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बच्चों में जन्मजात हृदय रोग: क्यों होते हैं ये रोग और क्या दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में इनका मुफ्त इलाज संभव है?

Congenital Heart Disease : बच्चों को जन्म के समय से होने वाली हार्ट डिजीज आज के समय में काफी कॉमन हो चुका है। हर 100 में से 1 बच्चा इस बीमारी से जूझ रहा है। आइए जानते हैं इसके कारण और किन अस्पतालों में होता है फ्री में इलाज-

बच्चों में जन्मजात हृदय रोग: क्यों होते हैं ये रोग और क्या दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में इनका मुफ्त इलाज संभव है?
Congenital Heart disease
VerifiedVERIFIED By: Vaibhav Mishra

Written by Kishori Mishra |Published : September 28, 2025 9:02 AM IST

World Heart Day 2025 : जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease - CHD) वे हृदय संबंधी विकृतियां होती हैं, जो बच्चे में जन्म के समय से ही मौजूद होती हैं। ये विकृतियां हृदय की संरचना, उसके वाल्व, रक्त नलिकाओं या रक्त प्रवाह के तरीके में असामान्यता के रूप में हो सकती हैं। जन्मजात हृदय रोग भारत सहित पूरे विश्व में बच्चों की मृत्यु का एक प्रमुख कारण है। इस विषय को लेकर अधिक जानकारी के लिए हमने पटपड़गंज स्थित मैक्स हॉस्पिटल के सीनियर डायरेक्टर कार्डियक साइंसेस के डॉ. वैभव मिश्रा से बातचीत है। आइए डॉक्टर से जानते हैं बच्चों में जन्मजात हृदय रोग क्यों होते हैं और दिल्ली के किन अस्पतालों में इसका फ्री में इलाज हो सकता है?

किन कारणों से बच्चों में बच्चों में जन्मजात हृदय रोग होता है?

डॉक्टर वैभव का कहना है कि इन रोगों के होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। सबसे आम कारणों में अनुवांशिक (जेनेटिक) कारण, माता-पिता में से किसी में हृदय रोग का इतिहास होना या किसी क्रोमोसोमल असामान्यता (जैसे डाउन सिंड्रोम) शामिल हैं।

इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान मां का संक्रमण (जैसे रूबेला वायरस), अधिक दवाइयों का सेवन, शराब या धूम्रपान करना, मधुमेह जैसी स्थितियां भी शिशु के हृदय के विकास को प्रभावित कर सकती हैं। कुछ मामलों में पर्यावरणीय कारणों और पोषण की कमी को भी जिम्मेदार माना जाता है।

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जन्मजात हृदय रोग के लक्षण क्या हैं?

जन्मजात हृदय रोग के लक्षणों में तेज सांस चलना, दूध पीने में कठिनाई, वजन न बढ़ना, होंठों और त्वचा का नीला पड़ना (स्यानोसिस) इत्यादि शामिल हो सकते हैं। कुछ गंभीर मामलों में जन्म के तुरंत बाद इलाज आवश्यक होता है। मुख्य रूप से अगर लक्षण काफी गंभीर दिख रहे हैं, तो इस स्थिति में फौरन सर्जरी की जरूरत होती है।

गर्भ में ही पता चल जाता है जन्मजात हृदय रोग

आजकल मेडिकल साइंस की मदद से ऐसे रोगों की पहचान गर्भ में ही फिटल इकोकार्डियोग्राफी के माध्यम से की जा सकती है और कई बार जन्म के तुरंत बाद सर्जरी या इंटरवेंशनल प्रक्रिया द्वारा इलाज संभव होता है।

समय पर पहचान और सही उपचार से अधिकांश बच्चों को सामान्य जीवन जीने का अवसर मिल सकता है। इसलिए जागरूकता और समय पर जांच अत्यंत आवश्यक है।

दिल्ली के किन सरकारी अस्पतालों में फ्री में जन्मजात हृदय रोग का इलाज होता है?

दिल्ली के कुछ सरकारी अस्पतालों में जैसे- एम्स, वीएमएमसी और सफदरजंग जैसे बड़े सरकारी अस्पतालों में जन्मजात हृदय रोगों का इलाज मुफ्त में होता है, लेकिन सर्जरी के दौरान आपको कुछ खर्च उठाने पड़ते हैं। हालांकि, अगर आप एम्स में 1 साल से कम उम्र के बच्चे की सर्जरी कराते हैं, तो सर्जरी मुफ्त में हो सकती है। इसके अलावा दिल्ली के इन सरकारी अस्पतालों में सर्जरी कम लागत में उपलब्ध है।

इसके अलावा इलाज के दौरान कई तरह के टेस्ट भी फ्री में होते हैं, क्योंकि यहां केंद्र और दिल्ली सरकार की योजनाओं का लाभ मिलता है। वहीं, पूरी तरह से मुफ्त इलाज की उपलब्धता व्यक्ति की आर्थिक स्थिति पर भी लागू होती है, इसके अलावा फ्री में इलाज कुछ योजनाओं पर भी निर्भर करती है। इसलिए अगर आप फ्री में इलाज कराना चाहते हैं, तो पात्रता जरूर देंखें।

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Highlights

  • गर्भ में ही जन्मजात हृदय रोगों का पता लगाया जा सकता है।
  • कुछ स्थितियों में जन्मजात हृदय रोग के इलाज की आश्यकता बच्चे के जन्म के तुरंत बाद होती है।
  • दिल्ली के कुछ सरकारी अस्पताल जैसे- एम्स, सफदरजंग जैसे अस्पतालों में बच्चों के हार्ट का फ्री में इलाज हो सकता है।