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What is White Fungus in Hindi: भारत में अभी ब्लैक फंगस (Black Fungus) का कहर थमा नहीं कि व्हाइट फंगस (White Fungus in India Cases) ने दस्तक दे दी है। देश के कई राज्यों में कोरोना मरीजों में ठीक होने के बाद भी दिख रहे ब्लैक फंगस ने लोगों को डरा कर रख दिया है। इस बीच पटना (बिहार) में व्हाइट फंगस (White Fungus) के मामले सामने आने से वहां के लोगों में डर का माहौल है। बताया जा रहा है कि ब्लैक फंगस से अधिक खतरनाक व्हाइट फंगस (White fungus in COVID patients) साबित हो सकता है। कई रिपोर्ट्स में ये बात भी सामने आई है कि यह फंगस (White Fungus) गुजरात और महाराष्ट्र में भी तेजी से फैल रहा है। देश में ब्लैक फंगस से अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है। हाल ही में असम के नागांव जिले में एक 27 वर्षीय व्यक्ति की मौत ब्लैक फंगस (mucormycosis) से हुई है। हालांकि, यह व्यक्ति कोविड से ठीक हो चुका था। आइए जानते हैं क्या है व्हाइट फंगस (What is White Fungus) और इसके लक्षण (Symptoms of White Fungus), कारण, रिस्क फैक्टर्स....
बिहार में ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों के बीच अब राजधानी पटना में व्हाइट फंगस के 4 मरीज सामने आए हैं, जिससे लोगों में डर बैठ गया है। विशेषज्ञ बता रहे हैं कि व्हाइट फंगस ब्लैक फंगस से भी अधिक घातक है। इन चारों मरीजों में कोरोनावायरस नहीं था, लेकिन उनमें कोविड के ही लक्षण नजर आ रहे थे। टेस्ट रिपोर्ट में कोरोना नेगेटिव आया, पर व्हाइट फंगस से संक्रमित होने का पता चला।
व्हाइट फंगस भी फेफड़ों को संक्रमित करता है। इसका पता लगाने के लिए एचआरसीटी चेस्ट स्कैन किया जाता है। इस टेस्ट में कोरोना के लक्षण फेफड़ों में दिखाई देते हैं। व्हाइट स्कैन को बलगम सैंपल लेकर भी जांच की जाती है। एक बार व्हाइट फंगस हो जाए, तो यह आपके कई अंगों जैसे पेट, किडनी, दिमाग, त्वचा, मुंह, प्राइवेट पार्ट्स आदि को भी संक्रमित कर सकता है। जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, जो डायबिटीज के मरीज हैं, कोरोना इलाज के दौरान स्टेरॉयड का सेवन कर रहे थे, उनमें व्हाइट फंगस अधिक होता है।
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, इस प्रकार के फंगी (Fungi) पर्यावरण में रहते हैं। यह मिट्टी, पत्तियों, खाद के ढेर, दूषित पानी आदि में पाया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर प्रतिरक्षा (Weak Immunity) वाले लोगों, डायबिटीज रोगियों और स्टेरॉयड लेने वालों में व्हाइट फंगस होने का जोखिम अधिक होता है।
यदि किसी की इम्यूनिटी पावर कमजोर है, तो इससे व्हाइट फंगस होने की संभावना बढ़ जाती है। इससे बचने के लिए साफ-सफाई, साफ-स्वच्छ पानी का सेवन जरूरी है, क्योंकि यह फंगस पानी में भी मौजूद होता है। कोरोना के मरीजों में व्हाइट फंगस होने का खतरा अधिक होता है, क्योंकि यह लंग्स को प्रभावित करता है। कैंसर के मरीज, डायबिटिक, कमजोर इम्यूनिटी वाले, लंबे समय से स्टेरॉएड दवाओं का सेवन करने वाले, ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहने वाले कोरोना के मरीजों को खास सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि इनमें व्हाइट फंगस होने का खतरा अधिक होता है।
व्हाइट फंगस के मरीजों में भी कोरोना जैसे ही लक्षण नजर आते हैं, लेकिन उनका टेस्ट नेगेटिव आता है। इस संक्रमण का पता सीटी स्कैन, एक्सरे के जरिए लगाया जाता है। यह फेफड़ों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। साथ ही किडनी, पेट, त्वचा, नाखूनों, प्राइवेट पार्ट्स में किसी भी तरह की समस्या या बदलाव दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।