे की वजह बिल्कुल प्राकृतिक और सामान्य होती है:
हमारी त्वचा लगातार पुरानी कोशिकाओं को हटाकर नई कोशिकाएं बनाती है। केराटिन (Keratin) त्वचा और बालों में पाया जाने वाला एक मजबूत प्रोटीन है। जब नवजात शिशु की मृत त्वचा कोशिकाएं (Dead Skin Cells) बाहर निकलने के बजाय त्वचा की सतह के ठीक नीचे छोटी थैलियों में फंस जाती हैं, तो वे सख्त होकर छोटे सफेद दानों का रूप ले लेती हैं।
जन्म के समय शिशुओं की त्वचा के रोम छिद्रों (Pores) और पसीने की ग्रंथियां पूरी तरह से विकसित नहीं होती हैं। इस कारण भी त्वचा की मृत कोशिकाएं आसानी से बाहर नहीं निकल पातीं।
गर्भावस्था के दौरान मां के शरीर से बच्चे में ट्रांसफर होने वाले हार्मोन्स भी बच्चे की तेल ग्रंथियों को उत्तेजित कर सकते हैं, जिससे अस्थाई तौर पर त्वचा पर ऐसे दाने दिख सकते हैं।
अक्सर माता-पिता मिलिया को 'बेबी एक्ने' यानी शिशु के मुंहासे समझ लेते हैं। हालांकि, इन दोनों में स्पष्ट अंतर होता है-
रंग और सूजन- मिलिया छोटे, मोती जैसे सफेद या पीले दाने होते हैं जिनमें कोई दर्द, खुजली या सूजन नहीं होती। वहीं, बेबी एक्ने लाल रंग के होते हैं और उनके आसपास की त्वचा भी लाल व सूजी हुई दिखाई दे सकती है।
समय- मिलिया आमतौर पर जन्म के समय या उसके तुरंत बाद मौजूद होते हैं, जबकि बेबी एक्ने बच्चे के जन्म के 2 से 4 सप्ताह बाद दिखाई देते हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, नवजात शिशुओं में मिलिया के लिए किसी भी तरह के इलाज या दवा की आवश्यकता नहीं होती है। यह पूरी तरह हानिरहित (Harmless) होते हैं और कुछ ही हफ्तों या 1-2 महीने के भीतर अपने आप गायब हो जाते हैं।
दबाएं या फोड़ें नहीं- इन दानों को कभी भी दबाने, फोड़ने या खरोंचने की कोशिश न करें। ऐसा करने से बच्चे की नाजुक त्वचा पर इंफेक्शनहो सकता है या परमानेंट दाग पड़ सकते हैं। केमिकल और ऑयली प्रोडक्ट्स से बचें- बच्चे के चेहरे पर किसी भी तरह की एडल्ट क्रीम, लोशन, या भारी तेल का इस्तेमाल न करें। इससे रोम छिद्र और बंद हो सकते हैं।
1) बच्चे के चेहरे को रोजाना गुनगुने पानी और शिशुओं के लिए सुरक्षित माइल्ड क्लींजर से धोएं।
2) चेहरा धोने के बाद मुलायम तौलिये से त्वचा को रगड़ने के बजाय हल्के हाथों से थपथपाकर (Pat dry) सुखाएं।
3) यदि दानों के आसपास की त्वचा अत्यधिक लाल हो जाए, उसमें से पानी या मवाद बहने लगे, या बच्चे को बुखार आ जाए, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।