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हर साल 13 अगस्त को विश्व अंगदान दिवस (World Organ Donation Day 2023) मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों में अंगदान को लेकर जागरुकता पैदा करना है। वैसे तो ब्लड डोनेशन दिवस सालों से मनाया जा रहा है लेकिन भारत में इस विषय में लोग कम ही जागरुक हैं। आज हम आपको लिवर ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. अंकुर गर्ग से ऑर्गन डोनेशन से संबंधित जरूरी बातें बता रहे हैं।
अंगदान हमेशा से स्वास्थ्य विभाग में अनदेखा पहलू रहा है। चाहे सरकारी विभाग हो या प्राइवेट स्वास्थ्य विभाग पाटर्नर हो, किसी ने भी इस विषय में न कोई पहल की है और न ही कोई जागरुकता अभियान चलाए हैं। वहीं, समाज के स्तर पर भी लोग अंगदान को हमेशा से नजरअंदाज करते आए हैं और कभी-कभी तो इसे धार्मिक मिथ्य और सिद्धांतों से जोड़ दिया जाता है। इसके अलावा, अंग प्रत्यारोपण सेवाएं प्रदान करने वाले प्रमुख संस्थान ज्यादातर प्राइवेट स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता हैं और समाज के रूप में हमारे मन में इससे संबंधित बहुत सारे संदेह रहते हैं जो सच नहीं हैं। इसलिए किसी भी संदेह या मिथ को मानने या आगे बढ़ाने से पहले हमें पूरी तरह से जागरुक और अवगत होना चाहिए।
जैसा कि पहले ही इस बात का जिक्र किया जा चुका है कि ब्रेन डेथ और अंगदान के विषय में हमारे देश में ज्ञान और जागरुकता की भारी कमी रही है। इसके अलावा अंग दान के विषय को समाज तक पहुंचाने के लिए किसी तरह का प्रयास भी नहीं किया गया है।
किडनी और लिवर ऐसे अंग है जो अधिक ट्रांसप्लांट किए जाते हैं और इनमें से भी किडनी टॉप पर है। इनके अलावा, हार्ट, फेफड़े, पैंक्रियाज और छोटी आंत बॉडी के ऐसे अंग हैं जिनकी ट्रांसप्लांटेशन में सबसे ज्यादा डिमांड रहती है। ट्रांसप्लांट के लिए किडनी की कितनी कमी रहती है इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लाखों लोग सालों-साल डायलिसिस पर निर्भर रहते हैं। लिवर का काम कोई और अंग कर पाए ऐसी अभी तक कोई टेक्नॉलॉजी नहीं आई है, इसलिए इसके बारे में डाटा उतना सटीक नहीं है, लेकिन फिर भी लाखों लोगों को लिवर की आवश्यकता होती है।
वैसे तो अंगदान एक ऐसी प्रक्रिया है जो व्यक्ति अपनी मर्जी से करता है लेकिन फिर भी तरह-तरह के जागरुकता अभियान चलाकर और उन्हें मीडिया इंडस्ट्री की मदद से लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। इससे लोगों में अंग दान को लेकर उत्सुकता बढ़ सकती है।
एक ब्रेन डेड डोनर अपनी 2 किडनी, 1 लिवर, हार्ट, पैंक्रियाज और छोटी आंत दान कर सकता है जिसे फिर से विभाजित कर 1 एडल्ट और 1 बच्चे में ट्रांस्प्लांट किया जा सकता है। ऐसे में एक व्यक्ति 8 जिंदगियां बचा सकता है और 8 टूटते परिवारों में जान डाल सकता है। इनमें से कुछ लोग ऐसे हो सकते हैं जो अपना पूरा परिवार चला रहे हैं, कोई परिवार का इकलौता बच्चा हो सकता है और कोई मां या कोई भी सदस्य हो सकता है।
ब्रेन डेड के बाद अगर अंगदान की बात करें तो क्योंकि उस व्यक्ति का ब्रेन पहले ही डेड हो चुका है, दिल की धड़कन चलने के बावजूद वह व्यक्ति पुनर्जीवित नहीं हो सकता है, ऐसे में यहां क्या फैसला लेना है ये जिम्मेदारी परिवार के सबसे निकट रिश्तेदार की होती है। दूसरी ओर यदि जीवित व्यक्ति के अंगदान की बात करें तो कानून के हिसाब से एक व्यक्ति सिर्फ अपने परिवार के सदस्य को अंगदान कर सकता है। अंगदान करने से पहले डोनर को मेडिकली चेक किया जाता है जिसमें जरूरी ब्लड टेस्ट और अन्य जांच होती हैं। जब रिपोर्ट पूरी तरह से ठीक आती है और डोनर को कोई खतरा नहीं होता है उस स्थिति में अंगदान की मंजूरी दी जाती है। जैसे यदि कोई व्यक्ति किडनी या लिवर का कुछ हिस्सा दान करता है तो उसके बाद दानकर्ता शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक, हर स्तर पर अच्छा जीवन जी सकता है।
(Inputs: Dr. Ankur Garg, HOD & Sr. Consultant, HPB Surgery & Liver Transplant, Sanar International Hospitals, Gurgaon)