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Cataract Surgery: मोतियाबिंद की सर्जरी कब और किस मौसम में करवाना चाहिए, आंखों के डॉक्‍टर से जानिए पूरी जानकारी

Best Season For Cataract Surgery: अगर आप मोतियाबिंद की सर्जरी करवाने पर विचार कर रहे हैं और निर्णय नहीं ले पा रहे हैं कि सर्जरी कब और किस मौसम में कराएं तो डॉ. शांतनु मुख़र्जी से जानिए मोतियाबिंद की सर्जरी के बारे में...

Written By Atul Modi
Published : April 15, 2021 6:59 PM IST

डॉ. शांतनु मुख़र्जी से जानिए मोतियाबिंद की सर्जरी के बारे में...

मोतियाबिंद (Cataract) में आंखों के कुदरती लेंस सफेद या धब्बेदार होने लगते हैं, जिससे इसकी पारदर्शिता पर असर आता है, धुंधलापन आ जाता है, और रौशनी फैली सी दिखती है। मोतियाबिंद में मरीज को दर्द नहीं होता, इसलिए रोगी शुरुआत में ज़्यादा ध्यान नहीं देते। इसमें चश्में का नंबर भी बढ़ता घटता रहता है, उसको भी रोगी नज़रअंदाज़ कर देता है। सर्जरी से ही इसका पूर्णत: इलाज हो सकता है।

शार्प साईट आई हॉस्पिटल के वरिष्‍ठ नेत्र चिकित्सक डॉ. शांतनु मुख़र्जी के अनुसार, "मोतियाबिंद की सर्जरी के लिए पहले उसके पकने का इंतज़ार करना पड़ता था, अब सर्जरी के लिए मोतियाबिंद के पकने की ज़रूरत नहीं होती। पहले बड़ा चीरा लगाकर सर्जरी होती थी, अब मात्र 2 मिलीमीटर के छोटे चीरे से अत्याधुनिक मोतियाबिंद सर्जरी की जाती है। इस सर्जरी से मरीज़ की रिकवरी भी काफी तेज़ होती है।"

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मोतियाबिंद किसी भी उम्र में हो सकता है। इसकी शुरुआत ही इसकी सर्जरी का सबसे अच्छा समय है, और किसी भी अवसर का इंतज़ार करने की आवश्यकता नहीं होती। सर्जरी को समय से करवा कर हम आंखों पर पड़ने वाले दबाव से आंखों को बचा सकते हैं।

मोतियाबिंद की सर्जरी किस मौसम में कराना चाहिए?

आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि मोतियाबिंद की सर्जरी सर्दी के मौसम में ठीक रहती है, जिस से सर्जरी के बाद का ख्याल रखना आसान रहता है, सर्दी में नमी और पसीना दोनों ही कम होते हैं, इसलिए इन्फेक्शन का डर भी नहीं रहता। डॉ. शांतनु बताते हैं, "किसी भी मौसम में मोतियाबिंद सर्जरी से कोई नुकसान या तकलीफ नहीं होती। मेडिकल साइंस की निरंतर तरक्की से कभी भी सर्जरी करवाई जा सकती है और कोई एलर्जी नहीं होती।"

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मोतियाबिंद का ऑपरेशन होने के बाद बरतें सावधानी

मोतियाबिंद का ऑपरेशन होने के बाद आप अपने रोजमर्रा के कार्य आपके डॉक्टर द्वारा बताई गई कुछ सावधानियां बरतते हुए अगले ही दिन से दोबारा आरम्भ कर सकते हैं। सावधानियां जैसे- अपनी आंखों को धूल मिटटी से बचाना, व्यायाम न करना, धुंए से आंखों को बचाना, सीधा पानी आंखों पर न मारना, आंखों को न रगड़ना एवं डॉक्टर द्वारा दिया गया काला चश्मा जरूर पहनना। कुछ दिन इन सावधानियों को बरतते हुए आप अपना जीवन एक नई रौशनी के साथ व्यतीत कर सकते हैं। सर्जरी के बाद डॉक्टर द्वारा सुझाए गए दिनों में अपनी आंखों की जांच जरूर करवाएं।

डॉ. शांतनु बताते हैं, "एक आंख में मोतियाबिंद बनने पर सारा ज़ोर दूसरी आंख पर पड़ता है, और वो कमज़ोर होने लगती है। ये भी एक और वजह है, जिसके लिए डॉक्टर कहते हैं कि सर्जरी को जल्द ही करवाना चाहिए। मोतियाबिंद बनते ही मौसमों के बदलने का इंतज़ार बिलकुल न करें, तुरंत ही उसकी सर्जरी करवायें। इससे रोजमर्रा के कार्य करने में आसानी होती है, जीवनस्तर में सुधार होता है, पढ़ना, वाहन चलाना, व्यायाम और अपने बाकि सब काम करना भी सरल हो जाता है।"

विशेषज्ञों के अनुसार, मोतियाबिंद को किसी भी मौसम में बिना किसी डर के, डॉक्टर की सलाह से, समय से करवाएं, इसकी सर्जरी बिलकुल सुरक्षित है। आंखें ठीक रहने से हम किसी पर निर्धारित होने से भी बचते हैं। दिखाई देने में तकलीफ होने से गिरने या चोट लगने का भी डर रहता है, इन सब से बचने के लिए शीघ्र सर्जरी करवा कर हर मौसम का भरपूर आनंद उठाएं।

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