
अंजू रावत
अंजू रावत एक अनुभवी हेल्थ, फिटनेस, रिलेशनशिप, ब्यूटी और लाइफस्टाइल लेखक हैं, जिन्हें इन विषयों पर लिखने ... Read More
organ donation
Organ Donation: हर साल 3 अगस्त को राष्ट्रीय अंगदान दिवस (National Organ Donation Day) मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक करना है, ताकि जरूरतमंद लोगों की जान बचाई जा सके। अंगदान एक ऐसा फैसला है, जो किसी व्यक्ति की मौत के बाद भी कई लोगों को नई जिंदगी दे सकता है। NOTTO के अनुसार, भारत में हर साल हजारों मरीजों का किडनी, लिवर, हार्ट और फेफड़ों का ट्रांसप्लांट होता है। लेकिन, आज भी देश में जरूरत के मुकाबले अंगदान करने वालों की संख्या बहुत कम है। यही वजह है कि समय पर अंग नहीं मिलने की वजह से कई लोग अपनी जान गंवा देते हैं।
ऑर्गन डोनेशन का मतलब है कि कोई व्यक्ति अपने अंग और ऊतक दान करता है, ताकि जिन लोगों के अंगों ने काम करना बंद कर दिया है, उनका ट्रांसप्लांट किया जा सके। देश में यह प्रक्रिया मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम (THOTA) के तहत की जाती है। आइए, आज National Organ Donation Day के मौके पर जानते हैं कि मौत के बाद कौन-कौन से अंग दान किए जा सकते हैं और अंगदान करके एक व्यक्ति कितने लोगों को नया जीवन दे सकता है?
organ donation
NOTTO के अनुसार, एक ऑर्गन डोनर अंगदान करके 8 लोगों तक की जान बचा सकता है। इसलिए लोगों को ऑर्गन डोनेट करने के लिए जागरूक किया जाता है। वहीं, ऊतकों के दान से भी कई लोगों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है। जैसे- कॉर्निया दान से दो लोगों की आंखों की रोशनी वापस लाई जा सकती है।
NOTTO के अनुसार, मौत के बाद इन अंगों को दान किया जा सकता है-
इसके अलावा, कई तरह के ऊतक यानी टिशू भी दान किए जा सकते हैं-
organ donation
NOTTO के अनुसार, ऑर्गन डोनेशन 2 प्रकार का होता है। इसमें एक जीवित अंगदान (Living Donation) और मृत्यु के बाद अंगदान (Deceased Donation) शामिल हैं।
NOTTO के अनुसार, यह एक बड़ा मिथक है। किसी भी उम्र का व्यक्ति अंगदाता बन सकता है। अंगदान के लिए उम्र नहीं, बल्कि संबंधित अंग की कार्यक्षमता अहम होती है।
Disclaimer: आज राष्ट्रीय अंगदान दिवस मनाया जा रहा है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक करना है। NOTTO के अनुसार, एक व्यक्ति अंगदान करके 8 लोगों की जान बचा सकता है। जीवित व्यक्ति तथा ब्रेन स्टेम डेथ के बाद, कानूनी प्रक्रिया और परिवार की सहमति के अनुसार अंगदान किया जा सकता है। भारत में अंगदान की पूरी प्रक्रिया मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम (THOTA) के तहत की जाती है। भारत में हर साल हजारों की संख्या में ऑर्गन ट्रांसप्लांट किए जाते हैं, जबकि इसकी जरूरत लाखों में है। यानी देश में अंगों की जरूरत और उपलब्ध अंगों के बीच में काफी अंतर है। इसका सबसे मुख्य कारण है अंगदान की कमी यानी जिस संख्या में लोगों को अंगों की जरूरत है, उस संख्या में लोग अंगदान नहीं कर रहे हैं।