किन महिलाओं को है ओवेरियन कैंसर का ज्यादा खतरा? बता रहे हैं डॉक्टर

8 मई को वर्ल्ड ओवेरियन कैंसर डे मनाया जाता है। इस खास मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं किन महिलाओं को इस बीमारी का खतरा ज्यादा रहता है।

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Written By: Ashu Kumar Das | Published : May 9, 2026 9:00 AM IST

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Medically Verified By: Dr. Vishnu Hari

ओवेरियन कैंसर या ओवरी के कैंसर को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती स्टेज में इसके लक्षण साफ तौर पर दिखाई नहीं देते हैं। यही वजह है कि कई महिलाओं में ओवेरियन कैंसर जैसी बीमारी का पता तब चलता है, जब कैंसर एडवांस स्टेज में पहुंच चुका होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट बताती है कि वैश्विक स्तर पर हर साल लगभग 3 लाख से ज्यादा महिलाएं ओवेरियन कैंसर की चपेट में आती हैं। महिलाओं में ओवेरियन कैंसर के प्रति जागरूकता लाने के लिए हर साल 8 मई को वर्ल्ड ओवेरियन कैंसर डे मनाया जाता है। ओवेरियन कैंसर डे के मौके हम आपको बताने जा रहे हैं किन महिलाओं को इस बीमारी का खतरा ज्यादा रहता है और क्यों?

किन महिलाओं को है ओवेरियन कैंसर का ज्यादा खतरा?

1. बढ़ती उम्र के कारण ओवेरियन कैंसर

फरीदाबाद के सेक्टर- 8 स्थित सर्वोदय हॉस्पिटल के सीनियर ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. विष्णु हरि के अनुसार, ओवेरियन कैंसर के प्रमुख कारणों में से एक है उम्र। 10 में से 7 मामलों में ओवेरियन कैंसर 50 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं में देखा जाता है। ज्यादातर मामलों में मेनोपॉज के बाद महिलाओं में ओवेरियन कैंसर के मामले दर्ज किए जाते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि कम उम्र की महिलाएं ओवेरियन कैंसर से पूरी तरह सुरक्षित हैं। कुछ मामलों में ओवेरियन कैंसर 20 से 30 साल की महिलाओं में भी देखा जाता है।

2. फैमिली हिस्ट्री में ओवेरियन कैंसर होने पर

डॉक्टर के मुताबिक करीब 10 से 15 प्रतिशत ओवेरियन कैंसर के मामलों के पीछे फैमिली हिस्ट्री होती है। इसके लिए BRCA1 और BRCA2 नाम के जीन इसमें सबसे अहम माने जाते हैं। यही जीन ब्रेस्ट कैंसर के खतरे से भी जुड़े होते हैं। अगर किसी महिला में BRCA1 जीन म्यूटेशन है, तो उसे ओवेरियन कैंसर होने का खतरा करीब 44 प्रतिशत तक हो सकता है। वहीं BRCA2 म्यूटेशन वाली महिलाओं में यह खतरा लगभग 17 प्रतिशत तक माना जाता है। जिन महिलाओं की फैमिली में ओवेरियन कैंसर ही हिस्ट्री रही है उन्हें हर साल ओवेरियन कैंसर से जुड़ा मेडिकल टेस्ट जरूर करवाना चाहिए।

_ovarian cancer treatment हार्मोनल बदलावों के कारण भी ओवेरियन कैंसर हो सकता है। (File Image)

3. कभी प्रेग्नेंसी कंसीव न करने वाली महिलाएं

जिन महिलाओं ने कभी बच्चा पैदा नहीं किया या पहली बार देर से मां बनीं, उनमें भी ओवेरियन कैंसर का जोखिम ज्यादा होता है। दरअसल, जिन महिलाओं में लंबे समय तक लगातार ओव्यूलेशन होता रहता है, उनकी कोशिकाओं में बदलाव का खतरा भी ज्यादा रहता है। इससे ओवेरियन कैंसर का खतरा कई गुना ज्यादा होता है।

4. एंडोमेट्रियोसिस से जूझने वाली महिलाएं

एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित महिलाओं में ओवेरियन कैंसर का जोखिम सामान्य महिलाओं की तुलना में ज्यादा होता है।

5. मोटापे से पीड़ित

अधिक वजन और मोटापा भी शरीर में कई प्रकार के हार्मोनल बदलाव लाता है। इन बदलावों के कारण कई प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ता है। इसमें ओवेरियन कैंसर भी शामिल है। डॉ. विष्णु हरि का कहना है कि जिन महिलाओं के शरीर का वजन ज्यादा होता है, उनमें ओवेरियन कैंसर का खतरा दोगुना से भी ज्यादा होता है।

Ovarian Cancer ओवेरियन कैंसर का पता अक्सर देर से चलता है (FIle image)

कैसे कम किया जा सकता है ओवेरियन कैंसर का खतरा?

डॉ. विष्णु हरि के अनुसार, महिलाओं में बढ़ते ओवेरियन कैंसर के खतरे को कम करने के लिए, सही खानपान और लाइफस्टाइल को अपनाना बहुत जरूरी है। इसके अलावा प्रेग्नेंसी, मेनोपॉज और पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं का घरेलू इलाज करने की बजाय डॉक्टर से इस बारे में बात करना जरूरी है।

Disclaimer : डॉ. विष्णु हरि के साथ हुई बातचीत के आधार पर हम यह सकते हैं कि ओवेरियन कैंसर एक गंभीर बीमारी है, लेकिन सही जानकारी, समय पर जांच और जागरूकता से इसका खतरा कम किया जा सकता है। खासतौर पर जिन महिलाओं के परिवार में कैंसर की हिस्ट्री है या जिनमें ऊपर बताए गए जोखिम मौजूद हैं, उन्हें ओवेरियन कैंसर के टेस्ट नियमित रूप से करवाने चाहिए।

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