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Medically Verified By: Dr Arun Kumar Goel
Lungs Cancer Kaise Thik Kare: सिर्फ स्मोकिंग करने वाले के ही लंग्स कैंसर नहीं होता है, बल्कि वो लोग जो धुएं के आसपास रहते हैं, तंबाकू का सेवन करते हैं, पॉल्यूशन आदि की वजह से भी किसी भी व्यक्ति को लंग्स कैंसर हो सकता है। लंग्स कैंसर को हिंदी में फेफड़ों का कैंसर कहा जाता है जो असामान्य कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि के कारण होता है। आमतौर पर ये फेफड़ों में ही होता है, लेकिन ये शरीर के किसी अन्य हिस्से से भी फैल सकता है। अन्य हिस्सों के कैंसर की तरह ही लंग्स कैंसर की भी अलग-अलग स्टेजिस होती हैं।
कई लोगों को तो पहली स्टेज में पता ही नहीं चल पाता है कि वे लंग्स कैंसर से पीड़ित हैं। इसलिए हमने कैंसर अस्पताल, सोनीपत के चेयरमैन और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. अरुण कुमार गोयल से बात की और पूछा कि 'लंग्स कैंसर की कौन से स्टेज सबसे खतरनाक होते है? कैसे पता चलेगा कि कैंसर किस स्टेज में है?' आइए आपको बताते हैं डॉक्टर ने क्या कहा।
डॉक्टर ने बताया कि लंग कैंसर की चार स्टेज होती हैं। इसे ट्यूमर के साइज के आधार पर तय किया जाता है। साथ ही यह देखा जाता है कि कैंसर आसपास के ऊतकों (Tissues), लिम्फ नोड्स (Lymph Nodes) और दूसरे अंगों तक तो नहीं पहुंचा है। आइए पहले आपको बताते हैं कि ये लिम्फ नोड्स क्या होता है।
लिम्फ नोड्स को लसीका ग्रंथि भी कहा जाता है। ये शरीर में छोटे बीन की शेप जैसी होती हैं जो डिफेंस सिस्टम का एक अहम हिस्सा होती हैं। अगर हम सरल शब्दों में समझने की कोशिश करें तो शरीर में तरल पदार्थों, पोषक तत्वों और वेस्ट प्रोडक्ट को ले जाने वाली नलियों के नेटवर्क को लिम्फ नोड्स कहा जाता है।
यानी कि लिम्फ नोड्स हमारे शरीर में फिल्टर की तरह काम करता है, जिसमें बैक्टीरिया, वायरस और कैंसर कोशिकाएं जैसे हानिकारक पदार्थ छनते हैं। वह इन पदार्थों को नष्ट करने और शरीर को संक्रमण से बचाने के लिए लिम्फोसाइट्स (एक प्रकार की श्वेत रक्त कोशिका) का उत्पादन करता हैं। लिम्फ नोड्स हमारे इम्यून सिस्टम का हिस्सा है, जो वायरस और बैक्टीरिया से शरीर का बचाव करते हैं।
कैंसर अचानक से नहीं होता है बल्कि इसकी भी स्टेज होती हैं। हमने डॉक्टर से बात की और विस्तार से जाना कि लंग्स कैंसर की कौन सी स्टेज सबसे ज्यादा खतरनाक होती है और कैसे पता किया जा सकता है कि हम कैंसर के किस स्टेज में हैं।
स्टेज 0 का मतलब है कि कैंसर अभी सिर्फ फेफड़े या ब्रोन्कस की ऊपरी परत में ही है। यह फेफड़े के अन्य हिस्सों और या उसके बाहर नहीं फैला है। आइए साथ ही आपको बताते हैं कि ब्रोन्कस क्या होता है।
ब्रोन्कस (Bronchus) एक श्वास नली है जो विंड पाइप (windpipe) से फेफड़ों तक हवा ले जाती है। आपके फेफड़ों में मुख्य वायु मार्ग, जिन्हें ब्रांकाई कहते हैं को छोटे-छोटे मार्गों में विभाजित हो जाते हैं। आसान शब्दों में कहें तो ब्रोन्कस उस नली को कहते हैं, जिससे होकर हवा फेफड़ों में प्रवेश करती है।
लंग्स कैंसर की स्टेज 1को लेकर डॉक्टर ने बताया कि 'कैंसर पेफड़ों के अंदर बढ़ रहा है, लेकिन अभी उसने फेफड़ों के बाहर फैलना शुरू नहीं किया है।' यानी कि फेफड़ों के कैंसर की स्टेज 1 प्रारंभिक अवस्था है, जिसमें ट्यूमर छोटा होता है और केवल फेफड़े के अंदर तक ही सीमित रहता है।
इस अवस्था में कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों या पास के लिम्फ नोड्स में नहीं फैला होता है। अक्सर शुरुआती लक्षणों का पता नहीं चलता, लेकिन अगर यह इस स्तर पर पता चल जाए तो इसका इलाज अपेक्षाकृत आसान होता है, जिसमें आमतौर पर सर्जरी शामिल होती है।
स्टेज 2 के बारे में डॉक्टर ने बताया कि 'इस स्टेज में कैंसर आसपास के लिंफ नोड्स या एक ही फेफड़े के अलग-अलग लोब में फैल चुका है।' विस्तार से समझें तो फेफड़ों के कैंसर की स्टेज 2 का मतलब है कि ट्यूमर बड़ा हो गया है, लेकिन अभी भी केवल फेफड़ों तक ही सीमित हो सकता है या यह पास के लिम्फ नोड्स तक फैल गया है।
इस स्टेज में कैंसर फेफड़ों के भीतर की परत (pleura) या फेफड़े के पास के ऊतकों जैसे डायाफ्राम तक फैल सकता है। स्टेज 1 की तुलना में यह थोड़ा अधिक एडवांस होता है, लेकिन फिर भी इलाज संभव है। इसमें अक्सर सर्जरी, कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी शामिल होती है। इस स्टेज में भी शुरुआती निदान महत्वपूर्ण है।
अगली स्टेज 3 है जिसके बारे में डॉक्टर अरुण कुमार का कहना है कि 'इस स्टेज में कैंसर आसपास के लिंफ नोड्स या एक ही फेफड़े के अलग-अलग लोब में फैल चुका है।' यानी कि फेफड़ों के कैंसर की स्टेज 3 का मतलब है कि ट्यूमर बड़ा हो गया है और फेफड़े के पास के लिम्फ नोड्स (जैसे छाती के केंद्र में) तक फैल गया है।
यह कैंसर छाती की दीवार, डायाफ्राम या हृदय के पास के अंगों तक भी फैल सकता है। स्टेज 3 को दो उप-प्रकारों (3A और 3B) में बांटा गया है, जो फैलाव की सीमा पर निर्भर करता है। इस अवस्था में इलाज में अक्सर कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी और कभी-कभी सर्जरी का कॉम्बिनेशन शामिल होता है।
फेफड़ों के कैंसर की स्टेज 4 सबसे एडवांस स्टेज है, जिसमें कैंसर फेफड़ों के दूसरे हिस्से, फेफड़े या दिल के आसपास के फ्लूइड, या शरीर के दूसरे दूर के अंगों जैसे हड्डियों, दिमाग या लिवर तक फैल चुका होता है। इस स्टेज में कैंसर का इलाज आमतौर पर नियंत्रण और लक्षणों से राहत पर केंद्रित होता है, जिसमें कीमोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी या रेडिएशन शामिल हो सकते हैं।
जी हां, अगर फेफड़ों के कैंसर को शुरुआती स्टेज में ही पहचान लिया जाए तो सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी की मदद से इसका इलाज संभव है।
जी हां, जो लोग धूम्रपान नहीं करते हैं, उन्हें भी फेफड़ों का कैंसर हो सकता है। पैसिव स्मोकिंग, प्रदूषण और आनुवंशिक कारणों से फेफड़ों का कैंसर हो सकता है।
ठीक से सांस न ले पाना, बार-बार सांस फूलना, लंबे समय से खांसी आना, खांसने व गहरी सांस लेने पर सीने में दर्द होना आदि फेफड़े खराब होने या फेफड़ों से जुड़ी किसी बीमारी का संकेत हो सकता है।
सिगरेट पीने से फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां जैसे कैंसर, हार्ट से जुड़े रोग और अन्य बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।