ऑर्गन डोनेशन: मौत के बाद कौन-कौन से अंग दान किए जा सकते हैं? जानें कितने लोगों को मिल सकती है नई जिंदगी
मौत के बाद इंसान अंगदान करके कई जिंदगियां बचा सकता है। लिवर, किडनी और हृदय दान करके लोगों के जीवन में रोशनी डाल सकता है। आइए, जानते हैं मौत के बाद कौन-कौन से अंग दान किए जा सकते हैं?
Organ Donation: हर साल 3 अगस्त को राष्ट्रीय अंगदान दिवस (National Organ Donation Day) मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक करना है, ताकि जरूरतमंद लोगों की जान बचाई जा सके। अंगदान एक ऐसा फैसला है, जो किसी व्यक्ति की मौत के बाद भी कई लोगों को नई जिंदगी दे सकता है। NOTTO के अनुसार, भारत में हर साल हजारों मरीजों का किडनी, लिवर, हार्ट और फेफड़ों का ट्रांसप्लांट होता है। लेकिन, आज भी देश में जरूरत के मुकाबले अंगदान करने वालों की संख्या बहुत कम है। यही वजह है कि समय पर अंग नहीं मिलने की वजह से कई लोग अपनी जान गंवा देते हैं।
ऑर्गन डोनेशन का मतलब है कि कोई व्यक्ति अपने अंग और ऊतक दान करता है, ताकि जिन लोगों के अंगों ने काम करना बंद कर दिया है, उनका ट्रांसप्लांट किया जा सके। देश में यह प्रक्रिया मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम (THOTA) के तहत की जाती है। आइए, आज National Organ Donation Day के मौके पर जानते हैं कि मौत के बाद कौन-कौन से अंग दान किए जा सकते हैं और अंगदान करके एक व्यक्ति कितने लोगों को नया जीवन दे सकता है?
एक ऑर्गन डोनर कितने लोगों को नई जिंदगी दे सकता है?
NOTTO के अनुसार, एक ऑर्गन डोनर अंगदान करके 8 लोगों तक की जान बचा सकता है। इसलिए लोगों को ऑर्गन डोनेट करने के लिए जागरूक किया जाता है। वहीं, ऊतकों के दान से भी कई लोगों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है। जैसे- कॉर्निया दान से दो लोगों की आंखों की रोशनी वापस लाई जा सकती है।
मौत के बाद कौन-कौन से अंग दान किए जा सकते हैं?
NOTTO के अनुसार, मौत के बाद इन अंगों को दान किया जा सकता है-
- दोनों किडनी
- लिवर
- हार्ट
- दोनों फेफड़े
- अग्न्याशय
- छोटी आंत
इसके अलावा, कई तरह के ऊतक यानी टिशू भी दान किए जा सकते हैं-
- आंख की कॉर्निया
- त्वचा और हड्डियां
- हृदय के वाल्व
- रक्त वाहिकाएं
- टेंडन और लिगामेंट्स
ऑर्गन डोनेशन कितने प्रकार का होता है?
NOTTO के अनुसार, ऑर्गन डोनेशन 2 प्रकार का होता है। इसमें एक जीवित अंगदान (Living Donation) और मृत्यु के बाद अंगदान (Deceased Donation) शामिल हैं।
- जीवित अंगदान में स्वस्थ व्यक्ति अपने जीवनकाल में ही कुछ अंग या ऊतक दान कर सकता है। जीवित अंगदान में व्यक्ति एक किडनी, लिवर का एक हिस्सा या अग्न्याशय का एक हिस्सा दान कर सकता है।
- मृत्यु होने के बाद भी व्यक्ति का अंगदान हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति की ब्रेन स्टेम डेथ हो जाती है, तो परिवार की सहमति के बाद उसके अंग और ऊतक जरूरतमंद मरीजों को दान किए जा सकते हैं।
क्या सिर्फ युवा या कम उम्र के लोग ही अंगदान कर सकते हैं?
NOTTO के अनुसार, यह एक बड़ा मिथक है। किसी भी उम्र का व्यक्ति अंगदाता बन सकता है। अंगदान के लिए उम्र नहीं, बल्कि संबंधित अंग की कार्यक्षमता अहम होती है।
Disclaimer: आज राष्ट्रीय अंगदान दिवस मनाया जा रहा है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक करना है। NOTTO के अनुसार, एक व्यक्ति अंगदान करके 8 लोगों की जान बचा सकता है। जीवित व्यक्ति तथा ब्रेन स्टेम डेथ के बाद, कानूनी प्रक्रिया और परिवार की सहमति के अनुसार अंगदान किया जा सकता है। भारत में अंगदान की पूरी प्रक्रिया मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम (THOTA) के तहत की जाती है। भारत में हर साल हजारों की संख्या में ऑर्गन ट्रांसप्लांट किए जाते हैं, जबकि इसकी जरूरत लाखों में है। यानी देश में अंगों की जरूरत और उपलब्ध अंगों के बीच में काफी अंतर है। इसका सबसे मुख्य कारण है अंगदान की कमी यानी जिस संख्या में लोगों को अंगों की जरूरत है, उस संख्या में लोग अंगदान नहीं कर रहे हैं।