
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Written By: Ashu Kumar Das | Published : May 8, 2026 9:05 AM IST
Medically Verified By: Dr. Manasi Gupta
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थैलेसीमिया एक ऐसी बीमारी है जो खून से जुड़ी होती है। थैलेसीमिया में शरीर सही मात्रा में हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं (Red Blood Cells) में पाया जाता है और यह शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी ज्यादातर लोगों में जन्म से ही होती है यानी की माता- पिता के जरिए ही थैलेसीमिया बच्चों में आता है और गंभीर संक्रमण का कारण बनता है। हीमोग्लोबिन न बनने के कारण थैलेसीमिया होने पर मरीज को बार- बार खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। भारत जैसे अन्य विकासशील देशों में आज भी थैलेसीमिया के प्रति जागरूकता में कमी देखी जाती है। इसलिए हर साल 8 मई को वर्ल्ड थैलेसीमिया डे मनाया जाता है। वर्ल्ड थैलेसीमिया डे को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को इस बीमारी के प्रति सचेत करना है।
वर्ल्ड थैलेसीमिया डे के खास मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं थैलेसीमिया के कारण शरीर के कौन से अंग प्रभावित होते हैं और इसका इलाज क्या है। इस विषय पर अधिक जानकारी दे रही हैं नोएडा स्थित बोन मैरो ट्रांसप्लांट की एसोसिएट कंसल्टेंट डॉ. मानसी गुप्ता (Dr. Manasi Gupta, Associate Consultant, Bone Marrow Transplant at Medanta Noida
)।
थैलेसीमिया का असर केवल खून तक सीमित नहीं रहता। धीरे-धीरे यह शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है।
थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी का असर सबसे ज्यादा हार्ट पर पड़ता है। डॉक्टर बताते हैं कि थैलेसीमिया में बार-बार खून चढ़ाने से शरीर में आयरन बढ़ने लगता है। इससे हार्ट के आसपास अतिरिक्त दबाव बनने लगता है। इससे धड़कन का तेज और अनियमित होना, सांस फूलना, शारीरिक कमजोरी महसूस होना और गंभीर मामलों में हार्ट फेल होने का खतरा भी रहता है।
थैलेसीमिया के कारण लिवर कमजोर पड़ने लगता है।
लिवर शरीर का बहुत जरूरी अंग है जो खून साफ करने और पोषक तत्वों को संभालने का काम करता है। थैलेसीमिया जैसी बीमारी में आयरन लिवर में जमा होने लगता है। इसके कारण पेट में सूजन, भूख कम लगना, पीलिया और शारीरिक कमजोरी होने लगती है।
थैलेसीमिया के मरीजों की हड्डियां सामान्य लोगों की तुलना में कमजोर होती है। डॉक्टर कहना है कि शरीर जब पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं नहीं बना पाता, तब बोन मैरो ज्यादा काम करने लगता है। इसके कारण हड्डियां कमजोर होना, चेहरे की हड्डियों का आकार बदलना, बार-बार फ्रैक्चर होने की समस्या बार- बार होती है। थैलेसीमिया का असर वयस्कों से ज्यादा बच्चों में देखने को मिलता है।
थैलेसीमिया से शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है, जिसका असर फेफड़ों पर भी पड़ता है। थैलेसीमिया के कारण अक्सर मरीजों को सांस लेने में दिक्कत, सीने में भारीपन, शारीरिक थकान की परेशानी होना आम है। थैलेसीमिया के कारण अगर हार्ट और फेफड़े दोनों प्रभावित हों तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
कुछ मामलों में थैलेसीमिया का असर किडनी पर भी पड़ सकता है। इसके कारण पेशाब से जुड़ी परेशानियां, शरीर में सूजन और कमजोरी की समस्या देखी जाती है। हालांकि यह समस्या हर मरीज में नहीं होती, लेकिन लंबे समय तक बीमारी रहने पर खतरा बढ़ सकता है।
इसके अलावा थैलेसीमिया का असर हार्मोन ग्रंथि पर भी पड़ता है। डॉक्टर के अनुसार, थैलेसीमिया का असर केवल खून पर नहीं बल्कि दिल, लिवर, तिल्ली, हड्डियों और शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ सकता है। सही समय पर इलाज, नियमित जांच और जागरूकता से मरीज लंबा और बेहतर जीवन जी सकते हैं। अगर आपके परिवार में किसी व्यक्ति को थैलेसीमिया है तो इस विषय पर डॉक्टर से बात करें और उनके शरीर के अंगों को बचाएं।
जिनके परिवार में थैलेसीमिया का इतिहास हो, उन्हें इस बीमारी का खतरा ज्यादा रहता है।
बोन मैरो ट्रांसप्लांट से कुछ मामलों में थैलेसीमिया पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
बार-बार कमजोरी, खून की कमी, पीली त्वचा और थकान के लक्षण दिखने पर जांच करानी चाहिए।